जब जनप्रतिनिधि कुर्सी से नहीं, करुणा से पहचान बना ले….दिव्यांग दीपक के पास स्वयं पहुंचीं महापौर, इंसानियत बनी जनसुनवाई की पहचान
जब जनप्रतिनिधि कुर्सी से नहीं, करुणा से पहचान बना ले….दिव्यांग दीपक के पास स्वयं पहुंचीं महापौर, इंसानियत बनी जनसुनवाई की पहचान
कटनी।। नगर निगम कार्यालय में आयोजित मंगलवार की जनसुनवाई उस समय एक साधारण प्रशासनिक प्रक्रिया से कहीं आगे बढ़ गई, जब महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी ने यह सिद्ध कर दिया कि जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा दायित्व संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण है। रामनिवास सिंह वार्ड निवासी दिव्यांग नागरिक दीपक रैकवार अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे। उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए महापौर ने औपचारिकता निभाने के बजाय स्वयं अपनी कुर्सी छोड़कर दीपक के पास पहुंचकर न केवल उनकी समस्या सुनी, बल्कि पूरी गंभीरता और आत्मीयता के साथ उनकी पीड़ा को समझा। यह दृश्य जनसुनवाई में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया।
दीपक ने बताया कि गल्ला पर्ची जारी न हो पाने के कारण उनके परिवार को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महापौर ने तत्काल योजना प्रभारी रविशंकर पांडेय को मौके पर बुलाकर समस्या के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए। निर्देशों के पालन में योजना प्रभारी द्वारा आवश्यक दस्तावेज लेकर तत्काल पोर्टल पर प्रक्रिया पूर्ण की गई, जिससे गल्ला पर्ची शीघ्र जारी होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी ने केवल समस्या के समाधान तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि दीपक की दिव्यांगता को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें पात्रता अनुसार सभी शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाएं तभी सार्थक हैं, जब उनका लाभ वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक संवेदनशीलता के साथ पहुंचे।
महापौर ने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निगम की जनसुनवाई कोई औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि आम नागरिकों के दुःख-दर्द को समझने और उनका समाधान करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन, वृद्ध और कमजोर वर्गों के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता, करुणा और मानवीय मूल्यों के साथ कार्य करता है, तब वह केवल पद पर आसीन नहीं रहता, बल्कि जनमानस में एक भरोसे का प्रतीक बन जाता है। महापौर की यह भावना ही उन्हें एक सामान्य जनप्रतिनिधि से ऊपर, एक सच्चे लोकसेवक के रूप में स्थापित करती है।