जिला शिक्षा अधिकारी पीट रहे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ढिंढोरा

जिला शिक्षा अधिकारी पीट रहे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ढिंढोरा
सरकार का आदेश हुआ हवा-हवाई, जांच के नाम पर खानापूर्ति

शहडोल। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ढिंढोरा पीठ रही सरकार का आदेश हवा-हवाई साबित हो रहा है। जिला शिक्षा विभाग के आलाधिकारी सरकार के निर्देशों का स्कूलों में शिक्षकों से अनुपालन करने में असक्षम साबित हो रहे हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों की माने तो शिक्षक भी अपने कर्तव्य का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे हैं। नियमानुसार उन्हें स्कूल में आकर क्या पढ़ाना है, इसकी पाठ योजना पूर्व में ही तैयार करनी है। फिर दिन में क्या पढ़ाया गया उसकी भी डायरी में रिकार्ड रखना है, पर शायद ही जिले के किसी स्कूल में शिक्षकों द्वारा सरकार के इन निर्देश का पालन किया जा रहा है। ऐसे में जिले की प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था दरकती नजर आ रही है।
सुविधाओं सहित मानक का आभाव
जिले में संचालित कई निजी विद्यालयों में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है, शिक्षा के अधिकार अधिनियम की अनदेखी, इन विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, मानक के अनुरूप व्यवस्था की कमी, मनमाने फीस वसूले जाने सहित बच्चों के नामांकन में धांधली की बातें लगातार सामने आती रही है, निजी स्कूल भगवान भरोसे चल रहे हैं, कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि निजी विद्यालयों की व्यवस्था सुधारने को लेकर अधिकारी गंभीर ही नहीं है, जिससे अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है, अगर नियमित अंतराल में इन विद्यालयों की जांच हो तो निश्चित ही विद्यालय संचालक की मनमानी रुकती और शिक्षा के अधिकार अधिनियम का इन विद्यालयों में अनुपालन भी होता।
जांच के नाम पर होती है खानापूर्ति
शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा शासकीय विद्यालय का वार्षिक सम्पूर्ण निरीक्षण नहीं हो पाया है। विभाग से जुड़े जानकारों की माने तो वार्षिक निरीक्षण में विभागीय टीम शिक्षण अध्यापन कार्य से लेकर बच्चों को मिलने वाली शैक्षणिक मूलभूत सुविधाओं का पूरा आंकलन करती थी, लेकिन वर्तमान में विद्यालयों का वार्षिक निरीक्षण के नाम पर केवल औचक निरीक्षण ही होता है जिसे मात्र एक खानापूर्ति कहें तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि औचक निरीक्षण में टीम अचानक स्कूल में जाकर कुछ समय में चंद सवालों के स्कूल मुखिया व किसी शिक्षक से जवाब लेकर ही जिला मुख्यालय पर लौट आती है।

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