नगर का जय स्तंभ उपेक्षा का शिकार, गंदगी और अतिक्रमण से खो रहा गौरव
(सतीश तिवारी)ब्यौहारी। नगर के मध्य स्थित रीवा–शहडोल मुख्य मार्ग किनारे बना प्राचीन जय स्तंभ, जो कभी शहीदों की याद और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता था, आज प्रशासनिक लापरवाही और जनउदासीनता के कारण उपेक्षा का शिकार बन गया है। इस ऐतिहासिक स्थल के आसपास गंदगी और अतिक्रमण का अंबार लगा हुआ है, जिससे इसका स्वरूप बिगड़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जय स्तंभ के रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं की जाती, और न ही यहां नियमित सफाई होती है। स्थिति यह है कि पास में सार्वजनिक शौचालय न होने के कारण लोग स्मारक स्थल को ही पेशाबघर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
आश्चर्यजनक बात यह है कि इस स्मारक के आसपास ही फॉरेस्ट थाना, शासकीय विद्यालय, दो प्रमुख बैंक, और थोड़ी ही दूरी पर न्यायाधीश, एसडीओपी, पटवारी व आरआई के कार्यालय स्थित हैं,इसके बावजूद प्रशासन की निगाह इस उपेक्षित स्थल की ओर नहीं जाती।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि पहले स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के अवसर पर जय स्तंभ की सफाई, रंगरोगन और सजावट की जाती थी, परंतु पिछले कुछ वर्षों से यह परंपरा भी समाप्त हो गई है। अब यह राष्ट्रीय धरोहर गंदगी और असंवेदनशीलता के बीच दम तोड़ती दिखाई दे रही है।
नगर के बुद्धिजीवी वर्ग और समाजसेवी संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि जय स्तंभ की तत्काल सफाई, संरक्षण और सौंदर्यीकरण की कार्रवाई की जाए, ताकि यह स्मारक अपने गौरवपूर्ण इतिहास के साथ पुनः लोगों की श्रद्धा का केंद्र बन सके।