कार्यालय की कुर्सी नहीं, बल्कि शहर की ज़रूरतें प्राथमिकता….मैदान में उतरकर फैसले लेने वाली आईएएस….सोच स्पष्ट,समस्या छोटी हो या बड़ी, टालने की नहीं, सुलझाने की है। जब निरीक्षण, संवेदनशीलता और सख़्ती एक साथ दिखे

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कार्यालय की कुर्सी नहीं, बल्कि शहर की ज़रूरतें प्राथमिकता….मैदान में उतरकर फैसले लेने वाली आईएएस….सोच स्पष्ट,समस्या छोटी हो या बड़ी, टालने की नहीं, सुलझाने की है।
जब निरीक्षण, संवेदनशीलता और सख़्ती एक साथ दिखे
कटनी।। नगर निगम की कार्यप्रणाली जब काग़ज़ों से निकलकर ज़मीन पर उतरती है, तब प्रशासन की असली तस्वीर सामने आती है। मंगलवार को यही दृश्य देखने को मिला, जब निगमायुक्त तपस्या परिहार ने बस स्टैंड, शिवाजी कॉलोनी और मुक्तिधाम परिसर का औचक निरीक्षण कर यह स्पष्ट कर दिया कि उनके लिए कार्यालय की कुर्सी नहीं, बल्कि शहर की ज़रूरतें प्राथमिकता हैं। यह निरीक्षण मात्र औपचारिकता नहीं था, बल्कि हर स्थल पर समस्याओं को देखना, समझना और वहीं समाधान के निर्देश देना—यह उनकी प्रशासनिक कार्यशैली का प्रमाण बना।
बस स्टैंड जोन कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान निगमायुक्त ने नागरिकों की शिकायतों को केवल सुना नहीं, बल्कि उन्हें प्राथमिकता सूची में रखकर समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए। अतिक्रमण, पेयजल, सफाई, सड़क-नाली निर्माण और अवैध निर्माण जैसे मामलों पर उनकी स्पष्ट सोच दिखी समस्या छोटी हो या बड़ी, टालने की नहीं, सुलझाने की है।
बस स्टैंड: अव्यवस्था पर सख़्ती
बस स्टैंड परिसर के पैदल निरीक्षण में निगमायुक्त ने यात्री प्रतीक्षालय, शौचालय, दुकानों के आवंटन और सफाई व्यवस्था को बारीकी से देखा। अनाधिकृत कबाड़, अव्यवस्थित ठेले और गड्ढों को देखकर उन्होंने नाराजगी जताई और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। आगामी ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए पेयजल व विद्युत व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश यह दर्शाते हैं कि प्रशासनिक दृष्टि सिर्फ आज तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले समय को ध्यान में रखकर काम करती है।
शिवाजी कॉलोनी: विकास को गति
इंदिरा गांधी वार्ड की शिवाजी कॉलोनी में निरीक्षण के दौरान नियमितीकरण और विकास शुल्क से जुड़े मुद्दों पर निगमायुक्त ने समाधानपरक रुख अपनाया। पुनः विकास शुल्क शिविर आयोजित कर नियमानुसार विकास कार्य कराने के निर्देश, प्रशासन और नागरिकों के बीच भरोसे का सेतु बनते दिखे।
मुक्तिधाम: संवेदनशीलता और दूरदर्शिता
मुक्तिधाम परिसर में क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल, सफाई और अव्यवस्थित नाली व्यवस्था पर निगमायुक्त की सख़्ती स्पष्ट दिखी। सबसे महत्वपूर्ण पहल रही गैस आधारित शवदाह गृह को पुनः चालू कराने की दिशा में ठोस कदम। उन्होंने न सिर्फ समस्याएं जानीं, बल्कि कर्मचारियों के प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी एकत्र करने के निर्देश दिए। उनका स्पष्ट कहना था,यह केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि प्रदूषण मुक्त शहर की दिशा में ज़रूरी कदम है।
प्रशासन जो दिखता भी है, सुनता भी है
निरीक्षण के दौरान निर्धन बच्चों के लिए संचालित निशुल्क विद्यालय की व्यवस्थाओं की सराहना यह बताती है कि यह कार्यशैली केवल सख़्ती तक सीमित नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। तपस्या परिहार की कार्यशैली यह बताती है कि एक आईएएस अधिकारी जब खुद मैदान में उतरता है, तो सिस्टम अपने आप हरकत में आता है। निरीक्षण, जनसुनवाई, त्वरित निर्देश और संवेदनशील निर्णय इन सबका समन्वय ही वह अलग तरीका है, जो प्रशासन को प्रभावी बनाता है और जनता का विश्वास मजबूत करता है।

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