फर्म संचालक पर ठोंकी 11. 89 लाख की रिकवरी
कर चोरी कर ग्रामपंचायत में कर रहे थे मटेरियल सप्लाई
उमरिया। नियमों की धज्जियां उड़ाकर सरकारी धन डकारने और मनमानी कार्य करने की जहां ग्रामपंचायतों में होड़
लगी हुई है वहीं सरकारी अमला भी इन पर नकेल कसने की बजाय इन्ही की पंगत में बैठकर मलाई छान रहा है।
जीएसटी लागू होने के बाद कर चोरी करने वालों ने कर चोरी का नया तरीका खोज निकाला है। इसमें वस्तुओं की
खरीद-बिक्री किए बिना ही कारोबार दिखाया जाता है। कागज पर ही खरीद-बिक्री दिखाई जाती है और इसके जीएसटी
प्रावधान के तहत आईटीसी की चोरी कर जाती है। इसके अलावा वाणिज्य कर विभाग में फर्म पंजीकृत कराकर
सामग्री लाखों में सप्लाई की जाती है, 6 माह तक रिटर्न न भरने के चलते विभाग रजिस्ट्रेशन रद्द कर देता है, उसके
बाद भी वेण्डर द्वारा लाखों के बिल पंचायतों में लगाये जाते हैं और वाणिज्य कर विभाग को चूना लगाया जाता है।
इसी तरह के एक मामले में वाणिज्यकर विभाग ने सख्ती बरतते हुए 11 लाख 89 हजार रुपए की रिकवरी निकाली है।
इन पर गिरी गाज
बिरसिंहपुर पाली जनपद की ग्राम पंचायत तिवनी में मिथलेश गुप्ता की फर्म गुप्ता इंटर प्राइजेज ग्राम तिवनी, पोस्ट
सुंदरदादर द्वारा निर्माण सामग्री सप्लाई दी है, उक्त फर्म का रजिस्ट्रेशन वाणिज्य कर विभाग में 17 अगस्त 2017
को कराया गया। इसके बाद 1 अगस्त 2018 को उक्त फर्म वाणिज्य कर विभाग द्वारा बंद कर दी गई, लेकिन फर्म
संचालक द्वारा लगातार 1 अगस्त 2022 तक सप्लाई दी गई। जब फर्म संचालक की इन कारस्तानियों की भनक
वाणिज्य कर विभाग को लगी तो उसने जरूरी जांच पड़ताल शुरू कर दी और अंतत: फर्म संचालक पर 11 लाख 89
हजार रुपए की रिकवरी निकाली और कड़ी चेतावनी भी दी है। ज्ञातव्य है कि खबरों में इस बात का संकेत दिया गया
था कि अगर जांच पड़ताल हो तो कर चोरी का खुलासा हो सकता है।
अधूरा पड़ा निर्माण कार्य
ग्राम पंचायत में बीते दिनों लाखों रूपये खर्च कर ग्राम पंचायत परिसर में सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण
कराया गया है। इस परिसर में बाहरी दीवारों पर रंगाई-पुताई और लिखाई करा दिया गया। लेकिन आज भी यह
निर्माण अधूरा है, टैंक के नाम पर छोटा गड्ढ़ा खोद गया है। जिले सहित जनपद में बैठे जिम्मेदारों ने कभी इस
निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाये, जबकि निर्माण कार्य में दोयम दर्जे की निर्माण सामग्री का उपयोग हुआ
है। लगभग 1 लाख 47 हजार 563 रूपये खर्च करने के बाद जो राशि शेष है, उससे लीपापोती की तैयारी पंचायत द्वारा
की जा रही है।
अधूरे पड़े शौचालय
दरअसल स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव-गांव में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है, ताकि
सामाजिक आयोजनों पर या जिन घरों में शौचालय नहीं है ऐसे ग्रामीण सामुदायिक शौचालय का उपयोग करें, लेकिन
ग्राम पंचायत तिवनी के कर्ताधर्ता द्वारा सामुदायिक शौचालय के निर्माण में लापरवाही बरती गई है। वहीं लगभग 8
से 9 माह बाद भी सामुदायिक शौचालय का कार्य पूर्ण न होने की जानकारी जनपद सहित जिले में बैठे जिम्मेदारों को
है, लेकिन मॉनिटरिंग न होने के चलते शासन की योजना खटाई में पड़ी हुई है।
पानी की व्यवस्था नहीं
ग्राम पंचायत तिवनी में सामुदायिक स्वच्छता परिसर में पानी की कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। केवल लक्ष्य पूर्ति
एवं बंदरबांट के लिए निर्माण एजेंसी ने लाखों रुपये की लागत से शौचालयों का अधूरा निर्माण करा कर छोड़ दिया है,
निर्माण आज तक अधूरा क्यों है, किसी भी जिम्मेदार ने राशि खर्च होने के बाद शौचालय की सुध तक नहीं ली।
वर्तमान समय में सामुदायिक स्वच्छता परिसर में पानी की व्यवस्था नहीं कर पाई है। साथ पंचायत ने अधूरे पड़े
शौचालय को पूरा कराने में कोई दिलचस्पी न दिखाते हुए, शौचालय में बाहर से रंग-रोगन कराकर ताला जड़ दिया है।
व्यापक जांच की जरूरत
अगर जिला पंचायत द्वारा भी जांच पड़ताल कराई जाए तो पंचायतों की अंधेरगर्दी के कई चौंकाने वाले अध्याय उघड़
सकते हैं। जिनमें जनपद का संरक्षण प्राप्त होने से ग्रामपंचायतों में ऐसी भी राशि खूब निकाली गई है जिनके निर्माण
कार्य हुए ही नहीं। मौके पर कहीं काम दिखाई नही देता राशि का कहीं पता नहीं है। ऐसे गंभीर कदाचारों का खुलासा
अनिवार्य है और आहरित राशियों की भरपाई कराई जानी चाहिए।