वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा नारायणी पाठशाला परिसर 31 बटुकों का विधि-विधान से हुआ सामूहिक उपनयन संस्कार

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वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा नारायणी पाठशाला परिसर
31 बटुकों का विधि-विधान से हुआ सामूहिक उपनयन संस्कार
कटनी।। शहर के ऐतिहासिक नारायण संस्कृत महाविद्यालय नारायणी पाठशाला, एल्फटगंज परिसर में शुक्रवार को परंपरा, संस्कार और वैदिक संस्कृति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। विद्यालय प्रांगण में पाँचवें सामूहिक उपनयन संस्कार का आयोजन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया, जिसमें 31 बटुकों का उपनयन संस्कार संपन्न हुआ।
प्रातःकाल से ही परिसर वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। नारायण संस्कृत महाविद्यालय शिक्षा समिति के तत्वावधान में पहले शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बटुक पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। इसके पश्चात आचार्यों के सान्निध्य में शुद्धिकरण, यज्ञोपवीत धारण, ब्रह्मोपदेश और आशीर्वचन की विधियां संपन्न कराई गईं। बटुकों ने गुरुजनों से गायत्री मंत्र का उपदेश प्राप्त कर वैदिक जीवन की ओर अपने प्रथम कदम बढ़ाए।
कार्यक्रम में पंडित जैनेंद्र कुमार त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य एवं प्राध्यापक, ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, उमाशंकर पांडेय सहित अन्य विद्वान गुरुजन उपस्थित रहे। आचार्यों के मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस संस्कार ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि उपनयन संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासन, ज्ञान और सदाचार के मार्ग पर ले जाने की दीक्षा है। नारायण संस्कृत महाविद्यालय सन 1888 से निरंतर संचालित होकर संस्कृत, वेद और शास्त्रों की परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। यहां व्याकरण शास्त्र, वेद, वेदांत, ज्योतिष, साहित्य और न्याय की शिक्षा के साथ प्रथमा से आचार्य, बीए, एमए एवं शिक्षाशास्त्र तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
उल्लेखनीय है कि इस गुरुकुल से परमपूज्य परंब्रह्मलीन देव प्रभाकर शास्त्री ‘दद्दाजी’, पूर्व विधायक विष्णुदत्त पौराणिक तथा मैहर के पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं।
संस्कार पूर्ण होने के पश्चात बटुकों को आशीर्वाद दिया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। समापन अवसर पर प्रसाद वितरण किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं और परिजनों ने आयोजन को सनातन संस्कृति और वैदिक परंपरा का सजीव उदाहरण बताते हुए विद्यालय के प्रयासों की सराहना की।

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