कोतमा में सड़क निर्माण के भूमि पूजन पर भिड़े भाजपा-कांग्रेस के जनप्रतिनिधि
भूमि पूजन में दिखी अस्तित्व की लड़ाई,
कोतमा में शासन की कायाकल्प योजना के तहत सड़क निर्माण के भूमि पूजन पर भिड़े भाजपा-कांग्रेस के जनप्रतिनिधि,
आरोप:- मंच से वरिष्ठ भाजपाइयों का अपमान
कोतमा। कोतमा नगर पालिका अंतर्गत गुरुवार को भूमि पूजन का कार्यक्रम किया गया, कार्यक्रम भाजपा सरकार द्वारा कायाकल्प योजना के तहत नगरपालिका को आवंटित की गई राशि से सड़क निर्माण के का था। जिसके लिए कोतमा के गांधी चौक में नगर पालिका ने भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया था कार्यक्रम के आयोजन के दौरान मंच में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के जनप्रतिनिधि और नेता गण मंच में एक साथ दिखाई दिए। भूमि पूजन भी कांग्रेस के विधायक सुनील सराफ, कोतमा नगर पालिका अध्यक्ष अजय सराफ और उपाध्यक्ष वैशाली बद्री ताम्रकार के साथ भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र जैन, अंतोदय समिति के अध्यक्ष विजय पांडे, मंच के समक्ष अवधेश ताम्रकार मुनेश्वर पांडे सहित दर्जनों वरिष्ठ भाजपा भी शामिल थे। भूमि पूजन के उपरांत मंच में अपनी सरकार और अपनी नगरपालिका की वाहवाही करने के लिए कांग्रेस और भाजपाइयों में होड़ सी मची हुई थी। जिसके बाद मंच में ही जनप्रतिनिधि और नेताओं के भाषण के दौरान ही भारतीय जनता पार्टी के नेता और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों के बीच गहमागहमी का माहौल बन गया। कई मिनट तक तेज आवाजों के बीच भूमि पूजन का कार्यक्रम अस्तित्व की लड़ाई में बदल गया। मंच से माइक पर उपदेश देने को लेकर दोनों पार्टी के नेता आपस में लड़ पड़े। कल मिनट तक चले मौखिक द्वंद को वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष ने अपने कड़े शब्दों से पूरे माहौल को ठंडा कर दिया।

मंच में स्थान और वक्तव्य बोलने के अवसर को लेकर हुई गहमागहमी
कार्यक्रम में काफी देर तक भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेता और जनप्रतिनिधि के बीच गहमागहमी का माहौल बना रहा, इसी बीच वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष ने परिषद की तरफ से मोर्चा संभालते हुए भारतीय जनता पार्टी के नेता और जनप्रतिनिधियों को अपने शब्दों से चुप करा दिया, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष ने भाजपा के नेताओं को स्पष्ट कहा कि परिषद हमारी है हम जिसे चाहे उसे मंच में जगह दे और जिसे चाहे उसे माइक पर कहने या भाषण देने का मौका या अवसर दें, जिसके बाद कार्यक्रम में हो रही गहमागहमी का माहौल धीरे से शांत हो गया। लेकिन मंच पर शांत हुए वातावरण भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के सीने में आग सुलगा दी है, भारतीय जनता पार्टी के नेता और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सत्ता के मद में चूर नगर परिषद द्वारा वरिष्ठ नागरिक और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी के नेता और जनप्रतिनिधियों का अपमान किया गया है साथ ही भारतीय जनता पार्टी द्वारा आवंटित बजट की जानकारी और भाजपा शासन की योजना को दबाने के लिए मंच से भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष को बोलने का अवसर नहीं दिया गया। कोतमा नगर पालिका अध्यक्ष ने बताया कि हमने भारतीय जनता पार्टी की तरफ से वरिष्ठ भाजपा नेता और अंत्योदय समिति के अध्यक्ष को अपने वक्तव्य कहने का अवसर दिया था, वही किसी भी पार्टी से उनके मंडल या ब्लॉक अध्यक्ष को समय की कमी के कारण मंच से वक्तव्य अवसर नहीं दिया गया चाहे वह कांग्रेस के हो या भाजपा के मुझे नहीं लगता है इसमें राजनीति होनी चाहिए।

भरे मंच में गुंडई पर उतारू जनप्रतिनिधि और नेता
मंच पर मची गहमागहमी के बाद कार्यक्रम के दौरान हुए भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधि और नेता के बीच तू-तू-मैं-मैं नगर में चर्चा का विषय बना। जनता के बीच भाजपा और कांग्रेस के बीच हुई मंच पर मौखिक युद्ध ने नेताओं को गलीछाप नेताओं का दर्जा दे दिया, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के बीच हुई बहस से नगर में जो संदेश प्राप्त हुआ है उससे दोनों ही पार्टी की छवि धूमिल हुई है। जनता के बीच नेताओं की वर्चस्व की लड़ाई को राजनीतिक ना होकर गुंडई और सत्ता पावर के जिद की लड़ाई पर बदल दी है, कांग्रेसी अपनी परिषद की पावर की ऐठन दिखा रही है तो भाजपा राज्य सत्ता के मद की हनक दिखा रही है।
पूर्व से चली आ रही वर्चस्व की लड़ाई
विगत वर्ष बस स्टैंड में भूमि पूजन और उद्घाटन का एक कार्यक्रम बीजेपी नगर परिषद के दौरान रखा गया था तब मंत्री विधायक कलेक्टर और नगर अध्यक्ष के मंचासीन रहते हुए कोतमा विधायक सुनील सराफ को मंच से बोलने का अवसर नहीं दिया गया था तब मंच पर कोतमा विधायक ने विरोध दर्ज कराते हुए सरकार पर आवाज दबाने का आरोप लगाया था। ठीक उसी तरह इस बार कांग्रेस परिषद में भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष को कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलने का अवसर नहीं दिया गया जिससे भूमि पूजन का कार्यक्रम गहमागहमी में तब्दील हो गया। कार्यक्रम वर्चस्व की लड़ाई पर केंद्रित होकर मौखिक रूप में तब्दील होते हुए सत्ता की खनक और कुर्सी के शक्ति प्रदर्शन तक आकर रुक गया, देखना यह है कि अब यह वर्चस्व की लड़ाई कहां तक जाती है।