तो मनमर्जी से बना लिए थे 34 से 39 वार्ड : चुनाव पर हाईकोर्ट की रोक..!!

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शहडोल। आगामी 5 सितंबर को शहडोल नगर पालिका सहित जिले की बुढार और जयसिंहनगर नगर परिषद के कार्यकाल के 5 वर्ष पूरे हो जाएंगे, इस कार्यकाल के पूरे होने से पहले ही निर्वाचन आयोग के द्वारा इन निकायों में चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, प्रशासन द्वारा इस संदर्भ में वार्डो के आरक्षण की प्रक्रिया भी बीते सप्ताहों में कर दी गई और उसके बाद तीनों निकायों में वार्डो से प्रत्याशियों के नाम भी सामने आने लगे, राजनीतिक दलों ने अपनी बिसाद भी बिछाना शुरू कर दी, लेकिन बीते दिवस शहडोल नगर पालिका के संदर्भ में आए माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश के बाद संभवत शहडोल निकाय के चुनाव आगामी कुछ माह के लिए डाल सकते हैं, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि पुनः मतदाताओं की गिनती,वार्डों का परिसीमन होने के बाद एक बार फिर वार्डो का आरक्षण हो और फिर चुनाव संपन्न हो।

ऐसी स्थिति में कुछ माह इस प्रक्रिया लगना स्वाभाविक है, आने वाले वर्ष 2023 में विधानसभा के भी चुनाव हैं,यह भी माना जा रहा है कि अब शहडोल नगर पालिका के चुनाव शायद विधानसभा चुनावों के बाद ही संपन्न होंगे..?

गुरुवार को इस मामले में सोशल मीडिया में जब माननीय उच्च न्यायालय का आदेश का पत्र वायरल होने लगा तो तमाम तरह की अटकलें लगने लगी, कि आखिर मामला है क्या, इस संदर्भ में शहडोल के वरिष्ठ अधिवक्ता और अपीलार्थी रहे दिनेश दीक्षित ने बताया कि शहडोल नगर पालिका के वार्डो को लेकर जो परिसीमन की प्रक्रिया की गई, वह न्याय संगत नहीं थी, उन्होंने बताया कि शहडोल नगर पालिका के द्वारा जो वार्ड की संख्या ऊपर कार्यालयों में भेजी गई थी, वह 34 थी, लेकिन जब वार्डों का परिसीमन हुआ तथा जो वार्ड बनकर सामने आए तो उनकी संख्या बढ़कर 39 हो गई।

यह न्याय संगत नहीं था और नियम पूर्वक भी नहीं था, यही नहीं नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत कुछ ऐसे वार्ड भी हैं जिन की आपस में तुलना की जाए तो उनकी जनसंख्या खासकर मतदाताओं की जनसंख्या में 200 से 300% का फर्क है, यह भी न्याय संगत नहीं है, उन्होंने इस संदर्भ में माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका और माननीय न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि माननीय न्यायालय में पेश किए गए तथ्यों का अवलोकन करने के बाद उन पर अपनी सहमति जताई और यह स्पष्ट किया है कि यदि चुनाव की प्रक्रिया अर्थात अधिसूचना या तारीख घोषित नहीं की गई है तो यह आदेश लागू होगा।

उन्होंने बताया कि माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में इन विसंगतियों को दूर करने के उपरांत चुनाव संपन्न कराने की आदेश जारी किए हैं।

इधर यदि यह बात भी सामने आई कि अभी तक निर्वाचन आयोग के द्वारा और न हीं स्थानीय निर्वाचन शाखा से इस संदर्भ में कोई घोषणा की है। हालांकि यह बात भी सामने आई कि चुनाव को लेकर तैयारियां तो शुरू हो गई हैं क्योंकि अभी तिथि निर्धारित नहीं हुई है और अधिसूचना जारी नहीं हुई है अतः ऐसी स्थिति में माननीय न्यायालय का आदेश माना जाएगा..!!

श्री दीक्षित ने यह भी बताया कि वार्डो की संख्या को लेकर किया गया परिसीमन खुद संदेह के घेरे में है, पुनः परिसीमन और वार्डों में मतदाताओं की संख्या पर विचार करने के बाद ही तथा नगरी निकाय क्षेत्र के जनसंख्या को समस्त वार्डों में विभक्त करने के उपरांत सिर्फ 15% जनसंख्या का ही फर्क वार्डो की जनसंख्या में हो सकता है।

माननीय न्यायालय ने भी अपने आदेश में इस बात को स्पष्ट किया है इससे अधिक जनसंख्या का अनुपात होने पर यह न्याय संगत नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि माननीय उच्च न्यायालय से प्राप्त आदेश के बाद इसे निर्वाचन आयोग की स्थानीय शाखा व अधिकारियों को ईमेल तथा डाक के माध्यम से प्रेषित कर दिया गया है।

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