दस्तावेज़ों की जांच में खुला राज, पद भी गया और लाभ भी फर्जी हिन्दी मुद्रलेखन प्रमाण-पत्र से सरकारी लाभ लेना पड़ा भारी विभागीय जांच में प्रमाण-पत्र फर्जी साबित, सहायक ग्रेड-3 आशाराम राजपूत पदावनत; प्रथम समयमान वेतनमान भी निरस्त फर्जी दस्तावेज के जरिए अनुचित लाभ लेने और कार्यालय को गुमराह करने का आरोप विभागीय जांच में प्रमाणित

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दस्तावेज़ों की जांच में खुला राज, पद भी गया और लाभ भी
फर्जी हिन्दी मुद्रलेखन प्रमाण-पत्र से सरकारी लाभ लेना पड़ा भारी
विभागीय जांच में प्रमाण-पत्र फर्जी साबित, सहायक ग्रेड-3 आशाराम राजपूत पदावनत; प्रथम समयमान वेतनमान भी निरस्त
फर्जी दस्तावेज के जरिए अनुचित लाभ लेने और कार्यालय को गुमराह करने का आरोप विभागीय जांच में प्रमाणित
कटनी।। सरकारी सेवा में फर्जी दस्तावेज के आधार पर लाभ लेने के मामले में कटनी प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। महिला एवं बाल विकास विभाग, कटनी में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 आशाराम राजपूत के विरुद्ध हिन्दी मुद्रलेखन परीक्षा के कथित फर्जी प्रमाण-पत्र के मामले में हुई विभागीय जांच के बाद आरोप प्रमाणित पाए गए। इसके बाद कलेक्टर आशीष तिवारी ने उन्हें सहायक ग्रेड-3 के पद से चतुर्थ श्रेणी भृत्य के पद पर प्रत्यावर्तित (पदावनत) कर दिया है।
प्रशासनिक आदेश के अनुसार उनकी नई पदस्थापना कार्यालय परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना ढीमरखेड़ा में की गई है। साथ ही वर्ष 2019 में उन्हें दिया गया प्रथम समयमान वेतनमान भी निरस्त कर दिया गया है।

2006 में भृत्य से बने थे सहायक ग्रेड-3
मामला आशाराम राजपूत की वर्ष 2006 में भृत्य पद से सहायक ग्रेड-3 के पद पर हुई पदोन्नति से जुड़ा है। वर्ष 2019 में प्रथम समयमान वेतनमान दिए जाने की प्रक्रिया के दौरान उनकी सेवा पुस्तिका में हिन्दी मुद्रलेखन परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण-पत्र दर्ज नहीं मिला। इस पर जिला पेंशन कार्यालय की ओर से आपत्ति दर्ज की गई। इसके बाद विभागीय निर्देश पर राजपूत ने नवंबर 2020 में हिन्दी मुद्रलेखन परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया।
भोपाल से जांच कराई तो सामने आया बड़ा अंतर
प्रमाण-पत्र की सत्यता की जांच के लिए उसे शीघ्रलेखन एवं मुद्रलेखन परीक्षा परिषद, भोपाल भेजा गया। विभागीय जानकारी के अनुसार परिषद से प्राप्त उपलब्ध परीक्षाफल एवं अभिलेखों से प्रमाण-पत्र का मिलान नहीं हुआ।
जांच में प्रमाण-पत्र को वास्तविक अभिलेखों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद मामले में विभागीय जांच शुरू की गई।
विभागीय जांच के निष्कर्ष में फर्जी हिन्दी मुद्रलेखन प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर अनुचित लाभ लेने तथा कार्यालय को गुमराह करने संबंधी आरोप प्रमाणित पाए गए।

पदावनति के साथ आर्थिक लाभ भी वापस
मामले में प्रशासन ने केवल पदावनति तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-10 के प्रावधानों के तहत कलेक्टर आशीष तिवारी ने आशाराम राजपूत को सहायक ग्रेड-3 से वापस चतुर्थ श्रेणी भृत्य के पद पर प्रत्यावर्तित करने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही वर्ष 2019 में प्रदान किया गया प्रथम समयमान वेतनमान का आदेश भी निरस्त कर दिया गया।

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