ढीमरखेड़ा ,बड़वारा,विजयराघववगढ़ , कटनी, बाकल का बड़ा व्यापारी धान उपार्जन केंद्र में खपा रहा यूपी से लाई गई धान,उपार्जन केंद्रों में किसानरूपी व्यापारियों का जमघट किसानों ने बेचा 100-150 प्रतिकुण्टल के हिसाब से अपना रजिस्ट्रेशन

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ढीमरखेड़ा ,बड़वारा,विजयराघववगढ़ , कटनी, बाकल का बड़ा व्यापारी धान उपार्जन केंद्र में खपा रहा यूपी से लाई गई धान,उपार्जन केंद्रों में किसानरूपी व्यापारियों का जमघट
किसानों ने बेचा 100-150 प्रतिकुण्टल के हिसाब से अपना रजिस्ट्रेशन

बाकल।। बहोरीबन्द तहसील के  बाकल क्षेत्र में इन दिनों धान माफिया चांदी काट रहे है. धान का सीज़न आते ही इन धान माफियाओं की मानों दिवाली से आ जाती है.व्यापारी अधिक लाभ कमाने के लिए अन्य प्रदेशों से ट्रेडर्स के नाम पर धान बुलाकर धान उपार्जन केंद्रों में धड़ल्ले से खपा रहे है।आपको बताते चले कि  बाकल के व्यापारियों द्वारा उत्तरप्रदेश एवं हरियाणा से ट्रको के माध्यम से धान की खेपें सस्ते दामों में बुलवाकर बहोरीबन्द, बाकल के छोटे छोटे व्यापारियों एवं किसानों को अपना मुनाफ़ा जोड़कर बेच देते है और यह काम पिछले कई वर्षों से अनवरत जारी है जिससे धान माफियाओं और छोटे व्यापारियों सहित अधिक लाभ कमाने की चाह रखने वाले किसानों की भी बल्ले बल्ले हो जाती है।गौर करने वाली बात यह है कि इन व्यापारियों की पहुँच लंबी होने के कारण अधिकारी भी इनसे पूछताछ करने से कतराते है ऐसा प्रतीत होता है जैसे इन व्यापारियों के सामने जिम्मेदार अधिकारी भी बोने साबित हो रहे है तभी तो अन्य प्रदेशो से धान लाकर उपार्जन केंद्रों में भेजने का साहस इन माफियाओं में पनप रहा है।

गोदाम से लोड हुई ट्रॉली पहुँची उपार्जन केंद्र

बीते रोज ही बाकल स्थित समर्थ सेवा केंद्र नामक गोदाम से धान की ट्रॉली दिनदहाड़े लोड की जाती है और उसे सीधे मसन्धा धान उपार्जन केंद्र ले जाया जाता है इसी बीच किसान की नजऱ इन ट्रालियों में पड़ती है जिसका वीडियो किसान द्वारा बना लिया जाता है जिससे पूरी धांधली की कलई खुल जाती है और वाहन चालक से पूछने के दौरान पता चलता है कि उक्त धान समर्थ सेवा केंद्र (अन्ना सेठ) नामक गोदाम से धान को लोड करके सीधे धान खरीदी केंद्र लाया गया है।इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है उक्त धान किसान की थी या व्यापारी की. ज्ञात हो कि बाकल के  व्यापारियों द्वारा निर्भीक होकर अन्य प्रदेशों से लाई गई धान को गोदाम में स्टॉक कर लिया जाता है जिसे धान खरीदी केंद्र के शुरू होते ही किसानरूपी व्यापारियों को अपना मुनाफ़ा जोड़ते हुए बेच दिया जाता है।

केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत का खेल

गौरतलब है कि बदनाम हो चुके धान उपार्जन केंद्रों में भारी धांधली का खेल बदस्तूर जारी है. क्षेत्र के धान खरीदी केंद्रों में केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत से अन्य प्रदेशों से लाई गई धान को खपाया जाता है साथ ही ऐसा करने से केंद्र प्रभारियों को भी तनिक लाभ हो ही जाता है तभी तो प्रभारी कालापीला करने की खुली अनुमति दे रखें है।तहसील क्षेत्र के सभी उपार्जन केंद्रों में यदि नियमित जांच की जाए तो रोजाना सैकड़ो कुंटल अमानक धान की खेपों ज़खीरा पकड़ा जा सकता है जिसे कुछ रुपियों की लालच में प्रभारियों द्वारा खरीद लिया जाता है।

100-150 में बेच दिया रजिस्ट्रेशन

धान खरीदी मामले में एक बात और सामने आई है जहां किसानों ने अपने पैर में खुद कुल्हाड़ी मारने का काम किया है एक ओर किसान कहता है कि पानी ना बरसने से सूखा की स्थिति निर्मित हुई और धान की फसल ठीक नही हुई वही दूसरी ओर किसानों ने अपने रजिस्ट्रेशन 100-150 रुपये प्रतिकुण्टल के हिसाब से व्यापारियों को देकर उसी रजिस्ट्रेशन में धान की पर्याप्त मात्रा में बिक्री कर रहे है ऐसे में किसानों को ही नुकसान हो रहा है.किसान के रजिस्ट्रेशन से जब पर्याप्त मात्रा में बिक्री की जायगी तो इससे साबित हो जाता है कि किसानों ने फसल की अच्छी पैदावार की है और इसका सीधा नुकसान किसानों को ही हो रहा है जिसके चलते सूखे का लाभ भी किसानों को नहीं मिल पा रहा है क्योकि जमीनी हकीकत कुछ और रिकार्ड में कुछ ओर ही स्थिति वया हो रही है कुलमिलाकर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से किसानो को ही नुकसान पहुंच रहा है जिससे किसान समझ नहीं रहे है।

व्यापारियों ने करा रखा है रजिस्ट्रेशन

मालूमात हो कि व्यापारी रूपी किसानों द्वारा छोटे-छोटे किसानों का रजिस्ट्रेशन और सिकमीनामा कराकर खरीदी गई अवैध धान को उक्त रजिस्ट्रेशनो में तुलवाया जाता है. जबकि किसान को यह ज्ञात ही नही होता कि उसके रजिस्ट्रेशन में तौली जा रही धान उत्तरप्रदेश की है या हरियाणा की.ना ही ये छोटे किसान उपार्जन केंद्रों में नजऱ आते है . नजऱ आता है तो शिर्फ़ किसानरूपी व्यापारियों का झुंड.ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है वे किसानों औऱ व्यापारियों को बखुबी पहचानते है लेकिन अधिकारी भी कई तरह के बंधनों से बंधे हुए है जिससे वे अपनी आंखो में काली पट्टी बांध नाजायज़ को भी जायज समझ अवैध धान को खपाने हरी झंडी दे रहे हैं।

इनका कहना है-

मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए छापेमार कार्यवाही की जायगी. यदि व्यापारियों द्वारा गोदामों से धान लोड करके सीधे उपार्जन केंद्र ले जाया जा रहा है तो ऐसी धान को जप्त किया जायेगा और यदि इस पूरे मामले में केंद्र प्रभारियों की संलिप्तता पाई जाती है तो नियमानुसार दंडात्मक कार्यवाही की जायगी।

प्रमोद मिश्रा,खाद्य अधिकारी

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