शहडोल महिला थाना बना दिखावा,सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायत पर भी नहीं हुई कार्रवाई
शहडोल। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए महिला थानों की स्थापना की गई थी, लेकिन शहडोल महिला थाना आज महिलाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल होता दिख रहा है। एक ताज़ा मामला इस व्यवस्था की पोल खोलता है, जहाँ एक महिला द्वारा सेक्सुअल हैरेसमेंट और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोपों की शिकायत को न तो दर्ज किया गया और न ही कोई जांच प्रक्रिया शुरू की गई। पीडि़ता ने अपनी लिखित शिकायत में शिवेंद्र सिंह, निवासी कल्याणपुर कोलारी फाटक, का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि वह उसे व्हाट्सएप पर अश्लील संदेश भेजता है और मानसिक रूप से प्रताडि़त करता है। महिला का कहना है कि उसने शिकायत को महिला थाने में दर्ज कराने का प्रयास किया लेकिन वहां उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।इतना ही नहीं, पीडि़ता ने मध्यप्रदेश सरकार की महिला हेल्पलाइन 1090 पर भी शिकायत की, जो महिलाओं की सुरक्षा और त्वरित मदद के लिए चालू की गई है। लेकिन वहाँ से भी उसे कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। पीडि़ता का कहना है कि उसकी शिकायत को न संज्ञान में लिया गया, न कोई कॉल बैक हुआ, और न ही पुलिस की तरफ से कोई संपर्क किया गया। यह स्थिति ना केवल कानूनी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि महिला सुरक्षा को लेकर प्रशासन की कथित सजगता पर भी गंभीर संदेह उत्पन्न करती है। महिला ने बताया कि आरोपी व्यक्ति लगातार उसे धमकी भरे मैसेज भेज रहा है, लेकिन पुलिस की बेरुखी से वह अब मानसिक रूप से टूट चुकी है।
इस मामले में जब हमारे प्रतिनिधि ने महिला थाना शहडोल में संपर्क किया, तो संबंधित अधिकारियों ने टालमटोल रवैया अपनाते हुए जांच में है कहकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। लेकिन यह स्पष्ट है कि शिकायत दर्ज तक नहीं की गई, जिसका कोई पावती नंबर या केस आईडी तक नहीं है। सवाल ये उठता है कि यदि ऐसे गंभीर मामलों में भी कार्रवाई नहीं होती, तो आम महिला नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए कहाँ जाए? क्या महिला थानों का मकसद केवल कागजों पर महिला सशक्तिकरण दिखाना भर है?
इस मामले ने पूरे जिले में महिला थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए महिला थाने की जवाबदेही तय करने की माँग की है। अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं, या फिर यह मामला भी अनसुना और अनसुलझा रह जाएगा, जैसा कि कई बार होता आया है।