तहसीलदार पर अभद्रता का आरोप, अधिवक्ताओं ने किया विरोध का ऐलान

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शहडोल।सोहागपुर तहसील में उस समय विवाद गहरा गया जब राजस्व अभिभाषक संघ के सदस्य अधिवक्ता रविन्द्र जायसवाल के साथ तहसीलदार सोहागपुर सुमित कुमार गुर्जर द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार किए जाने और मारपीट की धमकी देने का मामला सामने आया। इस घटना को लेकर अधिवक्ता समुदाय में गहरा आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।
राजस्व अभिभाषक संघ सोहागपुर द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार, तहसीलदार गुर्जर ने गुरुवार को अधिवक्ता रविन्द्र जायसवाल से न केवल अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया बल्कि कार्यालय के समस्त स्टाफ को बुलाकर “बेड़ कर मारो” जैसी आपत्तिजनक बात कही। इतना ही नहीं, मौके पर उपस्थित अधिवक्ता आशीष द्विवेदी को भी हट जाने की धमकी देते हुए कहा गया कि यदि वह नहीं हटे तो उन्हें भी “बेड़ कर मरवाया जाएगा”। इस तरह की कथित धमकी और व्यवहार ने वकीलों को स्तब्ध कर दिया।
संघ ने कलेक्टर  को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की है कि तहसीलदार सुमित गुर्जर को तत्काल सोहागपुर तहसील से हटाया जाए। अधिवक्ताओं ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांग पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो 8 सितंबर से सभी अधिवक्ता राजस्व न्यायालयों का बहिष्कार करेंगे। साथ ही  शांति पूर्ण अनशन करने को भी बाध्य होंगे।
अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालयीन कार्यवाही में लगातार राजस्व अधिकारियों के असहयोग और अनुचित रवैये से अधिवक्ताओं को प्रताड़ित होना पड़ रहा है। ऐसे में यदि अधिकारीगण इस प्रकार का व्यवहार करेंगे तो न्याय दिलाने का पूरा तंत्र ही बाधित होगा। अधिवक्ता संघ का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा किया गया यह कृत्य न केवल अधिवक्ताओं के सम्मान पर आघात है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संघ ने इस ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, संभागायुक्त और पुलिस अधीक्षक को भी भेजी है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन समय रहते उचित कदम नहीं उठाते तो आगामी दिनों में आंदोलन उग्र हो सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले ने तहसील और जिले की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। आमजन के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि अधिवक्ताओं के साथ यदि इस तरह का व्यवहार होगा तो वे अपने मुवक्किलों को न्याय कैसे दिला पाएंगे। उधर, इस घटना को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी दबाव बढ़ता जा रहा है कि मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट कर जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए।
अधिवक्ता संघ ने एक स्वर में कहा है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि अधिवक्ता समाज की गरिमा की है। तहसीलदार के कथित कृत्य से आहत होकर वे आंदोलन के रास्ते पर जाने को बाध्य हुए हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शासन स्तर पर इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।

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