सोहागपुर कोयलांचल में बेलगाम ‘चौकड़ी’! महाप्रबंधक पर गंभीर आरोप, 8 गायों की मौत पर भी लीपापोती?
शहडोल। एसईसीएल सोहागपुर कोयलांचल अंतर्गत अमलाई ओसीएम में हालात लगातार विवादों में घिरते जा रहे हैं। कोयला उत्पादन और नियमों के पालन की बजाय यहां कथित तौर पर एक ‘चौकड़ी तंत्र’ हावी होने के आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों और स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारियों के अनुसार, ठेका कंपनी आर्केटीसी के संचालन में शासन और एसईसीएल के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की जा रही है, जबकि महाप्रबंधक स्तर से प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा।ठेका कंपनी पर ‘मनमानी राज’ के आरोप
बताया जा रहा है कि ठेका कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी अपने करीबी लोगों को अहम जिम्मेदारियां देकर एक समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं। मजदूरों की नियुक्ति से लेकर सप्लायर चयन और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों की दखल तक, पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए उत्पादन और परिवहन में कई स्तरों पर अनियमितताएं की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अमलाई ओसीएम में कार्यरत कुछ अधिकारी और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत से मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है। जिन मजदूरों ने आवाज उठाई, उन्हें किनारे करने या बाहर का रास्ता दिखाने के प्रयास भी किए गए।
महाप्रबंधक की भूमिका पर उठे सवाल
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल महाप्रबंधक की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि समय रहते प्रभावी निगरानी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते। लेकिन लगातार बढ़ते विवाद, स्थानीय असंतोष और प्रशासनिक चुप्पी ने संदेह और गहरा कर दिया है।
चर्चा यह भी है कि प्रबंधन की चुप्पी ने ठेका कंपनी को खुली छूट दे दी है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में कोलांचल की साख पर गंभीर असर पड़ सकता है।
8 गायों की मौत: अब तक कार्रवाई शून्य
सबसे गंभीर मामला पूर्व में हुई आठ गायों की संदिग्ध मौत का है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस घटना में भारी लापरवाही सामने आई थी, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देकर मामले को लंबित रखा गया है।
चर्चा यह भी है कि “रिपोर्ट का इंतजार” महज बहाना बन चुका है और मामले को दबाने की कोशिश की गई। यदि यह सच है तो यह न केवल प्रशासनिक निष्क्रियता बल्कि संवेदनहीनता का भी बड़ा उदाहरण है। गौवंश की मौत जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
मजदूरों और स्थानीय जनता में आक्रोश
कोलांचल क्षेत्र में काम कर रहे मजदूरों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि उत्पादन लक्ष्य और मुनाफे की दौड़ में पर्यावरण, पशु संरक्षण और श्रमिक हितों की अनदेखी की जा रही है।
यदि समय रहते पारदर्शी जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक महाप्रबंधक स्तर सहित संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं।