श्रीमद् भागवत ज्ञान महायज्ञ का भव्य शुभारंभ,पहले दिन ध्रुव और कपिल चरित्र का हुआ भावपूर्ण वर्णन, नगर में निकली भव्य कलश यात्रा
शहडोल। नगर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण का अनोखा संगम देखने को मिला, जब बुढार रोड स्थित डी सदन मैरिज गार्डन में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में कथा वाचक के रूप में चित्रकूट धाम से पधारे श्री श्री 1008 श्री स्वामी बद्री प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने शहडोल की पावन भूमि पर कथा का शुभारंभ किया।कथा का संकल्प सेवानिवृत व्याख्याता चंद्रशेखर वर्मा ने लिया। आयोजन की शुरुआत गाजे-बाजे और भव्य कलश यात्रा से हुई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु महिलाएं एवं भक्तगण कलश धारण कर नगर भ्रमण पर निकले। भक्तिमय गीतों, हरि नाम संकीर्तन और बैंड-बाजों की धुनों से पूरा नगर गूंज उठा।
कलश यात्रा के उपरांत व्यास पीठ की विधिवत पूजा-अर्चना, पुराण पूजन और श्रीमद् भागवत जी का महात्म्य दर्शन कराया गया। कथा के प्रथम दिवस में पूज्य गुरुदेव श्री स्वामी बद्री प्रपन्नाचार्य ने बालक ध्रुव जी के जीवन चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि भक्ति और भगवान प्राप्ति के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता। पाँच वर्ष की अल्पायु में ध्रुव जी ने अपने दृढ़ संकल्प और भजन साधना से भगवान विष्णु का साक्षात् दर्शन किया, जो समर्पण और श्रद्धा का सर्वोत्तम उदाहरण है।
इसके पश्चात स्वामी जी ने कपिल देव जी के उपदेशों का उल्लेख करते हुए भक्तों को भक्ति मार्ग की सरलता और सार्थकता समझाई। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन में निःस्वार्थ भाव से ईश्वर की भक्ति करता है, तभी उसे सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति होती है।

पूरे आयोजन स्थल को पुष्पों, भगवामय पताकाओं और झंडों से सजाया गया है। श्रद्धालु भक्तों के लिए प्रतिदिन कथा श्रवण के साथ-साथ प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई है। आयोजक समिति ने नगर के समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों से निवेदन किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा महोत्सव में भाग लें और दिव्य कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त करें।