चरभइया धाम में ऐतिहासिक भंडारा, 25 हजार श्रद्धालुओं ने किया प्रसाद ग्रहण
शहडोल।जिले के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र स्थित चरभइया धाम 1 फरवरी को श्रद्धा, सेवा और सनातन परंपरा का भव्य केंद्र बनकर उभरा। यहां आयोजित विशाल धार्मिक आयोजन और महाभंडारे में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और अनुशासित व्यवस्थाओं के साथ यह आयोजन जिले के इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।आयोजन की शुरुआत सुबह करीब 11 बजे भव्य कलश यात्रा से हुई। हजारों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर जब धाम परिसर और आसपास के मार्गों से यात्रा निकाली, तो पूरा वातावरण जयकारों, भजन-कीर्तन और देवी भक्ति से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ, लेकिन लोगों के उत्साह और श्रद्धा में कोई कमी नहीं दिखी। हर ओर आस्था और उल्लास का दृश्य देखने को मिला।
कलश यात्रा के पश्चात विधिविधान से पूजन-अर्चन और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसे शहडोल जिले के देवी मंदिरों में हुए अब तक के सबसे बड़े भंडारों में से एक माना जा रहा है। एक साथ करीब 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। दोपहर से शुरू हुआ भंडारा देर शाम तक निरंतर चलता रहा। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था और सेवा भाव ने आयोजन को विशेष बना दिया।

इस भव्य और ऐतिहासिक आयोजन के पीछे भाजपा विधायक शरद कोल की अहम भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन और निरंतर प्रयासों से यह आयोजन इतने बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। आयोजन की शुरुआत उन्होंने विधिवत कन्या पूजन से की। बालिकाओं के चरण धोकर उनका आशीर्वाद लिया और इसके बाद स्वयं सेवा कार्य में जुट गए। विधायक शरद कोल ने प्रसाद वितरण किया और अंत में ग्रामीणों व श्रद्धालुओं के साथ जमीन पर बैठकर भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। उनकी सादगी और आत्मीय व्यवहार की पूरे आयोजन में सराहना होती रही।
चरभइया धाम के विकास और आज की भव्य पहचान के पीछे वर्षों से चल रहे प्रयास साफ नजर आते हैं। विधायक शरद कोल के नेतृत्व में धाम परिसर में चारदीवारी निर्माण, सुव्यवस्थित प्रवेश मार्ग, संत-महात्माओं के ठहरने और भोजन की स्थायी व्यवस्था तथा गौशाला की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्य पहले ही किए जा चुके हैं। यह व्यवस्थाएं केवल बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे वर्ष नियमित रूप से संचालित होती हैं।
गौशाला में गायों की सेवा, संतों के लिए शांत वातावरण और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं चरभइया धाम को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और सनातन परंपरा का जीवंत केंद्र बनाती हैं। आदिवासी समाज सहित क्षेत्र के सभी वर्गों की आस्था इस धाम से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसके चलते यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

इस विशाल आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में चरभइया धाम शहडोल संभाग ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एक विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान स्थापित करेगा। सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता का यह संगम क्षेत्रवासियों के लिए आस्था का स्थायी केंद्र बनता जा रहा।