धनपुरी में असली और नकली ओबीसी की गूंज

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(शुभम तिवारी+7879308359)
शहडोल। प्रदेश और केन्द्र में बैठी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सत्ता में हर व्यक्ति की भागीदारी को लेकर सवर्णाे से लेकर ओबीसी और एसटी-एसी तक के आरक्षण को अपनी सहमति दी, यही नहीं महिलाओं के आरक्षण को लेकर तो पार्टी ने टिकटों के बटवारे में भी आवंटन के समय इसका ध्यान दिया, नगरीय निकाय के चुनावों में मतदाताओं ने अपना जनादेश तो स्पष्ट कर दिया, अब बारी राजनैतिक दलों की है, जिन्हें जनता की भावनाओं का सम्मान करने के साथ ही आरक्षण व हर जाति, वर्ग विशेष का भी ध्यान देना चाहिए। धनपुरी में भारतीय जनता पार्टी के 19 प्रत्याशियों के हारने और 9 प्रत्याशियों के जीतने के बाद भी भाजपा कांग्रेस और निर्दलियों के भरोसे सत्ता पाने को आतुर नजर आ रही है। इस बीच यह जनचर्चा चरम पर है कि जब पिछड़ा वर्ग के लिए नगर के प्रथम व्यक्ति की कुर्सी आरक्षित कर दी गई है, बावजूद इसके सवर्ण उनका हक मारने पर क्यों तुले हुए हैं। नकली ओबीसी और असली ओबीसी को लेकर इन दिनों चर्चाएं हर चौराहे पर हो रही हैं, मतदाताओं ने पार्षदों को अपना मत दे दिया, अब बारी पार्षदों की है, पार्षदों के द्वारा चुने गये अध्यक्ष सीधे न सही पर मतदाताओं के द्वारा चुने हुए ही प्रतिनिधि ही माने जायेंगे। मतदाताओं को अब यह लगने लगा है कि प्रदेश और देश की सबसे बड़ी पार्टी उनके अधिकारों का हनन कर सकती है, यही नहीं इस मामले में जैतपुर विधायक श्रीमती मनीषा सिंह के द्वारा चुने हुए पार्षदों से वन-टू-वन कॉल करके लोकतांत्रित पद्धति से नहीं बल्कि अपनी इच्छा थोपने की कवायत शुरू कर दी गई है। हालाकि कोरम पूरा करने के लिए प्रभारी मंत्री के आगमन के दौरान जीते हुए पार्षदों से वन-टू-वन चर्चा तो की गई, लेकिन किसी नये चेहरे को सामने न तो लाया गया और न ही ऐसी परिस्थितियां निर्मित की गई कि भाजपा के चुने हुए शेष 8 पार्षद अपनी दावेदारी रख सकें।

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