तीन बार FIR, दो बार निलंबन और विभागीय जांच में दोष सिद्ध होने के बाद चौकीदार की सेवा समाप्त अनुशासनहीनता और आपराधिक कृत्यों पर निगम प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
तीन बार FIR, दो बार निलंबन और विभागीय जांच में दोष सिद्ध होने के बाद चौकीदार की सेवा समाप्त
अनुशासनहीनता और आपराधिक कृत्यों पर निगम प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
कटनी। नगर निगम प्रशासन ने कर्मचारियों की अनुशासनहीनता, कर्तव्य के प्रति लापरवाही और गंभीर आपराधिक कृत्यों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगमायुक्त तपस्या परिहार ने लंबे समय से विवादों में रहे निगम के चौकीदार राजन रावत की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया है। निगम प्रशासन ने यह कार्रवाई निर्धारित वैधानिक प्रावधानों, सेवा शर्तों और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की है।
निगमायुक्त द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारी को लगातार अवसर दिए जाने और पूर्व में की गई विभागीय कार्रवाई के बावजूद उसके आचरण एवं कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं आया। कर्मचारी के विरुद्ध कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता, कार्यस्थल पर मादक पदार्थों के सेवन, शासकीय कार्य में व्यवधान तथा शासकीय एवं सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे। इन मामलों में समय-समय पर निलंबन एवं विभागीय जांच की कार्रवाई भी की गई।
अनुकंपा नियुक्ति से हुई थी सेवा की शुरुआत
जारी आदेश के अनुसार राजन रावत की नियुक्ति कार्यालयीन आदेश दिनांक 05 अक्टूबर 2018 के तहत अनुकंपा के आधार पर चौकीदार के पद पर की गई थी। उनके पिता स्वर्गीय रमाकांत रावत, जो नगर निगम में सहायक ग्रेड-02 के पद पर कार्यरत थे, की सेवाकाल के दौरान मृत्यु के बाद उन्हें यह नियुक्ति प्रदान की गई थी। नियुक्ति दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर की गई थी तथा उन्हें निगम द्वारा संचालित साधूराम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ किया गया था।
परिवीक्षा अवधि में ही सामने आए गंभीर मामले
निगम प्रशासन के अनुसार परिवीक्षा अवधि के दौरान ही कर्मचारी के कार्य एवं आचरण को लेकर लगातार शिकायतें और गंभीर मामले सामने आते रहे। कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अनुशासनहीनता के साथ कार्यस्थल पर मादक पदार्थों के सेवन तथा शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों को लेकर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई। इन मामलों में विभागीय जांच कराई गई, जिसमें आरोप प्रमाणित पाए गए। इसके बाद निगम प्रशासन ने 14 फरवरी 2025 को दीर्घ शास्ति अधिरोपित करते हुए कर्मचारी को अंतिम चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद कर्मचारी के आचरण में सुधार नहीं हुआ।
तीन बार दर्ज हुई FIR
निगम प्रशासन द्वारा जारी आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि कर्मचारी के विरुद्ध थाना कोतवाली, कटनी में तीन बार प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो चुकी थी। इसके अतिरिक्त रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में गाली-गलौज करने, शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप भी सामने आए।
इन मामलों की विभागीय जांच में भी आरोप प्रमाणित पाए गए। गंभीर बात यह रही कि पूर्व में विभागीय कार्रवाई और अंतिम चेतावनी के बाद भी कर्मचारी के आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
दो बार निलंबन और लगातार कारण बताओ नोटिस
आदेश में यह भी उल्लेखित है कि कर्मचारी के विरुद्ध लगातार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए तथा उसे दो बार निलंबित भी किया गया। इसके बावजूद अनुशासन एवं कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आने को निगम प्रशासन ने गंभीरता से लिया।
निगम प्रशासन के अनुसार किसी भी शासकीय कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए कर्तव्यों का ईमानदारी और अनुशासन के साथ निर्वहन करे। विशेष रूप से परिवीक्षा अवधि में कर्मचारी के कार्य, आचरण और सेवाभाव का परीक्षण किया जाता है। ऐसे में लगातार अनुशासनहीनता और गंभीर मामलों में संलिप्तता को कर्मचारी की उपयुक्तता के विपरीत माना गया।
परिवीक्षा अवधि में सेवा संतोषजनक नहीं पाए जाने का आधार
सेवा समाप्ति आदेश में निगमायुक्त ने उल्लेख किया है कि राजन रावत की परिवीक्षा अवधि आदेश जारी होने की तारीख तक समाप्त नहीं हुई थी। परिवीक्षा अवधि के दौरान तीन बार FIR दर्ज होना, लगातार कारण बताओ नोटिस जारी होना, दो बार निलंबन तथा विभागीय जांच में दोष सिद्ध होना इस बात का आधार बना कि कर्मचारी का कार्य एवं आचरण संतोषजनक नहीं है। निगम प्रशासन ने इन परिस्थितियों को देखते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि संबंधित कर्मचारी एक उपयुक्त शासकीय सेवक के रूप में स्वयं को सिद्ध करने में सफल नहीं रहा।
वैधानिक प्रावधानों के तहत लिया गया निर्णय
निगमायुक्त तपस्या परिहार ने मामले में उपलब्ध अभिलेखों, विभागीय जांच में सामने आए निष्कर्षों और कर्मचारी के लगातार असंतोषजनक आचरण को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार सेवा समाप्ति का निर्णय लिया।
आदेश में मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965, नियुक्ति आदेश की शर्त क्रमांक 01 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के नियम 8(4) में निहित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए श्री राजन रावत की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
निगम प्रशासन ने दिया स्पष्ट संदेश
इस कार्रवाई को नगर निगम प्रशासन की ओर से कर्मचारियों में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निगम प्रशासन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि शासकीय सेवा में रहते हुए कर्तव्यों के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता अथवा गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्तता को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। खास तौर पर तब, जब किसी कर्मचारी के विरुद्ध पूर्व में विभागीय कार्रवाई, निलंबन, जांच और चेतावनी जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जा चुकी हों और इसके बावजूद उसके आचरण में सुधार नहीं आए, तो सेवा संबंधी नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है। राजन रावत के मामले में भी निगम प्रशासन ने पहले विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए सुधार का अवसर दिया, लेकिन लगातार सामने आए मामलों और विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद अंततः वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया गया।
निगमायुक्त तपस्या परिहार की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि नगर निगम में अनुशासनहीनता, कर्तव्य में लापरवाही और गंभीर कदाचार के मामलों में नियमों के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा शासकीय सेवा की गरिमा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।