देवलाय-विद्यालय के समीप खुली मदिरालय

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ठेका देने के पहले जिम्मेदार भूल गये कायदे

सार्वजनिक स्थल में लगता है शराबियों का डेरा

एक तरफ देवालय और विद्यालय तो दूसरी तरफ मदिरालय, जी हां, नियमों को ताक पर रख स्कूलों और धाॢमक स्थलों के पास धड़ल्ले से शराब की दुकानें चलाई जा रही है और विभाग मौन है और शराब व्यवसायियों का धंधा आसानी से फल-फूल रहा है, यहां के शराब विक्रेताओं में कानून का डर नहीं है।

(सुनील मिश्रा) -9755476196

शहडोल। आबकारी विभाग के अधिकारी नियम कानून को ताक पर रख सरकारी खजाना भरने में लगे हैं। फिर चाहे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों या बच्चों और युवकों के मन पर विपरीत असर पड़े। विभाग के अधिकारियों को न तो मंदिर की परवाह है और न ही शिक्षण संस्थानों की। अधिकारियों से सांठगांठ कर ठेका लेने वालों ने जहां चाहा वहीं  अंग्रेजी, बीयर और भांग का ठेका खोल दिया, लेकिन विभागीय और जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

प्रशासन की अनदेखी

जयसिंहनगर विकास खण्ड मुख्यालय में बस स्टैण्ड व मुख्य मार्केट के बिल्कुल सामने ही अंग्रेजी शराब दुकान का संचालन हो रहा है, प्रशासन की कार्यकुशला का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धार्मिक एवं विद्यालय के पास शराब दुकान खोलने की अनुमति दे दी गई और जिम्मेदारों को शिकायतों के बाद भी उक्त स्थल से नहीं हटाया जा रहा है। शराब भ_ी का संचालन जिस स्थल पर हो रहा है, उसके इर्द-गिर्द ही मुख्य मार्केट होने के साथ-साथ शिव जी का मंदिर व शासकीय विद्यालय स्थित हैं, इसी के साथ-साथ शराब भट्टी के बिल्कुल समीप शहडोल-रीवा नेशनल हाईवे गुजरती है।

शराब ठेके खोलने के नियम 

आबकारी नियम के तहत धार्मिक स्थल, स्कूल, लाइब्रेरी, मंदिर, हॉस्पिटल से बार, शराब, भांग, बीयर की दुकान कम से कम 50 मीटर दूर हो। पहले यह दूरी उपरोक्त स्थानों से 100 मीटर थी। नियम के तहत मलिन बस्ती में शराब की दुकान नहीं खुलेगी, लेकिन जयसिंहनगर में इसका उल्लंघन हो रहा है। नियम के मुताबिक मॉडल शॉप, शराब ठेका और बार के अलावा कहीं और शराब पीने पर पाबंदी है, लेकिन यहां तो शाम होते ही बाजारों और रास्तों पर लोग खुलेआम शराब पीते दिखाई दे जाएंगे।

शराबियों का लगता है जमघट

शराब भ_ी जिस स्थल पर है, वहां सार्वजनिक आवागमन होने के कारण क्षेत्र के सामान्य व वरिष्ठ जनों का आना-जाना बना रहता है, किन्तु शराबियों के जमघट के कारण इन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्रीय लोगों की मांग है कि उक्त शराब भट्टी को मुख्य मार्केट सार्वजनिक स्थल से जल्द से जल्द से हटाया जाए, जिससे आम जनों को शराबियों से होने वाली समस्याओं से छुटकारा मिल सके।

सड़क पर पड़े रहते हैं शराबी

नगर में संचालित शराब की दुकान की हकीकत देखी जाए तो स्थिति यह है कि 4 से 6 दिन में एक दो शराबी नशे से धुत्त होकर सड़क व सड़क किनारे पड़े नजर आते हैं। जो कि देर रात तक पड़े रहते हैं। जिससे न केवल उनसे दुर्घटना होने की आशंका रहती है। जिससे परेशान नागरिकों ने इस शराब की दुकान को यहां से हटाकर अन्य स्थान पर संचालित कराए जाने की मांग की है।

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