भोपाल में नकाबपोशों का तांडव: राजधानी में बिहार-स्टाइल गैंगवार की दस्तक, पुलिस की नाकामी पर उठे सवाल—व्यापारी डरे, आम जनता असुरक्षित

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(संजीव दुबे)

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नकाबपोश बदमाशों द्वारा मैजिक स्पॉट कैफे पर किए गए हमले ने शहर की कानून व्यवस्था की नींव हिलाकर रख दी है। तलवार और डंडों से लैस 20–25 बदमाशों ने जिस बेखौफ अंदाज में कैफे में घुसकर तोड़फोड़ की, उसने राजधानी को अपराध के नए चेहरे से रूबरू करा दिया है। CCTV फुटेज में दिख रहे दृश्य किसी फिल्मी सीन जैसे नहीं, बल्कि बिहार और यूपी में कुख्यात गैंगों द्वारा अपनाए जाने वाले उसी तांडव-स्टाइल की याद दिलाते हैं।

राजधानी में इस स्तर की वारदात होना स्वयं इस बात का संकेत है कि अपराधियों में पुलिस का कोई भय नहीं रह गया है। बदमाश खुलेआम हथियार लेकर घूम रहे हैं, कैफे में दाखिल होते हैं और कुछ ही मिनटों में पूरा का पूरा प्रतिष्ठान बर्बाद कर डालते हैं। ग्राहक जान बचाकर भागते दिखते हैं और कर्मचारी डर के साये में लकवाग्रस्त से नजर आते हैं। जिस भोपाल को सुरक्षित शहर कहा जाता था, वहां अब बदमाशों के कदम उसी तरह पड़ते दिखाई दे रहे हैं, जैसे बिहार में कुख्यात गैंग बीते वर्षों में दुकानों, होटलों, ट्रांसपोर्ट लाइनों और ठिकानों पर धावा बोलते रहे हैं।

 

मिसरोद में हुई यह वारदात सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि राजधानी को दिया गया एक खुला संदेश है कि अपराधियों की पकड़ बढ़ रही है। पुलिस ने योगी, निखिल और अभिषेक सहित कुछ आरोपियों के नाम पर एफआईआर तो दर्ज कर ली है, लेकिन अब तक गिरफ्तारी न होना लोगों के आक्रोश को और गहरा कर रहा है। सवाल यह है कि जब प्रदेश की राजधानी में पुलिस इस तरह के संगठित हमलों को रोक नहीं पा रही, तो जिलों और कस्बों में व्यापारी कितने सुरक्षित होंगे?

 

व्यापारी संगठनों का कहना है कि यह घटना आने वाले गंभीर अध्याय की शुरुआत है। “यदि राजधानी में बिहार-स्टाइल गैंग सक्रिय हो गए, तो छोटे व्यापारियों का धंधा खत्म होने में देर नहीं लगेगी,” एक स्थानीय व्यापारी ने कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों को गश्त व्यवस्था की कमजोरियों का पूरा फायदा मिल रहा है। रात में पुलिस की मौजूदगी नाम मात्र की होती है और यही बदमाशों के लिए खुले अवसर पैदा करती है।

 

शहर के लोग इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि अगर राजधानी में यह हाल है, तो प्रदेश के बाकी हिस्सों में स्थिति कितनी भयावह होगी। भोपाल में तलवार और डंडों का तांडव हो सकता है, तो छोटे शहरों में बदमाश क्या-क्या नहीं करते होंगे—यह सवाल अब हर नागरिक के मन में उठ रहा है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में संगठित अपराध का नेटवर्क फैल रहा है, और राजधानी इसकी जड़ बनने की ओर बढ़ रही है।

 

पुलिस का दावा है कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और दबिशें दी जा रही हैं, लेकिन शहर के नागरिक इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक अपराधियों को कठोर कार्रवाई का संदेश नहीं मिलता, इस तरह की घटनाएं बढ़ती ही जाएंगी।

 

राजधानी भोपाल में नकाबपोशों का यह तांडव बताता है कि सुरक्षा व्यवस्था कितनी कमजोर हो चुकी है। अब सवाल सिर्फ एक है—क्या पुलिस इस चुनौती को समझ रही है या राजधानी को बिहार की तर्ज पर अपराधियों के गैंगों के हाथों सौंपने की तैयारी हो चुकी है?

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