महाशिवरात्रि केवल पर्व नहीं,आत्मशुद्धि और शिवत्व प्राप्ति का महायोग है। निलकंठेश्वर धाम में यह योग हर श्रद्धालु को दिव्यता की अनुभूति कराता है। निलकंठेश्वर धाम में राधा-कृष्ण व मित्र सुदामा की प्राण-प्रतिष्ठा, महाशिवरात्रि पर आस्था का महासंगम रचने को तैयार शिवनगरी

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महाशिवरात्रि केवल पर्व नहीं,आत्मशुद्धि और शिवत्व प्राप्ति का महायोग है। निलकंठेश्वर धाम में यह योग
हर श्रद्धालु को दिव्यता की अनुभूति कराता है।

निलकंठेश्वर धाम में राधा-कृष्ण व मित्र सुदामा की प्राण-प्रतिष्ठा, महाशिवरात्रि पर आस्था का महासंगम रचने को तैयार शिवनगरी

जहाँ हर श्वास में हर–हर महादेव की गूंज है, जहाँ भक्ति केवल अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन का आधार है वहीं सलैया–पडखुरी स्थित निलकंठेश्वर महादेव धाम आज सनातन चेतना का जीवंत प्रतीक बन चुका है। वर्षों की तपस्या, सेवा और संकल्प से सजे इस शिवधाम में जब राधा–कृष्ण और मित्र सुदामा की दिव्य प्रतिमाओं की प्राण–प्रतिष्ठा हुई, तो यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि आस्था के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। बाबा नीलकंठ की इस पावन भूमि पर भक्ति, प्रेम और करुणा ने साकार रूप ले लिया।
कटनी/विजयराघवगढ़।। सलैया-पडखुरी स्थित निलकंठेश्वर महादेव मंदिर आज केवल एक पूजास्थल नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, अटूट आस्था और दिव्य चेतना का विराट केंद्र बन चुका है। वर्षों से निरंतर बढ़ती श्रद्धा और भक्तों के विश्वास ने इस शिवधाम को क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना दिया है।
6 फरवरी 2026 को निलकंठेश्वर धाम में भक्ति और दिव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराधारानी एवं उनके परम मित्र सुदामा की भव्य प्रतिमाओं की वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और संत-महात्माओं की सान्निध्य में विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर पूरा धाम “राधे-कृष्ण” और “हर-हर महादेव” के उद्घोष से गूंज उठा। वातावरण प्रेम, करुणा और भक्ति रस से सराबोर हो गया। पूजन उपरांत कन्याभोज एवं ब्राह्मण भोज का आयोजन कर सेवा और समर्पण की सनातन परंपरा को साकार किया गया।
निलकंठेश्वर भक्ति धाम में मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि वर्षों से कटनी जिले का सबसे दिव्य और भव्य धार्मिक आयोजन मानी जाती है। इस परंपरा की नींव हरिश्चंद्र पद्मभूषण से सम्मानित स्व. मदनलाल ग्रोवर ने रखी थी, जिसे आज उसी श्रद्धा, वैभव और आध्यात्मिक गरिमा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग निर्माण, भव्य शिव बारात, पूर्णाहुति और विशाल भंडारे जैसे आयोजन श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभूति प्रदान करते हैं। इस विराट धार्मिक आयोजन के केंद्र में मदनलाल ग्रोवर की तपस्या, उनके पुत्र बाबू ग्रोवर व रुद्राक्ष ग्रोवर का समर्पण तथा विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक की प्रेरक भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इनके मार्गदर्शन में निलकंठेश्वर धाम निरंतर बृहद स्वरूप ग्रहण कर रहा है और जन-जन की श्रद्धा का प्रतीक बनता जा रहा है। इस वर्ष विशेष आकर्षण के रूप में ब्रजवासी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली दिव्य लीलाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को साक्षात वृंदावन की अनुभूति कराएंगी।
निलकंठेश्वर मंदिर अब केवल पत्थरों से बना मंदिर नहीं, बल्कि वह जीवंत आस्था केंद्र है जहाँ लोग दूर-दूर से बाबा नीलकंठ के दर्शन, मनोकामना पूर्ति और आत्मिक शांति के लिए आते हैं। यह धाम सनातन संस्कृति, सेवा, समर्पण और विश्वास की ऐसी ज्योति बन चुका है, जो निरंतर प्रज्ज्वलित होती जा रही है।
निलकंठेश्वर धाम आज एक मंदिर भर नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और सनातन संस्कारों का केंद्र बन चुका है। मदनलाल ग्रोवर की तपोभूमि पर उनके पुत्र बाबू ग्रोवर के निरंतर समर्पण और प्रेरणा स्रोत विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के मार्गदर्शन में यह धाम निरंतर विस्तार और दिव्यता की ओर अग्रसर है। यहाँ आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु केवल दर्शन नहीं करता, बल्कि आत्मिक शांति, विश्वास और ऊर्जा लेकर लौटता है। महाशिवरात्रि पर रचने जा रहा यह दिव्य आयोजन एक बार फिर सिद्ध करेगा कि निलकंठेश्वर महादेव धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि सनातन परंपरा की वह अखंड ज्योति है, जो युगों तक श्रद्धा पथ को आलोकित करती रहेगी।

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