बिजुरी कॉलरी में प्रबंधक का कानून, स्थाई कर्मचारियों की जगह ठेका मजदूर को प्राथमिकता

0

श्रमिक संघो के विरोध के बावजूद चहेतो को कर रहे उपकृत
संडे ड्युटी में लागू कर दिये अपने बनाये नियम
एसईसीएल हसदेव क्षेत्र की बिजुरी कोयला खदान में पदस्थ खान प्रबंधक और कार्मिक प्रबंधक मजदूरो के शोषण करने में कोई कसर नही छोड रहे है, संघ ने विरोध दर्ज कराने के बावजूद दमनकारी नीतियों को अपनाकर श्रमिकों को शोषण किया जा रहा है, चहेतो को संडे ड्युटी में उपकृत करने के साथ ही ठेका प्रथा को बढावा देने का काम खुलेआम हो रहा है।
अनूपपुर। मौजूदा सरकार ने 1973 में कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था, तांकि मजदूरो को शोषण निजी कंपनिया न कर सके और सरकार ही इन कोयला खदानो को संचालित करा सके, यह व्यवस्था अभी भी लागू है, लेकिन धीरे-धीरे कर के मजदूर संगठनों के विरोध के बावजूद बीते कुछ सालो से सरकार निजीकरण की ओर कोयला उद्योग को ले कर जा रही है। कोल ब्लाक आवंटन के नाम पर कोयला खदानों की बलि चढाई जा रही है, वहीं खदानो में तैनात अधिकारी भी कर्मचारियों का शोषण करने में कोई कसर नही छोड रहे है। एसईसीएल के हसदेव क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बिजुरी भूमिगत खदान में पदस्थ प्रबंधक के.के. ङ्क्षसह और कार्मिक प्रबंधक व्हीव्ही महाजन स्थाई कर्मचारियों को छोड श्रमिक संगठनों के विरोध के बावजूद ठेका श्रमिकों को बढावा देने में तुले हुए है, इसी बीच उन्होने अपने चहेतो को उपकृत करने का भी काम किया।
आते ही शोषण की बुनियाद
संयुक्त मोर्चे में शामिल श्रमिक संगठन एचएमएस, बीएमएस, सीटू, एटक, इंटक व ऑल इंडिया एसटी-एसी, ओबीसी संघ का आरोप है कि महाप्रबंधक यू.टी. कन्जरकर के पदभार गृहण करने के बाद से ही मजदूरो के लिए दमनकारी नीतियों की शुरूआत कर दी गई है, जो कि अब तक के इतिहास में ऐसा देखा नही गया है, बैठक बुलाकर खान प्रबंधक और कार्मिक प्रबंधक ने अपने हिसाब से निर्णय ले लिया कि संडे ड्युटी में इतने ही कर्मचारी लगाये जायेंगे, बांकि का काम ठेका मजदूरो से कराया जायेगा।
244 के अलावा ठेका श्रमिक
बिजुरी भूमिगत कोयला खदान में पदस्थ प्रबंधक के.के. ङ्क्षसह ने सभी श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों की एक बैठक बुलाई, जिसमें उनके द्वारा कहा गया कि संडे के दिन स्थाई कर्मचारियों की ड्युटी कम लगाई जायेगी, केवल 244 मेन पॉवर को ही काम पर लिया जायेगा, बाकी का काम ठेका मजदूरो से कराया जायेगा और वही व्यवस्था लागू कर दी गई, जबकि इस बात का विरोध सभी श्रमिक संगठनों के द्वारा किया गया, बताया गया है कि इस पूरे खेल में कार्मिक प्रबंधक का बहम योगदान है, जबकि सरकार के द्वारा कार्मिक प्रबंधक की पदस्थापना मजदूरो की हितों और उनकी समस्याओं के निदानों के लिए की गई है, लेकिन कथित अधिकारी यहां पर मजदूरो के शोषण करने के लिए बैठे है।
दो शिफ्टो में होगा काम
प्रबंधक ने यह भी तय कर दिया कि रविवार जिस दिन तीन गुना अधिक वेतन मिलता है, उस दिन केवल दूसरी व तीसरी ही शिफ्ट चलाई जायेगी, जबकि कुल कामगारों की संख्या 622 है, जबकि तीनो शिफ्ट मिलाकर 480 मजदूर काम में आते थे, लेकिन प्रबंधन ने फूट डालो राज करो की नीति अपनाकर मजदूरो की छटनी करने का काम किया गया है, वहीं जिन ठेका श्रमिकों को काम पर लगाया गया है, उनका भी शोषण किया जा रहा है। श्रम कानूनो के तहत् न तो उन्हे वेतनमान दिया जा रहा है और नही सुविधाएं मिल रही है। कुल मिलाकर कथित अधिकारी अपनी जेबे गर्म करने में ठेकेदार के माध्यम से मशगूल है।
चहेतो को कर रहे उपकृत
बताया गया है कि बिजुरी कालरी में रविवार के दिन जब पूरी खदान बंद है तो कालरी सर्वेयर एवं मैगजीन क्र्लक की ड्युटी इस बात को साबित करता है कि जब एक भी स्टाफ सर्वेयर के अधीन नही आता है तो सुपरवाईजर का क्या काम एवं जब रविवार को खदान के अंदर किसी भी तरह के बारूद का उपयोग नही है तो मैगजीन क्लर्क का वहां क्या काम, 12 अपैल को प्रथम पाली रविवार बंद था, उसके बाद भी खदान में तीन क्लर्क मौजूद थे, जबकी बहेराबांध और कपिलधारा में मैगजीन क्लर्क व सर्वेयर की ड्युटी नही है। यह सब वह प्रमाण है जो कि कालरी के बडे अधिकारी, उपक्षेत्रीय प्रबंधक, खान प्रबंधक और कार्मिक प्रबंधक की कार्यप्रणाली को कटघरे में खडे कर रहे है, बहरहाल खबर यह भी है कि जल्द ही यह मामला बिलासपुर मुख्यालय पहुंचने वाला है, जिसके बाद इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाहियां शुरू हो गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed