अमरकंटक में पार्किंग माफिया सक्रिय! सीएमओ के आदेश का हवाला देकर हर स्थल पर हो रही वसूली

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विरोध करने पर पर्यटकों से मारपीट तक की नौबत

अनूपपुर। तीर्थराज अमरकंटक, जिसे पवित्र नर्मदा माई का उद्गम स्थल और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम केंद्र माना जाता है, आजकल अवैध वसूली का गढ़ बन गया है। नगर परिषद अमरकंटक के कर्मचारियों और उनके सहयोगियों पर आरोप है कि वे सीएमओ के आदेश का हवाला देकर जगह-जगह पर्यटकों से मनमाना पार्किंग शुल्क वसूल रहे हैं। विरोध करने वालों के साथ अभद्रता और मारपीट की घटनाएं आम हो चुकी हैं।

हर मार्ग पर रस्सी और रसीद का खेल
स्थानीय अधिवक्ता मयूरदीप मिश्रा ने मुख्यमंत्री और कलेक्टर को शिकायत भेजते हुए बताया कि अमरकंटक के कई मार्गों पर रस्सी लगाकर वाहनों को रोका जाता है और 30 से 100 रुपये तक वसूले जाते हैं। मिश्रा ने कहा—“यदि वाहन सिर्फ गुजर रहा है तब भी शुल्क लिया जाता है और इसे सीएमओ का आदेश बताकर वसूली की जाती है।”
पर्यटकों के साथ मारपीट के मामले भी दर्ज

शिकायत में उल्लेख है कि 4 अगस्त 2025 को कपिलधारा में नगर परिषद कर्मचारियों और उनके गुर्गों ने मनेन्द्रगढ़ से आए एक पर्यटक की जमकर पिटाई कर दी। घायल युवक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और इस मामले में अमरकंटक थाना में प्रकरण दर्ज हुआ।

व्यू प्वाइंट और मंदिर मार्ग पर भी जबरन वसूली
सोनमुड़ा ग्लास व्यू प्वाइंट पर प्रति व्यक्ति 20 रुपये, झूला पुल रामधाट पर 10 रुपये और जैन मंदिर मार्ग पर वाहनों से 30 से 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुल्क की रसीद तो दी जाती है, पर दरें आधिकारिक आदेश से मेल नहीं खातीं।
रोजाना लाखों की वसूली, सरकारी खाते में कम राशि
सूत्रों के अनुसार अमरकंटक में रोजाना 1500 से 2000 वाहन प्रवेश करते हैं। पार्किंग शुल्क के नाम पर रोजाना ढाई से तीन लाख रुपये तक वसूले जा रहे हैं, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा सरकारी खाते में जमा नहीं होता।
अवैध वसूली रोकने की मांग
श्री मिश्रा ने अपनी शिकायत में मांग की है कि अमरकंटक जैसे पवित्र तीर्थ को वसूली का अड्डा बनने से बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएमओ और संबंधित अधिकारी जानबूझकर इस धंधे को संरक्षण दे रहे हैं। मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित कर जांच कराई जाए।

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