अवैध बस संचालन पर परिवहन विभाग की मिलीभगत उजागर – यात्रियों की जान से खिलवाड़, अधिकारी जिम्मेदार

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शहडोल। प्रदेश में परिवहन विभाग की लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहडोल जिले के ग्राम बरकोटा निवासी अजय कुमार साहू ने विभाग को लिखित शिकायत देकर कटनी-शहडोल सहित कई रूटों पर चल रही बसों के अवैध संचालन का खुलासा किया है। यह सिर्फ बस मालिकों की मनमानी नहीं, बल्कि परिवहन विभाग और उसके अधिकारियों की शह पर पनपता संगठित भ्रष्टाचार है, जो सीधे यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

शिकायत के अनुसार, विजयर प्रकाश मिश्रा निवासी कटनी अपनी बस सर्विस को पिछले 15 वर्षों से अवैध तरीके से चला रहा है। कई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन संदिग्ध हैं, फर्जी नंबरों और स्वामी परिवर्तन की आड़ में बसें दौड़ाई जा रही हैं। इतना ही नहीं, कई वाहनों के पास न तो परमिट है और न ही बीमा अथवा फिटनेस प्रमाण पत्र। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। सवाल यह उठता है कि बिना विभाग की अनुमति और बिना मासिक फिटनेस जांच के इतनी बसें कैसे चल रही हैं? जाहिर है कि यह सब परिवहन विभाग की मिलीभगत और संरक्षण के बिना संभव नहीं।

उल्लेखनीय है कि जिन बसों पर शिकायत दर्ज हुई है, उनके रजिस्ट्रेशन नंबर हैं – MP16P0252, MP20PA0271, MP09FA3323, MP09FA4533, MP09FA1771, MP07F2005, MP09AF1769 और DL1PC4743। इन वाहनों पर वर्षों से कार्रवाई न होना ही इस बात का प्रमाण है कि परिवहन विभाग के अधिकारी इन अवैध धंधों में हिस्सेदार बने हुए हैं।

यात्रियों से जबरन किराया वसूली, अन्य बस मालिकों पर दबाव और नियमों की खुलेआम अनदेखी – यह सब सरकार के दावों और नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाता है। यदि कभी सड़क पर कोई बड़ा हादसा हो जाए तो इसकी सीधी जिम्मेदारी परिवहन विभाग और उनके अधिकारियों की होगी, जो अवैध बस संचालन को रोकने के बजाय मौन साधे बैठे हैं।

शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन बसों पर रोक नहीं लगाई गई तो किसी भी दिन खून से सनी बड़ी दुर्घटना प्रदेश की सड़कों पर देखने को मिल सकती है। सवाल यह है कि आखिर कब तक परिवहन विभाग और उसके जिम्मेदार अधिकारी इस तरह के अवैध खेल को अनदेखा करते रहेंगे? और क्या इन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या मामला हमेशा की तरह फाइलों में दबा रहेगा?

प्रदेश सरकार जहां सड़क सुरक्षा और यात्री हित की दुहाई देती है, वहीं जमीनी स्तर पर उसका सबसे बड़ा विभाग ही लोगों की जान खतरे में डाल रहा है। स्पष्ट है कि इस पूरे मामले का असली जिम्मेदार परिवहन विभाग और उसके अधिकारी ही हैं, जिनकी नाक के नीचे यह अवैध बस माफिया सालों से फल-फूल रहा है।

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