पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज की माँग तेज, संदेहास्पद संस्था से अनुबंध निरस्त करने की उठी आवाज़ दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने केंद्र व राज्य सरकार को सौंपा शिकायत पत्र
पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज की माँग तेज, संदेहास्पद संस्था से अनुबंध निरस्त करने की उठी आवाज़
दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने केंद्र व राज्य सरकार को सौंपा शिकायत पत्र
जिले को वर्षों से जिस शासकीय मेडिकल कॉलेज का इंतज़ार था, उसे अब पीपीपी मॉडल के नाम पर निजी मुनाफे का अड्डा बनाया जा रहा है। एनएसयूआई एवं युवक कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष व प्रदेश युवा कांग्रेस सचिव दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद वीडी शर्मा और विधायक संदीप जायसवाल ने जनता से झूठा वादा कर पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज के स्थान पर निजी संस्थान को सौंपा गया मेडिकल ढांचा थमा दिया है।उन्होंने कहा कि जिस स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन से शासन ने पीपीपी मोड पर अनुबंध किया है, उसकी पारिवारिक संस्था आरकेडीएफ पहले ही फर्जी मार्कशीट जैसे गंभीर आपराधिक प्रकरणों में एसटीएफ की कार्रवाई झेल चुकी है। ऐसे संस्थान को मेडिकल शिक्षा और जनस्वास्थ्य सौंपना सीधे-सीधे जनता की जान से खिलवाड़ है।
कटनी।। कटनी जैसे औद्योगिक, आदिवासी एवं ग्रामीण बहुल जिले में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना केवल एक राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की अनिवार्यता है। ऐसे जिले, जहाँ बड़ी आबादी आज भी निजी अस्पतालों की महंगी सेवाओं से वंचित है, वहाँ मेडिकल कॉलेज का स्वरूप सीधे जनता के जीवन से जुड़ा होता है। हाल ही में कटनी में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को पीपीपी (पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर स्थापित करने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। पीपीपी मॉडल देश के कुछ हिस्सों में सफल रहा है, लेकिन स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इसकी सफलता संस्था की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और सामाजिक प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है। यदि किसी निजी भागीदार संस्था का पिछला रिकॉर्ड विवादों या आपराधिक जांच से जुड़ा रहा हो, तो यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह सार्वजनिक हित में पुनर्विचार करे। मेडिकल कॉलेज केवल भवन और डिग्री देने का केंद्र नहीं होता, बल्कि यह हजारों मरीजों के जीवन, भविष्य के डॉक्टरों की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का आधार होता है। जिले में बहुप्रतीक्षित शासकीय मेडिकल कॉलेज को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। एनएसयूआई एवं युवक कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष तथा प्रदेश युवा कांग्रेस सचिव दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को कलेक्टर के माध्यम से शिकायत पत्र सौंपते हुए पीपीपी मोड पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का विरोध दर्ज कराया है।
दिव्यांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद वीडी शर्मा और मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल द्वारा जनता को पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज का सपना दिखाकर वास्तव में पीपीपी मोड के कथित लूट केंद्र की व्यवस्था की जा रही है, जो जनहित के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि जिले जैसे आदिवासी, श्रमिक और ग्रामीण बहुल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण जनता के साथ अन्याय है।
उन्होंने गंभीर सवाल उठाते हुए बताया कि जिस स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के साथ शासन ने पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज के लिए अनुबंध किया है, उसकी पारिवारिक संस्था आरकेडीएफ को एसटीएफ भोपाल द्वारा फर्जी मार्कशीट प्रकरण में हिरासत में लेकर कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में यह आशंका स्वाभाविक है कि यह संस्था शिक्षा और स्वास्थ्य को सेवा नहीं, बल्कि व्यापार के रूप में संचालित करेगी।
दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने कहा कि संदेहास्पद पृष्ठभूमि वाली संस्था से मेडिकल कॉलेज संचालन का अनुबंध तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए और जिले में पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाए, ताकि गरीब, मध्यम वर्ग और ग्रामीण मरीजों को सस्ती व भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उक्त संस्था से अनुबंध निरस्त नहीं किया गया, तो यह माना जाएगा कि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि इस लूट के खुले खेल में सहभागी हैं। कांग्रेस पार्टी जनहित के इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी और पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज की माँग से पीछे नहीं हटेगी। पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इलाज अपेक्षाकृत सस्ता और सुलभ होता है गरीब व ग्रामीण मरीजों को प्राथमिकता मिलती है
चिकित्सा शिक्षा व्यवसाय नहीं, सेवा के सिद्धांत पर आधारित रहती है,इसके विपरीत, यदि निजी लाभ प्राथमिक उद्देश्य बन जाए, तो स्वास्थ्य सेवाओं के महंगा होने, गुणवत्ता में गिरावट और सामाजिक असमानता बढ़ने का खतरा रहता है।
कटनी प्रकरण में उठ रहे सवाल केवल राजनीतिक नहीं हैं; ये नीतिगत और नैतिक हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को दलगत दृष्टि से नहीं, बल्कि जनहित, पारदर्शिता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य नीति के आधार पर देखे। यदि जनता पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज की माँग कर रही है, तो उसे केवल विरोध के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।