बस संचालको की मनमानी के आगे नतमस्तक जिम्मेदार

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संतोष कुमार केवट

फिर शुरू हुआ भूसे की तरह भर कर यात्रियों का सफर चार गुना शुल्क के साथ यात्रियों के साथ भेद-भाव हादसो के बाद भी बस संचालक सुधरने का नाम नही ले रहे है, वही परिवहन और यातायात विभाग लापरवाह हो चुका है, एक तरफ सीधी बस हादसा के बाद प्रदेश के अधिकारी स्वयं सडक पर निकल कर जांच अभियान चला रहे है, तो यहां जिम्मेंदारो को यात्रियों की जिन्दगी से कोई सरोकार ही नही है।

अनूपपुर । मुख्यालय की बस स्टैड में पहुचने वाली दर्जनो बसें भूसे की तरह यात्रियों को भर कर सफर कर रहे है, बसो में न तो लोगो को कोई सुविधाए मिल पा रही है और न ही सुरक्षित यात्रा के लिए कोशिश की जा रही है, डीजल की कीमतो के नाम पर यात्रियों से चार गुना किराया वसूला जा रहा है, जिले में बैठे जिम्मेंदार अधिकारी चार दिन दिखावें की कार्यवाही करने के बाद अपने कर्तव्यो से इतिश्री कर लिए, लेकिन हकीकत में आज भी बस में सफर करने वाले यात्रियों को बस संचालको के द्वारा लूटा जा रहा है और खतरनाक सफर के साथ जिन्दगी से खिलवाड किया जा रहा है।

हादसे का इंतजार फिर से कर, रहे, हैं, क्या

जिला परिवहन विभाग व यातायात विभाग के सामने से ओवरलोड वाहन धडल्ले से पूरे मुख्यालय में चल रही है, लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है और कोई एकाध कार्यवाही होती है, तो वह भी सिर्फ नामात्र होती है। यातायात विभाग के कर्मी जिले के कोने-कोने में मौजूद तो रहते हैं लेकिन वो ओवरलोड बसों को देखते तक नहीं है, उन्हें तो अपने फोन से ही फुर्सत नहीं है। मुख्यालय के लोग चितिंत है कि अगर ओवरलोड बसों पर कार्यवाही नहीं की तो फिर कोई दुर्घटना न हो जाये।

यात्रियों से वसूल रहे मनमाने दाम

मुख्यालय से कोतमा, वेकंटनगर, बिजुरी, राजनगर, अमरकंटक के साथ शहडोल व छ.ग. राज्य में आवागमन करने वाली बसें प्रतिदिन यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे है, वही जिला मुख्यालय सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में प्रतिदिन ऐसी यात्री बस सड़क पर दौड़ते हुए देखने को मिल रही है जो कि जर्जर हालत में पहुंच चुकी है तथा जिनके मरम्मत की आवश्कता बनी हुई है। ज्यादातर यात्री बसों में वाहन नंबर के साथ ही बैक लाइट तथा इंडीकेटर लाइट खराब पड़े हुए हैं। साइड मिरर न होने से पीछे से आने वाले वाहनों तथा वाहन पीछे करने में भी दुर्घटना का डर बना रहता है।

गरीब यात्रियों के साथ छलावा

अपने निजी कार्य व सुदूर मजदूरी करने वाले श्रमिकों और विद्यार्थी इसके शिकार हो रहे है, महज 15 से 20 किलोमीटर के सफर में 40 से 50 रूपए वसूला जा रहा है, वही अगर किसी ने इस विषय पर चर्चा की तो उन्हे बस से बीच रास्तें में उतार दिया जाता है और दोबार उन्हे अपनी बस में बैठाया ही नही जाता, कुल मिला कर बस संचालक के मनमाने रवैये से गरीब यात्रियो के साथ छलावा किया जा रहा है।

इनका कहना है
आपने जानकारी दी है मैं तत्काल जानकारी लेकर कार्यवाही करवाता हुँ।
वीरेंद्र कुम्हरे
यातायात प्रभारी ,अनुपपुर

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