ग्रोवर परिवार की शिव साधना, संजय पाठक के संरक्षण में नीलकंठेश्वर धाम बना आस्था का महासागर 36वीं वर्षगांठ पर लाखों श्रद्धालु, भक्ति-सेवा-समर्पण का विराट संगम उत्सव जब भक्ति आयोजन नहीं, अनुभूति बन जाए…
ग्रोवर परिवार की शिव साधना, संजय पाठक के संरक्षण में नीलकंठेश्वर धाम बना आस्था का महासागर
36वीं वर्षगांठ पर लाखों श्रद्धालु, भक्ति-सेवा-समर्पण का विराट संगम उत्सव जब भक्ति आयोजन नहीं, अनुभूति बन जाए…
यह केवल एक आयोजन नहीं था। यह केवल महाशिवरात्रि का पर्व नहीं था। यह वह क्षण था, जब मनुष्य और महादेव के बीच की दूरी समाप्त हो गई।
विजयराघवगढ़ की पावन धरती पर स्थित नीलकंठेश्वर भक्ति धाम इन दो दिनों में मंदिर नहीं रहा वह श्रद्धा का महासागर,सेवा की तपस्थली और संस्कारों की जीवंत पाठशाला बन गया। जब लाखों चरण एक दिशा में बढ़े,
जब हर मुख से हर-हर महादेव निकला और जब हर हाथ में प्रसाद के साथ आशीर्वाद था। तब यह स्पष्ट हो गया कि आस्था आज भी जीवित है, शुद्ध है, और सशक्त है।
मदनलाल ग्रोवर और बाबू ग्रोवर के लिए यह आयोजन कोई कार्यक्रम नहीं यह जीवन की साधना है। ऐसी साधना, जिसमें अहंकार नहीं, प्रदर्शन नहीं, केवल समर्पण है। दिन-रात चलने वाला भंडारा,थकान से परे खड़े सेवक और हर श्रद्धालु के चेहरे पर संतोष
यह सब बताता है कि सेवा जब निस्वार्थ होती है, तो वह पूजा बन जाती है। संरक्षण जब संबल बन जाए
इस विराट भक्ति प्रवाह को दिशा और गरिमा तब मिलती है,जब इसके सूत्रधार और संरक्षक संजय सत्येंद्र पाठक जैसे जनप्रतिनिधि साथ खड़े होते हैं। उनकी उपस्थिति मंच तक सीमित नहीं रहती वह आयोजन को विश्वास,
आयोजकों को साहस और श्रद्धालुओं को अपनापन देती है। यह वही क्षण होता है, जब राजनीति लोकसेवा में बदल जाती है और नेतृत्व आस्था का प्रहरी बन जाता है। भजन, जो आत्मा तक उतर गए जब हेमंत ब्रजवासी की वाणी गूंजी,तो वह केवल संगीत नहीं था वह प्रार्थना थी,वह संवाद था, वह हर टूटे मन के लिए संबल था।
लोग झूमे, लोग रोए, लोग नतमस्तक हुए क्योंकि भजन उस दिन कानों में नहीं, सीधे हृदय में उतरे।
कटनी।। विजयराघवगढ़ विधानसभा के सलैया पड़खुरी के नीलकंठेश्वर धाम में देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित महाशिवरात्रि महोत्सव एवं धाम की 36वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने नगर को एक दिव्य धार्मिक नगरी में परिवर्तित कर दिया। दूर-दराज़ के जिलों, नगरों और ग्रामीण अंचलों से आए श्रद्धालुओं के जनसैलाब ने यह दृश्य उपस्थित कर दिया मानो कैलाश पर्वत की छाया स्वयं इस धरा पर उतर आई हो।
इस विराट आयोजन की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब कार्यक्रम के संरक्षक संजय सत्येंद्र पाठक एवं गणेश सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों जनप्रतिनिधियों ने न केवल कार्यक्रम में सहभागिता की, बल्कि आयोजकों की भक्ति, सेवा और तपस्या की मुक्तकंठ से सराहना कर श्रद्धालुओं का मन जीत लिया।

महोत्सव के प्रथम दिवस शिवलिंग निर्माण, रुद्राभिषेक एवं भव्य शिव बारात ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हर-हर महादेव के जयघोष, घनघोर घंटानाद और शंखध्वनि से संपूर्ण वातावरण शिवमय हो उठा। इस पावन अवसर पर श्रीकांत चतुर्वेदी {{मैहर विधायक}}, वीरेंद्र बहादुर सिंह {{बड़वारा विधायक}}, मनीष पाठक {{नगर निगम अध्यक्ष}}, युवा समाजसेवी यश पाठक सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक शिवभक्ति में लीन होकर शिव बारात में सम्मिलित हुए। शिव बारात की झांकियाँ अद्भुत, अलौकिक और भावनाओं से परिपूर्ण थीं भस्म रमाए भोलेनाथ, माता पार्वती, गणों की टोली और नृत्य करते भक्त..ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो त्रेता और द्वापर युग की झलक वर्तमान में साकार हो उठी हो।
द्वितीय दिवस का शुभारंभ गुरु श्रीचरणों से हुआ। खजुरी ताल वाले गुरुदेव श्री रामाआनंदाचार्य जी महाराज के भव्य स्वागत के साथ कार्यक्रम ने आध्यात्मिक ऊँचाई प्राप्त की। गुरु वाणी से आशीर्वाद पाकर श्रद्धनीलकंठेश्वर भक्ति धाम का कण-कण शिवमय है। यहाँ की भक्ति अलौकिक है और भोलेनाथ की कृपा सदैव इस धाम पर बनी रहेगी। दोपहर में पूर्णाहुति ग्रोवर परिवार द्वारा संपन्न कराई गई। इसके पश्चात श्रद्धालु संगीत संध्या स्थल पर पहुँचे, जहाँ सुप्रसिद्ध भजन गायक हेमंत ब्रजवासी ने अपनी सरस्वती-स्पर्शी वाणी से भोलेनाथ के भजनों की ऐसी रसधारा बहाई कि श्रोता देर रात तक मंत्रमुग्ध रहे। भक्ति, भाव और सुरों के संगम ने वातावरण को इतना दिव्य बना दिया कि हर हृदय नृत्य करने लगा, हर आत्मा शिव में लीन हो गई।
इस अवसर पर विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने मंच से कह मदनलाल ग्रोवर और बाबू ग्रोवर की भक्ति को शब्दों में बाँधना संभव नहीं। यह आयोजन कोई सामान्य कार्य नहीं, यह तपस्या है, साधना है। नीलकंठेश्वर धाम परिवार सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने हेमंत ब्रजवासी के भजनों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी मधुर और भावपूर्ण वाणी विरले ही सुनने को मिलती है। वहीं सांसद गणेश सिंह ने कहा मैं हर बार यहाँ भोलेनाथ के दर्शन और बाबू ग्रोवर के स्नेह से फलीभूत होकर लौटता हूँ। यह आयोजन केवल ग्रोवर परिवार का नहीं, हम सबका है। इससे हमें सेवा, समर्पण और परोपकार कीग्रोवर परिवार की शिव साधना, संजय पाठक के संरक्षण में नीलकंठेश्वर धाम बना आस्था का महासागर
36वीं वर्षगांठ पर लाखों श्रद्धालु, भक्ति-सेवा-समर्पण का विराट संगम उत्सव जब भक्ति आयोजन नहीं, अनुभूति बन जाए…
यह केवल एक आयोजन नहीं था। यह केवल महाशिवरात्रि का पर्व नहीं था। यह वह क्षण था, जब मनुष्य और महादेव के बीच की दूरी समाप्त हो गई।
विजयराघवगढ़ की पावन धरती पर स्थित नीलकंठेश्वर भक्ति धाम इन दो दिनों में मंदिर नहीं रहा वह श्रद्धा का महासागर,सेवा की तपस्थली और संस्कारों की जीवंत पाठशाला बन गया। जब लाखों चरण एक दिशा में बढ़े,
जब हर मुख से हर-हर महादेव निकला और जब हर हाथ में प्रसाद के साथ आशीर्वाद था। तब यह स्पष्ट हो गया कि आस्था आज भी जीवित है, शुद्ध है, और सशक्त है।
मदनलाल ग्रोवर और बाबू ग्रोवर के लिए यह आयोजन कोई कार्यक्रम नहीं यह जीवन की साधना है। ऐसी साधना, जिसमें अहंकार नहीं, प्रदर्शन नहीं, केवल समर्पण है। दिन-रात चलने वाला भंडारा,थकान से परे खड़े सेवक और हर श्रद्धालु के चेहरे पर संतोष
यह सब बताता है कि सेवा जब निस्वार्थ होती है, तो वह पूजा बन जाती है। संरक्षण जब संबल बन जाए
इस विराट भक्ति प्रवाह को दिशा और गरिमा तब मिलती है,जब इसके सूत्रधार और संरक्षक संजय सत्येंद्र पाठक जैसे जनप्रतिनिधि साथ खड़े होते हैं। उनकी उपस्थिति मंच तक सीमित नहीं रहती वह आयोजन को विश्वास,
आयोजकों को साहस और श्रद्धालुओं को अपनापन देती है। यह वही क्षण होता है, जब राजनीति लोकसेवा में बदल जाती है और नेतृत्व आस्था का प्रहरी बन जाता है। भजन, जो आत्मा तक उतर गए जब हेमंत ब्रजवासी की वाणी गूंजी,तो वह केवल संगीत नहीं था वह प्रार्थना थी,वह संवाद था, वह हर टूटे मन के लिए संबल था।
लोग झूमे, लोग रोए, लोग नतमस्तक हुए क्योंकि भजन उस दिन कानों में नहीं, सीधे हृदय में उतरे।
विजयराघवगढ़ विधानसभा के सलैया पड़खुरी के नीलकंठेश्वर धाम में देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित महाशिवरात्रि महोत्सव एवं धाम की 36वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने नगर को एक दिव्य धार्मिक नगरी में परिवर्तित कर दिया। दूर-दराज़ के जिलों, नगरों और ग्रामीण अंचलों से आए श्रद्धालुओं के जनसैलाब ने यह दृश्य उपस्थित कर दिया मानो कैलाश पर्वत की छाया स्वयं इस धरा पर उतर आई हो।
इस विराट आयोजन की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब कार्यक्रम के संरक्षक संजय सत्येंद्र पाठक एवं गणेश सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों जनप्रतिनिधियों ने न केवल कार्यक्रम में सहभागिता की, बल्कि आयोजकों की भक्ति, सेवा और तपस्या की मुक्तकंठ से सराहना कर श्रद्धालुओं का मन जीत लिया।
महोत्सव के प्रथम दिवस शिवलिंग निर्माण, रुद्राभिषेक एवं भव्य शिव बारात ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हर-हर महादेव के जयघोष, घनघोर घंटानाद और शंखध्वनि से संपूर्ण वातावरण शिवमय हो उठा।
इस पावन अवसर पर श्रीकांत चतुर्वेदी {{मैहर विधायक}}, वीरेंद्र बहादुर सिंह {{बड़वारा विधायक}}, मनीष पाठक {{नगर निगम अध्यक्ष}}, युवा समाजसेवी यश पाठक सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक शिवभक्ति में लीन होकर शिव बारात में सम्मिलित हुए।
शिव बारात की झांकियाँ अद्भुत, अलौकिक और भावनाओं से परिपूर्ण थीं भस्म रमाए भोलेनाथ, माता पार्वती, गणों की टोली और नृत्य करते भक्त..ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो त्रेता और द्वापर युग की झलक वर्तमान में साकार हो उठी हो।
द्वितीय दिवस का शुभारंभ गुरु श्रीचरणों से हुआ। खजुरी ताल वाले गुरुदेव श्री रामाआनंदाचार्य जी महाराज के भव्य स्वागत के साथ कार्यक्रम ने आध्यात्मिक ऊँचाई प्राप्त की। गुरु वाणी से आशीर्वाद पाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। गुरुदेव ने कहा—
नीलकंठेश्वर भक्ति धाम का कण-कण शिवमय है। यहाँ की भक्ति अलौकिक है और भोलेनाथ की कृपा सदैव इस धाम पर बनी रहेगी। दोपहर में पूर्णाहुति ग्रोवर परिवार द्वारा संपन्न कराई गई। इसके पश्चात श्रद्धालु संगीत संध्या स्थल पर पहुँचे, जहाँ सुप्रसिद्ध भजन गायक हेमंत ब्रजवासी ने अपनी सरस्वती-स्पर्शी वाणी से भोलेनाथ के भजनों की ऐसी रसधारा बहाई कि श्रोता देर रात तक मंत्रमुग्ध रहे। भक्ति, भाव और सुरों के संगम ने वातावरण को इतना दिव्य बना दिया कि हर हृदय नृत्य करने लगा, हर आत्मा शिव में लीन हो गई।
इस अवसर पर विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने मंच से कहा मदनलाल ग्रोवर और बाबू ग्रोवर की भक्ति को शब्दों में बाँधना संभव नहीं। यह आयोजन कोई सामान्य कार्य नहीं, यह तपस्या है, साधना है। नीलकंठेश्वर धाम परिवार सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने हेमंत ब्रजवासी के भजनों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी मधुर और भावपूर्ण वाणी विरले ही सुनने को मिलती है। वहीं सांसद गणेश सिंह ने कहा मैं हर बार यहाँ भोलेनाथ के दर्शन और बाबू ग्रोवर के स्नेह से फलीभूत होकर लौटता हूँ। यह आयोजन केवल ग्रोवर परिवार का नहीं, हम सबका है। इससे हमें सेवा, समर्पण और परोपकार की प्रेरणा मिलती है।
पूरे आयोजन के दौरान विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहाँ लाखों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। प्रभु इच्छा तक देर रात चलता रहा भंडारा एक ओर प्रसादी की सुगंध, दूसरी ओर भजनों की मधुर लहरियाँ पूरा परिसर शिवमय हो उठा।
कार्यक्रम की पूर्णाहुति शिवभक्त मदनलाल ग्रोवर, बाबू ग्रोवर एवं रुद्राक्ष ग्रोवर द्वारा की गई। बाबू ग्रोवर ने भावुक स्वर में कहा आप सभी भक्तों का स्नेह और आशीर्वाद ही हमारी शक्ति है। माता-पिता मेरे लिए ईश्वर समान हैं। उनकी प्रसन्नता ही मेरी पूजा है, वही मेरे जीवन का प्रसाद है। उनके इन शब्दों ने उपस्थित जनसमूह की आँखें नम कर दीं।
नीलकंठेश्वर धाम का यह आयोजन एक संदेश
सिखाकर गया कि धर्म दिखाने की वस्तु नहीं, जीने की प्रक्रिया है। सेवा कोई दायित्व नहीं, सौभाग्य है।
और आस्था कोई परंपरा नहीं, जीवित चेतना है।
आज नीलकंठेश्वर भक्ति धाम केवल एक मंदिर नहीं—
यह उन लाखों लोगों की आशा है जो यहाँ आकर
कुछ देर के लिए ही सही,पर अपने ईश्वर के बहुत पास हो जाते हैं। और जब सब कुछ समाप्त हो जाता है,
तो अंत में केवल यही स्वर बचता है जय भोलेनाथ।
जहाँ आस्था थकती नहीं, और सेवा कभी रुकती नहीं।5t) प्रेरणा मिलती है।
पूरे आयोजन के दौरान विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहाँ लाखों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। प्रभु इच्छा तक देर रात चलता रहा भंडारा एक ओर प्रसादी की सुगंध, दूसरी ओर भजनों की मधुर लहरियाँ पूरा परिसर शिवमय हो उठा।
कार्यक्रम की पूर्णाहुति शिवभक्त मदनलाल ग्रोवर, बाबू ग्रोवर एवं रुद्राक्ष ग्रोवर द्वारा की गई। बाबू ग्रोवर ने भावुक स्वर में कहा आप सभी भक्तों का स्नेह और आशीर्वाद ही हमारी शक्ति है। माता-पिता मेरे लिए ईश्वर समान हैं। उनकी प्रसन्नता ही मेरी पूजा है, वही मेरे जीवन का प्रसाद है। उनके इन शब्दों ने उपस्थित जनसमूह की आँखें नम कर दीं।
नीलकंठेश्वर धाम का यह आयोजन एक संदेश
सिखाकर गया कि धर्म दिखाने की वस्तु नहीं, जीने की प्रक्रिया है। सेवा कोई दायित्व नहीं, सौभाग्य है।
और आस्था कोई परंपरा नहीं, जीवित चेतना है।
आज नीलकंठेश्वर भक्ति धाम केवल एक मंदिर नहीं—
यह उन लाखों लोगों की आशा है जो यहाँ आकर
कुछ देर के लिए ही सही,पर अपने ईश्वर के बहुत पास हो जाते हैं। और जब सब कुछ समाप्त हो जाता है,
तो अंत में केवल यही स्वर बचता है जय भोलेनाथ।
जहाँ आस्था थकती नहीं, और सेवा कभी रुकती नहीं।