भाजपा पार्टी पर राजा की नजर: नगर मंडल अध्यक्ष पद के लिए तेज हुई लॉबिंग

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शहडोल। संभाग के अनूपपुर नगर में भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रही संगठनात्मक हलचल इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है। आगामी पुनर्गठन से पहले नगर मंडल अध्यक्ष पद को लेकर खींचतान बढ़ गई है। इसी क्रम में जो नाम सबसे अधिक चर्चा में है, वह है स्थानीय स्तर पर सक्रिय राजा तिवारी, जिनका नाम लंबे समय से भूमि-संबंधी विवादों को लेकर चर्चा में रहा है। यह स्थिति पार्टी संगठन के भीतर असहजता पैदा कर रही है।
हर मोर्चे पर सक्रिय, बढ़ाई लॉबिंग की रफ्तार
सूत्रों के अनुसार, नगर मंडल अध्यक्ष का पद रिक्त होते ही राजा ने पार्टी के भीतर अपनी गतिविधियाँ तेज कर दीं। बताया जाता है कि वे जिले के कई प्रभावशाली नेताओं से लगातार संपर्क में हैं और कुछ नेताओं के जरिए अपने पक्ष में सिफारिशें भी करवाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि पद हासिल करने की उनकी इच्छा सिर्फ संगठनात्मक भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने भूमि-संबंधी कारोबार को राजनीतिक संरक्षण मिलने की उम्मीद भी देखते हैं। कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि यदि ऐसे विवादों में घिरे व्यक्ति को पद मिलता है, तो नगर में गलत संदेश जाएगा।
भूमि विवादों को लेकर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों और सूत्रों के अनुसार, राजा तिवारी का नाम वर्षों से कई प्रकार के भूमि विवाद, अवैध कब्जों से जुड़ी चर्चाओं और चेक बाउंस प्रकरणों के संदर्भ में सामने आता रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि भूमि लेन-देन में दबाव और विवादित सौदों की बातें अक्सर सुनने में आती रही हैं। इन्हीं आरोपों और चर्चाओं के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं का एक वर्ग उनके नाम का विरोध कर रहा है।
भाजपा के भीतर असंतोष कार्यकर्ता बोले: मेहनत करने वालों के साथ नाइंसाफी
भाजपा की पहचान हमेशा संगठनात्मक अनुशासन और जमीनी कार्यकर्ताओं के समर्पण से जुड़ी रही है। अब वही कार्यकर्ता नेतृत्व से नाराज हैं कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वालों को दरकिनार कर विवादों में घिरे किसी व्यक्ति को मौका दिया जा सकता है।एक कार्यकर्ता ने  कहा हमने बूथ से लेकर मंडल तक संगठन को मजबूत किया है, लेकिन यदि विवादों में रहे लोगों को पद मिलेंगे, तो मेहनती कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा। सूत्रों के अनुसार, कुछ कार्यकर्ता इस मुद्दे को जिला स्तर और संभवतः प्रदेश नेतृत्व तक ले जाने की तैयारी में हैं।
नेतृत्व की दुविधा-संगठन और छवि दोनों दाँव पर
जिला नेतृत्व के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। एक ओर पार्टी की साफ-सुथरी छवि बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय दबाव समूह भी सक्रिय हैं।
सूत्र बताते हैं कि यदि राजा तिवारी का नाम अंतिम सूची में शामिल हुआ, तो कई मंडल पदाधिकारियों और बूथ अध्यक्षों द्वारा खुले विरोध की संभावना है। कुछ नेता इस मुद्दे को प्रदेश संगठन के समक्ष भी रख सकते हैं।इन परिस्थितियों ने भाजपा की स्थानीय राजनीति में हलचल और बढ़ा दी है।

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