लॉक डाउन से परेशान महिलाएं

समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति हुई दयनीय
(अमित दुबे+8818814739)
शहडोल। प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह महासंघ की संभागीय प्रभारी श्रीमती सुधा प्रकाश चन्द्र जायसवाल ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए अवगत कराया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन पकाकर खिलाने से थाली धुलने तक का काम कर रहे स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं लॉक डाउन के चलते 3 माह से परेशान है। स्कूल बंद होने होने से समूह को मिलने वाला खाद्यान्न छात्र-छात्राओं को घर पहुंचाकर समूहों द्वारा बांटा जा रहा है, जिसका उठाव का परिवहन खर्च जेब से करना पड़ रहा है। इस काम का समूह को कोई मानदेय नहीं दिया जा रहा है। इससे समूह से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति दयनीय होती जा रही है।
जान डाली जोखिम में
संभागीय प्रभारी श्रीमती जायसवाल ने पत्र में उल्लेख किया है कि स्व सहायता समूह आत्म निर्भर बने इसके लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री लगातार संदेश दे रहे हैं, लेकिन स्थानीय अधिकारी जमीनी स्तर पर उनके आदेशों को अमल में नहीं ला रहे हैं, अधिकारी पीएम एवं सीएम के आदेश का गलत अर्थ निकालकर अजीविका मिशन से जुड़े समूहों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ दे रहे हैं। लॉक डाउन की विभीषिका झेल रहे समूह की महिलाएं जिन्होनें कोरोना महामारी के समय शासन के आदेश का पालन करते हुए घर-घर जाकर स्कूली बच्चों को खाद्यान्न व आंगनबाड़ी के बच्चों को लड्डू-सत्तू वितरण का कार्य अपनी जान जोखिम में डाल कर किया।
समूह ने की दो मांग
संभागीय संगठन ने प्रदेश सहित केन्द्र सरकार से मांग की है कि स्कूलों में वितरण होने वाली ड्रेस की सिलाई का कार्य, स्कूलों में मध्यान्ह भोजन परोस रहे स्थानीय स्व सहायता समूह को दिया जाये, साथ ही आंगनबाड़ी की तर्ज पर स्कूलों में भी मध्यान्ह भोजन रेडी टू ईट की तरह होम डिलेवरी समूहों से कराया जाये। संभागीय प्रभारी ने कहा कि लॉक डाउन की विभीषका झेल रहे समूहों को तत्काल संबल देने के उद्देश्य से उक्त मांगे माना जाना जरूरी है, मांग नहीं माने जाने पर म.प्र. स्व सहायता समूह महासंघ प्रदेश स्तर पर आंदोलन के लिए मजबूर हो जायेगा।