कुपोषित बच्चों की कुल संख्या 1021 थी, वहीं जून 2024 में यह घटकर हुई 557 कुपोषण मुक्त कटनी बनाने की दिशा मे कलेक्टर के प्रयास हुए फलीभूत,जिले के कुपोषण दर मे रिकॉर्ड 45 प्रतिशत की कमी,जिला प्रशासन के आव्हान पर स्वैच्छिक एवं सामाजिक संगठनों ने जन सहयोग का बढाया हांथ,कटनी वासियों की समन्वित भागीदारी से सुपोषण अभियान को मिली बड़ी कामयाबी

कुपोषित बच्चों की कुल संख्या 1021 थी, वहीं जून 2024 में यह घटकर हुई 557
कुपोषण मुक्त कटनी बनाने की दिशा मे कलेक्टर के प्रयास हुए फलीभूत,जिले के कुपोषण दर मे रिकॉर्ड 45 प्रतिशत की कमी,जिला प्रशासन के आव्हान पर स्वैच्छिक एवं सामाजिक संगठनों ने जन सहयोग का बढाया हांथ,कटनी वासियों की समन्वित भागीदारी से सुपोषण अभियान को मिली बड़ी कामयाबी
कटनी।। जिले मे कुपोषण मुक्ति के लिए चलाये जा रहे अभियान में शासकीय भागीदारी और जन सहयोग के समन्वित प्रयासों के सार्थक परिणाम दिखने लगे है। जिले मे जनवरी 2024 की स्थिति मे जहां कुपोषित बच्चों की कुल संख्या 1021 थी, वहीं जून 2024 में यह घटकर 557 ही रह गई है। इस प्रकार जिले में संचालित सुपोषण अभियान की वजह से जिले के कुपोषण दर मे रिकॉर्ड 45 प्रतिशत की कमी परिलक्षित हुई है। कुपोषण मुक्त कटनी बनाने के लिए संकल्पित कलेक्टर श्री प्रसाद ने जिले मे कुपोषण को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए कई प्रयास किये एवं स्वैच्छिक एवं सामाजिक संगठनों की इस कार्य मे भागीदारी का आह्वान किया। जिससे जिले की कुपोषण दर मे उल्लेखनीय कमी आई। जिले मे जनवरी 2024 मे जहां गंभीर तीव्र कुपोषित सैम बच्चों की संख्या 154 थी, वह मई 2024 मे घटकर मात्र 87 हो गई है। जबकि मैम मध्यम तीव्र कुपोषित बच्चों की संख्या जो जनवरी 2024 मे 867 थी, वह मई 2024 में घटकर 470 ही रह गई। इस प्रकार पोषण किट प्रदान करने मे सामाजिक संगठनों की भागीदारी लेने से सैम और मैम बच्चों के पोषण स्तर मे क्रमशः 43 प्रतिशत और 46 प्रतिशत का सुधार हुआ। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि जनवरी 2024 मे जहां जिले मे कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 1021 थी, वह जून 2024 मे घटकर मात्र 557 ही रह गई। इस प्रकार आलोच्य अवधि के दौरान कुपोषित बच्चों की संख्या मे करीब 45 फीसदी की कमी आई ।
कलेक्टर ने कुपोषित बेटी साक्षी से मुलाकात के बाद जिले मे जनवरी 2023 से कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा मे ठोस पहल शुरू की। समाज और सामाजिक संगठनों को जोड़ने का सिलसिला भी शुरू हुआ। बताया गया कि जनवरी 2023 मे जिले मे 232 गंभीर तीव्र कुपोषित सैम बच्चे और 1318 मध्यम तीव्र कुपोषित मैम बच्चे थे। इनकी संख्या मे कमी लाने पोषण आहार विशेषज्ञों से सतत परामर्श के बाद अप्रैल 2023 मे 200 बच्चों को अतिरिक्त पोषण किट प्रदान किया गया। जिसके परिणाम स्वरूप नौ महीने की अवधि मे ही सैम और मैम बच्चों के पोषण स्तर मे क्रमशः 27 प्रतिशत और 23 प्रतिशत का सुधार हुआ। जिसकी वजह से जनवरी 2024 मे जिले मे कुपोषित बच्चों की कुल संख्या 1021 ही रह गई। जिला प्रशासन के आव्हान पर कुपोषण मुक्ति के इस अभियान मे समेकित रूप से 7 लाख 31 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई जिससे 1021 कुपोषित बच्चों को पूरक पोषण किट प्रदान किया गया। विशेषज्ञों की सलाह पर इसमें आयरन, विटामिन, मिनरल से भरपूर आहार को शामिल किया गया। इसी क्रम मे बीते 15 जून को ढीमरखेड़ा मे 557 कुपोषित बच्चों को पोषण किट प्रदान किया गया।