पप्पू पास ही नहीं हुआ,मेरिट में आ गया, खाते से करोड़पति है पुलिस का पप्पू

0
शहडोल। जिले के बुढ़ार थाना क्षेत्र में इन दिनों एक ही नाम सबसे अधिक चर्चा में है, वह है थाने की सरकारी गाड़ी चलाने वाला चालक पप्पू, जिसके बारे में स्थानीय लोगों का दावा है कि वह अब सामान्य कर्मचारी नहीं रहा, बल्कि थाना स्तर पर एक समानांतर सत्ता का केंद्र बन चुका है। जनचर्चाओं के अनुसार पप्पू के बैंक खातों में लाखों रुपये का कथित बेनामी धन जमा है, और यही कारण है कि लोग व्यंग्य में कह रहे हैं कि पप्पू अब सिर्फ पास नहीं हुआ है बल्कि मेरिट सूची में अपनी जगह बना चुका है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि थाना प्रभारी कोई भी आए, पप्पू की स्थिति हमेशा ‘खास’ ही रहती है, क्योंकि उसके पास क्षेत्र के छोटे-बड़े अवैध कारोबारियों से लेकर हर तरह के जुगाड़कर्ताओं तक का सीधा संपर्क है। लोगों का आरोप है कि पप्पू के मोबाइल नंबर, गूगल पे अकाउंट और दो-दो बैंक खाते अधिकांश अवैध कारोबारियों के पास सुरक्षित रहते हैं, और किसी भी लेनदेन या कामकाज में इन्हीं का उपयोग होता है। हैरानी इस बात की है कि जब भी कोई शिकायतकर्ता थाने से बाहर निकलता है तो एसपी कार्यालय से उसे फोन तुरंत चला जाता है, लेकिन पप्पू के नंबर पर कभी कोई ‘कवरेज’ दिखाई नहीं देती, जैसे वह पुलिस विभाग की निगरानी प्रणाली से पूरी तरह बाहर हो।
जनता व्यंग्य करते हुए कहती है कि पप्पू का भोलापन सिर्फ दिखावा है, वह मासूम चेहरा उसके वास्तविक प्रभाव को छिपाने की एक ढाल है। जानकारी यह भी सामने आती रहती है कि पप्पू न केवल थाने के रोजमर्रा के कार्यों में दखल रखता है बल्कि कथित रूप से धन उगाही की जिम्मेदारी भी उसी के पास है, जो उसे एक चालक से आगे बढ़ाकर एक अनौपचारिक ‘फाइनेंस प्रभारी’ की भूमिका में स्थापित कर देती है। क्षेत्र में यहां तक कहा जा रहा है कि पप्पू इतना प्रभावशाली हो चुका है कि अधिकारी भी कई मामलों में उसी की ‘आंखों’ से देखना पसंद करते हैं, और पप्पू महाभारत के संजय की तरह पूरे थाने की गतिविधियों का वर्णन करने वाला एक ‘अनिवार्य व्यक्ति’ बन गया है।
अचरज की बात यह है कि बुढ़ार क्षेत्र की हर दुकान, हर चाय स्टॉल और हर गुमटी में यह चर्चाएं खुलेआम चल रही हैं, पर थाना के ठीक बगल बैठे एसडीओपी से लेकर एएसपी और यहां तक कि पुलिस कप्तान तक इन चर्चाओं से अनजान बने हुए हैं। जबकि आईबी और सीआईडी जैसी एजेंसियां लगातार सूचनाएं एकत्रित करती हैं, बावजूद इसके पप्पू का नाम और उसके कामकाज उनके रिकॉर्ड में बेहद कम ही दिखाई देता है, जिससे सवाल उठता है कि क्या वाकई अधिकारी अनजान हैं या फिर अनदेखी का यह खेल किसी बड़ी व्यवस्था का हिस्सा है।
क्षेत्रीय लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि थाने में जो काम नियम से होना चाहिए वह पप्पू की लेन पर निर्भर है, और जो राशि सरकारी खाते में नहीं जाती वह पप्पू के निजी खातों में पहुंच जाती है। काले धन को सफेद करने से लेकर अवैध लेनदेन तक, हर रास्ता पप्पू की पासबुक से होकर गुजरता है, और यही कारण है कि लोग चुटकी लेते हैं कि “पप्पू अब पप्पू नहीं रहा… साहब, पप्पू तो इस थाने का असली मेरिट होल्डर बन गया है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed