एसडीएम ने पद छोड़ अनूपपुर विधानसभा में ठोकी ताल @ सोशल मीडिया में किसी ने किया स्वागत तो किसी ने खींची टांग
(नारद यादव @ 9826550631)
शहडोल। संभाग के अनूपपुर जिले के मुख्यालय की विधानसभा का चुनाव आगामी माह में होने वाला है, पूर्व में यहां से कांग्रेस की टिकट पर बिसाहू लाल सिंह चुनाव जीतकर लगभग डेढ़ से 2 वर्ष पहले आए थे, बाद में बिसाहूलाल सिंह ने कांग्रेस में खटपट होने के कारण त्याग पत्र दे दिया और भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था,भाजपा ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया, इसके साथ ही प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया ।
अनूपपुर सहित प्रदेश के अन्य 27 सीटों पर आगामी माहों में विधानसभा के उपचुनाव होने हैं, अनूपपुर सीट अन्य विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में खास इसलिए भी है, क्योंकि यहां से भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी और पूर्व मंत्री को मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने भी बीते दिनों जिला पंचायत सदस्य विश्वनाथ सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है, हालांकि अभी तक ना तो आचार संहिता लागू हुई है और न हीं उप चुनाव की तारीख के सामने आई है, लेकिन क्योंकि चुनाव होने हैं और अनूपपुर सहित अन्य 27 सीटें ही यह तय करेंगी कि आने वाले लगभग 3 साल के लिए प्रदेश में किसकी सत्ता होगी।
बहरहाल यहां मामला एक ऐसे प्रशासनिक अधिकारी का है जिसने अपने दम पर फर्श से अर्श तक पहुंच बनाई और अनूपपुर जिले के अनूपपुर विधानसभा अंतर्गत एक छोटे से गांव में रहते हुए प्रदेश की प्रशासनिक सेवा क्षेत्र में अपना अलग नाम बनाया, रमेश सिंह जो वर्तमान में शहडोल जिले में एसडीएम के पद पर कार्यरत थे, उन्होंने बीते दिनों इस पद से सेवानिवृत्त लेते हुए राजनीतिक गलियारों में कदम रखा है।
मंगलवार की यह सुबह खबर आने के बाद अनूपपुर जिले की कांग्रेस और भाजपा दोनों ही खेमों में अचानक गर्माहट आ गई, खासकर अनूपपुर के लिए कांग्रेस द्वारा घोषित किए गए विश्वनाथ सिंह और उसके खेमे में अचानक इस खबर ने सनसनी फैला दी, क्योंकि यह बात भी सामने आई कि रमेश सिंह लगातार कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ने की माँग करते रहे और जब टिकट नहीं मिली तो बीते दिनों उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ से भोपाल से मुलाकात की और उसके अगले कुछ घंटों के बाद उन्होंने अपना त्यागपत्र लिखकर अपने विभाग को सौंप दिया ।
आने वाले दिनों में ऊंट किस करवट लेता है यह तो कहा नहीं जा सकता, कांग्रेस इन्हें टिकट बदलकर राजनीति में मौका देती है या फिर वे निर्दलीय राजनीति में अपना कदम रखते हैं या किसी दूसरे दल के साथ आगे आते हैं, यह तो समय ही बताएगा।
मंगलवार के पूरे दिन अनूपपुर सहित पूरे संभाग में यह चर्चा सरगर्म रही कि रमेश सिंह का अगला कदम क्या होगा…?? कांग्रेस का अगला कदम क्या होगा ..?? और इस संदर्भ में भाजपा की रणनीति क्या होगी ..!!
इधर मंगलवार की शाम सोशल मीडिया में रमेश सिंह ने अपनी फेसबुक आईडी से अपना इस्तीफा शेयर किया साथ ही उन्होंने अपने जन्म से लेकर वर्तमान परिस्थितियों का हवाला दिया कि उन्होंने किस कदर इस क्षेत्र में संघर्ष किया है, रमेश सिंह के द्वारा सोशल मीडिया में की गई इस पोस्ट के बाद लगातार उस पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, कुछ लोग उन्हें आड़े हाथों ले रहे हैं, तो कुछ स्वागत कर रहे हैं, वही किसी ने कांग्रेस से चुनाव लड़ने की अपील की ….तो किसी ने प्रशासनिक पद पर रहते ही सेवा करने का सुझाव दिया और कुछ ने तो इसे अतिमहत्वाकांक्षा बताया।
इस तरह रखा
फेसबुक यूजर ने अपना पक्ष






















मंगलवार की शाम खुद sdm ने
फेसबुक पर वायरल किया पत्र







यह लिखा रमेश सिंह ने
फेसबुक पर
मैं रमेश कुमार सिंह , ग्राम खाँडा , जिला अनुप्पूर मध्यप्रदेश का निवासी हूँ , 28 अगस्त 1974 को मेरा जन्म एक साधारण आदिवासी परिवार में हुआ , संघर्ष के कोख से पैदा लेके जीवन के संघर्ष पथ पर मैं अपने प्रयास से निरंतर बढ़ता गया, सन 1994 में मैंने पीईटी की परीक्षा पास करके एसजीआईटीएस इंदौर में दाख़िला लिया और अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की ! 1998 में जब मैं पढ़ाई पूरी करके निकला तो मेरा चयन एक कम्पनी में हुआ , जहां मैं दो सालो तक प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में अपनी सेवाए दी, समय के प्रतिकूल नहीं होने और मेरे पिताजी का अचानक बहुत बीमार हो जाने के कारण मैं इकलौते बेटे का फ़र्ज़ अदा करते हुए मैं अपने पिता की सेवा करने गाँव चला आया , और यहाँ अपने पिताजी का निरंतर सेवा करते रहा , लगभग चोबिस महीनो तक निरंतर पिताजी की सेवा करने के बाद भी हम उन्हें नहीं बच्चा पाए ? , मेरे पिताजी का देहांत सन जनवरी 2003 में हो गया ! परिवार का एकलौता होने के कारण अब पुरी जीमेदारी मेरे कंधो पर आ गया। पिताजी के इलाज में जो भी जमापूँजी था सब खर्च होने के बाद मैं आर्थिक तंगी से जूझने लगा, बहुत लोग बहुत तरह की बातें करने लगे लोगों का सुझाव भी मेरे जीवन यापन हेतु आर्थिक अर्जन के लिए अलग अलग था, कुछ लोगों ने कहा की क्यूँ ना अंडे का ठेले लगा लेते हो, कुछ ने कहा क्यूँ ना स्कूल में पढ़ा लेते हो, घर में बैठ के जीवन नहीं चलेगा, लेकिन एक बात तो तब भी थी मेरे अंदर की सब कुछ खोया था उमीद नहीं खोयी थी हमने , मैं गाँव में रहकर राज्य प्रसाशानिक सेवा की तैयारी करने लगा ,मेरा गाँव संसाधनो से विहीन था, बिजली नहीं थी लालटेन जला के पढ़ाई करता रहा लेकिन कभी अपना हौसला नहीं हारा इसी क्रम में मैं राज्य प्रसाशनिक सेवा में चयनित हुआ , और डिप्टी कलेक्टर बना , इस क्रम में नौकरी करते हुए मैंने 14 साल तक राज्य सेवा में अलग अलग ज़िलों में अपनी सेवाए दीं , आज दिनांक 15/09/2020 को मैंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया ! नौकरी में रहकर भी मैंने लोगों की सेवा किया और आज मेरी ये जनसेवा की भावना अपने क्षेत्र की जनता को समर्पित है , मेरी ज़रूरत जिस युवा , बुजुर्ग, माता एवं बहनो को पड़े हम अब दिन रात आपके साथ कदम से कदम मिलाके चलने को तैयार हैं , मुझे लगता है शायद मैं वहाँ पर होके आपका उस तरह साथ नहीं दें पा रहा था क्यूँकि उस तंत्र में मेरी कुछ मजबूरियाँ रही होगी, लेकिन मैं अब हर सम और विषम परिस्थिति में आपके साथ हूँ ! मुझे अपने क्षेत्र में रोज़गार , स्वास्थ्य , शिक्षा , और कृषि के बेहतरी के लिए बहुत काम करना है! अब आप का साथ ऐसे ही बना रहे !! आपका भाई और ये बेटा सदैव आपके हर सुख दुःख में साथ रहेगा! अब मुझे आपके साथ ही ज़िना है और आपके साथ ही ज़िना है!
जय हिंद !!??????????
