दबाव की राजनीति: स्वास्थ्य सहित नपा ने दी डॉक्टर के घर दबिश

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सोनोग्राफी सेंटर की जांच के साथ बताया अवैध रूप से किया है निर्माण

(Anil Tiwari)
शहडोल। कुशाभाऊ ठाकरे जिला चिकित्सालय में सिविल सर्जन की पदस्थापना और उससे नाराज लगभग 21 चिकित्सकों का इस्तीफा देना, इससे पहले पूर्व सिविल सर्जन डॉक्टर विक्रम बारिया सहित डॉ. डी.के. सिंह का ऐच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन देने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है, मंगलवार को एक बार फिर 21 चिकित्सकों ने जब एक बार एक साथ यहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को इस्तीफा दिया उसे कुछ घंटों बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर ने उनके आवेदन को अस्वीकृत का बयान जारी किया कि आवेदन निर्धारित प्रारूप में नहीं है स्थान पर अपनी सेवाएं दे, अन्यथा उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी बयान कुछ घंटे ही हुए थे कि जिला प्रशासन की टीम ने डीके सिंह के आवास पर स्थित उनके क्लीनिक पर छापा मारा है, इस कार्यवाही में एसडीएम सहित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, नपा शहडोल के सीएमओ अमित तिवारी व अन्य प्रशासनिक अधिकारी और स्वास्थ विभाग के अधिकारियों के शामिल होने की खबर है, हालांकि इस बात की अभी खबर नहीं है कि छापे के पीछे का मुख्य कारण किसी के द्वारा की गई शिकायत या और कोई अन्य कारण है, डॉ. डी.के. सिंह के घर पर प्रशासनिक छापे के बाद यह बात शहर में तेजी से आग की तरह फैल रही है कि प्रशासन उन पर दबाव डालने में लगा है।

उक्त मामले में छापा मारने आई टीम की ओर से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा जारी किए गए एक पत्र को भी मीडिया को दिया गया है जिसमें डॉ अंशुमान सोनारे, डॉक्टर सचिन कारखुर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में पदस्थ राकेश श्रीवास्तव की टीम को होना बताया गया है जिनके द्वारा आज सुबह से ही जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित सोनोग्राफी सेंटरों पर जांच और कार्यवाही की जा रही है हालांकि बुढार धनपुरी क्षेत्र में आज सुबह ही उक्त टीम ने कई पैथोलॉजी सेंटरों पर छापामार कार्यवाही की यह कार्यवाही करने पहुंचे विभाग के अधिकारियों और चिकित्सकों की टीम ने बताया कि यह रूटीन की कार्यवाही है यह शिकायत भी मिली थी कि यहां सोनोग्राफी सेंटर संचालित है उसी की जांच करने के लिए यहां आई हुई है।
इस संदर्भ में मौके पर उपस्थित नगर पालिका के सीएमओ व राजस्व अमले की टीम ने डी.के. सिंह के मकान की नाप-जोख भी कि और यह बताया कि मकान निर्माण की अनुमति नहीं ली गई और इसमें नपा के नियमों को तोड़ा गया है, इस संदर्भ में उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। यह माना जा रहा है कि सिविल सर्जन डॉ. जी.एस. परिहार की नियुक्ति को चुनौती देने की कीमत अब उन्हें छापामार कार्यवाही और अन्य कार्यवाहियों के रूप में चुकानी पड़ रही है।

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