खाली ट्रैक्टर की जप्ती, चालक को बंधक बनाकर बेरहमी से की मारपीट

0
बिजुरी रेंजर की कथित तानाशाही के खिलाफ ट्रैक्टर चालकों का फूटा गुस्सा
(अरविन्द द्विवेदी)
अनूपपुर।जब कानून का रखवाला ही कानून को कुचलने लगे और सरकारी वर्दी वसूली व दमन का हथियार बन जाए, तब जनआक्रोश का विस्फोट तय होता है। बिजुरी वन परिक्षेत्र में रेंजर पवन ताम्रकार पर लगे गंभीर आरोपों के बाद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। खाली ट्रैक्टर की अवैध जप्ती, चालक को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटने और 25 हजार रुपये की कथित रंगदारी मांगने के विरोध में ट्रैक्टर चालक, माली और ग्रामीण दूसरे दिन भी अनशन व धरने पर डटे रहे। उपस्थित जनों और पीड़ित का कहना है कि खाली ट्रैक्टर उठाकर बनाई कार्रवाई और गरीब ड्राईवर पर अपनी भड़ास निकाली। ग्रामीणों का आरोप है कि कोठी गांव से एक खाली ट्रैक्टर (क्रमांक MP65 ZA 7949) को रेंजर पवन ताम्रकार के निर्देश पर जबरन जप्त किया गया। न तो ट्रैक्टर में लकड़ी थी, न कोई वन अपराध, फिर भी कार्रवाई कर वाहन को रेंज कार्यालय में खड़ा कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रेंजर अपनी कथित कार्यकुशलता दिखाने और विभाग में वाहवाही लूटने के लिए निर्दोष वाहन मालिकों को निशाना बना रहे हैं।
25 हजार की उगाही नहीं दी तो ड्राइवर को बनाया बंधक
पीड़ित ट्रैक्टर मालिक रवि सिंह बघेल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके ड्राइवर ओम कुशवाहा को रास्ते में रोककर वन अमले ने 25 हजार रुपये की मांग की। जब चालक ने पैसे देने से इनकार किया, तो उसे कथित तौर पर बंधक बना लिया गया। आरोप है कि रेंजर पवन ताम्रकार ने स्वयं चालक के साथ मारपीट की, जानवरों की तरह पीटा और ट्रैक्टर को राजसात कर बर्बाद करने की धमकी दी। वहीं दूसरे दिन भी लागातार अनशन जारी रहा और रेंजर मुर्दाबाद से पूरा रेंजर कार्यालय गूंज उठा। बुधवार को दूसरे दिन भी बिजुरी वन परिक्षेत्र कार्यालय के सामने ट्रैक्टर चालक, मालिक और ग्रामीण अनशन पर बैठे रहे। प्रदर्शन के दौरान रेंजर पवन ताम्रकार मुर्दाबाद और जंगलराज नहीं चलेगा जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक दोषी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन और तेज किया जाएगा।
मानवाधिकारों का हनन, प्रशासन की चुप्पी से खड़े सवाल 
ग्रामीणों ने प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या रेंजर को कानून अपने हाथ में लेने की खुली छूट दे दी गई है? खाली वाहनों की अवैध जप्ती, चालक को बंधक बनाना, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं। पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन की चुप्पी पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या अब रेंजर को कानून अपने हाथ में लेने की खुली छूट दे दी गई है। उनका आरोप है कि जिस तरह से खाली वाहन की अवैध रूप से जप्ती की गई, चालक को जबरन बंधक बनाकर रखा गया, तथा उसके साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की गई, वह सीधे तौर पर गंभीर आपराधिक कृत्यों की श्रेणी में आता है। यदि किसी प्रकार का संदेह भी था तो नियमानुसार वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। इस पूरे मामले के बाद बिजुरी क्षेत्र में जंगलराज जैसे हालात बन गए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक मौन तोड़ेगा और क्या निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
कार्यवाही नहीं हुई तो आंदोलन उग्र करने की चेतावनी 
पीड़ित पक्ष द्वारा बिजुरी थाना प्रभारी को एक लिखित शिकायत सौंपते हुए रेंजर पवन ताम्रकार एवं अन्य संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की गई है। शिकायत में बताया गया है कि घटना के बाद चालक का मेडिकल परीक्षण तो करा लिया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक किसी भी प्रकार की ठोस और निर्णायक कार्यवाही नहीं की गई है। प्रशासन की इस निष्क्रियता से पीड़ित पक्ष के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश व्याप्त है। न्याय की मांग को लेकर अनशन पर बैठे ट्रैक्टर चालकों एवं मालिकों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही नहीं की गई, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र व व्यापक रूप देने के लिए बाध्य होंगे। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा लगातार अनदेखी किए जाने से उनका सब्र टूटता जा रहा है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed