सोशल मीडिया प्रताड़ना बनी मौत की वजह ढीमरखेड़ा में महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार
सोशल मीडिया प्रताड़ना बनी मौत की वजह ढीमरखेड़ा में महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार
सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी जब किसी की आत्मा को छलनी कर दे, तो वह केवल शब्द नहीं रह जाती वह अपराध बन जाती है। ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र में महिला को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने संवेदनशीलता और सख्ती का परिचय देते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया।
कटनी/ढीमरखेड़ा।। सोशल मीडिया पर की गई अभद्र टिप्पणियां जब मानसिक प्रताड़ना का रूप ले लें, तो उनका अंजाम जानलेवा भी हो सकता है। ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां एक महिला को लगातार अपमानित किए जाने के बाद आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया। मामले की गंभीरता को समझते हुए ढीमरखेड़ा पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह कार्रवाई थाना प्रभारी अभिषेक चौबे के नेतृत्व में की गई।
पुलिस के अनुसार, 27 दिसंबर को ग्राम कटरिया निवासी महिला सलमा बी ने आत्महत्या कर ली थी। जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट को लेकर आरोपियों द्वारा महिला पर की गई अश्लील, अपमानजनक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाली टिप्पणियों से वह गहरे तनाव में थी। इन्हीं टिप्पणियों से आहत होकर महिला ने यह आत्मघाती कदम उठाया। घटना के बाद पूरे गांव में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।
मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए पुलिस ने मर्ग कायम कर हर पहलू से जांच की। जांच में मिले ठोस साक्ष्यों के आधार पर शिवम चौधरी, रमेश चौधरी एवं फूलबाई चौधरी, निवासी ग्राम कटरिया, थाना ढीमरखेड़ा के विरुद्ध धारा 108 एवं 3(5) भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के दौरान तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। किसी को आत्महत्या के लिए उकसाना या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कानून की नजर में गंभीर अपराध है। सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर किसी की गरिमा और मानसिक शांति से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई न केवल कानून का सख्त संदेश है, बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी है कि शब्दों की मार कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है। यह मामला स्पष्ट करता है कि आत्महत्या के लिए प्रेरित करना केवल नैतिक नहीं, बल्कि कानूनी रूप से भी गंभीर अपराध है। पुलिस की यह कार्रवाई न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर की गई अभद्रता और मानसिक प्रताड़ना अब अनदेखी नहीं की जाएगी। कानून ऐसे कृत्यों पर कठोर प्रहार करेगा।