.गौरेला में ‘गिट्टी’ पर गहराया विवाद: इंटक जिलाध्यक्ष और स्थानीय निवासी के बीच ठनी, थाने में आमने-सामने, दोनों ने दी लिखित शिकायत

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(मोहम्मद शाकिब खान मुख्य संवाददाता)

 

दिनांक 17/03/2026:

 

एक तरफ गाली-गलौज और मारपीट के प्रयास का आरोप, तो दूसरी तरफ रसूख दिखाकर मुफ्त निर्माण सामग्री मांगने और झूठे केस में फंसाने का दावा। जानिए क्या है ईदगाह चबूतरा निर्माण से जुड़ा यह पूरा विवाद।

 

‘हाल-ए-हलचल’ सदैव निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के लिए बाध्य है। हमारा काम किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष में माहौल बनाना नहीं, बल्कि तथ्यों की तस्दीक कर दोनों पक्षों की बात और पूरी सच्चाई आप तक पहुंचाना है। हम दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही खबर का प्रसारण करते हैं।

 

गौरेला (जी.पी.एम.): जिले के गौरेला थाना क्षेत्र अंतर्गत संजय चौक स्थित ईदगाह परिसर के पास चल रहे निर्माण कार्य को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला अब पुलिस थाने की चौखट तक पहुँच गया है, जहाँ ‘भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस’ (इंटक) के जिलाध्यक्ष और एक स्थानीय निवासी ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई हैं। एक पक्ष जहाँ अभद्रता और मारपीट के प्रयास का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे मुफ्त में रेत-गिट्टी ऐंठने के लिए रची गई साजिश और पद का दुरुपयोग बता रहा है।

 

‘हाल-ए-हलचल’ के पास दोनों पक्षों द्वारा गौरेला थाना प्रभारी को दिए गए शिकायती पत्रों की प्रतियां मौजूद हैं। आइए आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि दोनों पक्षों का क्या कहना है:

 

पक्ष 1: इंटक जिलाध्यक्ष इदरीस अंसारी के आरोप (16 मार्च की शिकायत)

 

भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के जिला-गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के जिलाध्यक्ष मो. इदरीश अंसारी ने अपने आधिकारिक लेटरहेड पर 16 मार्च 2026 को गौरेला थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

 

घटना का दावा: उनकी शिकायत के अनुसार, 14 मार्च 2026 (शनिवार) की शाम करीब 5:30 बजे संजय चौक के आगे ईदगाह साइट पर काम कर रहे उनके मजदूरों को अयूब इराकी (पिता जहांगीर) ने गिट्टी उठाने से मना किया और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

 

धमकी और मारपीट का आरोप: इदरीस का आरोप है कि जब वे मजदूरों से मिली जानकारी के बाद अयूब और हारून इराकी से बात करने गए, तो दोनों ने उनके साथ गाली-गलौज की और धमकी देते हुए कहा, “सारी नेतागिरी घुसेड़ देंगे और तेरे जैसे नेता हमारे आगे-पीछे हैं।” इदरीस के मुताबिक, अयूब ने उन्हें मारने के लिए आगे भी बढ़ा, लेकिन अयूब के पिता जहांगीर ने बीच-बचाव कर उन्हें बचाया।

 

चेतावनी: इंटक जिलाध्यक्ष ने अपनी शिकायत में संगठन में भारी आक्रोश का हवाला देते हुए अयूब इराकी की गिरफ्तारी की मांग की है। सबसे चौंकाने वाली बात उनके पत्र के अंत में लिखी गई ‘टीप’ है, जिसमें उन्होंने पुलिस को चेतावनी देते हुए लिखा है— “कार्रवाई नहीं होने पर अगर किसी प्रकार की कोई घटना अयूब इराकी, हारून इराकी के ऊपर होती है तो उसकी जिम्मेदार आपकी (पुलिस की) होगी।” इसकी प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक (SP) को भी भेजी गई है।

 

पक्ष 2: हारून रशीद का पलटवार (17 मार्च की क्रॉस-शिकायत)

इस शिकायत के ठीक अगले दिन, 17 मार्च 2026 को सारबहरा, पेण्ड्रारोड निवासी हारून रशीद ने थाने में अपना आवेदन प्रस्तुत किया और इदरीस अंसारी की शिकायत को पूर्णतः असत्य, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण करार दिया।

 

गिट्टी-रेत की अवैध मांग का आरोप: हारून रशीद ने स्पष्ट किया है कि ईदगाह परिसर में नगर पालिका के माध्यम से इदरीस अंसारी चबूतरा बनवा रहे हैं। वहीं पास में हारून का भी निजी निर्माण कार्य चल रहा है, जहाँ उनकी अपनी गिट्टी और सामग्री रखी है। हारून का दावा है कि उन्होंने स्वेच्छा से ईदगाह के लिए बिजली-पानी दिया था, लेकिन इदरीस अंसारी ने इंटक नेता होने का धौंस दिखाकर उनसे मुफ्त में रेत और गिट्टी की अवैध मांग शुरू कर दी।

 

झूठी शिकायत का षड्यंत्र: हारून का आरोप है कि जब उन्होंने शासकीय कार्य के लिए अपनी निजी सामग्री देने से इनकार कर दिया, तो इदरीस भड़क गए और अपनी कथित हैसियत का दुरुपयोग करते हुए मजदूरों (लेबर टीम) के माध्यम से काम रोकने की धमकी दी। हारून के अनुसार, 16 मार्च को इदरीस द्वारा की गई शिकायत केवल उन पर मानसिक दबाव बनाने और अवैध उलाही करने के उद्देश्य से की गई एक झूठी साजिश है। उन्होंने अपने ऊपर लगे गाली-गलौज के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

 

निष्पक्ष जांच की मांग: हारून ने पुलिस से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच हो, झूठी शिकायत करने वाले पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, और भविष्य में उनके साथ कोई अप्रिय घटना होने पर इदरीस अंसारी को जिम्मेदार माना जाए।

 

अब पुलिस के पाले में गेंद

‘हाल-ए-हलचल’ की पड़ताल में यह स्पष्ट है कि विवाद की मुख्य जड़ निर्माण स्थल पर रखी ‘गिट्टी’ और उस पर वर्चस्व की लड़ाई है। एक तरफ सत्ताधारी दल से जुड़े एक मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष का रसूख है, तो दूसरी तरफ एक आम नागरिक का अपने निजी सामान को लेकर बचाव और ब्लैकमेलिंग का आरोप। इंटक नेता के पत्र में जिस तरह से पुलिस को ही जिम्मेदार ठहराने की धमकी भरी भाषा (टीप में) का इस्तेमाल किया गया है, वह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

चूंकि अब दोनों पक्षों के आवेदन गौरेला थाने में पहुंच चुके हैं, इसलिए अब यह पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी दबाव में आए बिना, घटनास्थल पर मौजूद मजदूरों और आसपास के लोगों के बयान दर्ज कर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे।

 

‘हाल-ए-हलचल’ इस मामले की हर बारीकी पर नज़र बनाए रखेगा और पुलिस जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, वह पूरी बेबाकी के साथ जनता के सामने रखेगा।

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