अवैध उत्खनन के खिलाफ आवाज उठाई तो घर में घुसकर हमला, गर्भवती महिला सहित कईयों के साथ की मारपीट,एससी-एसटी एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
अवैध उत्खनन के खिलाफ आवाज उठाई तो घर में घुसकर हमला, गर्भवती महिला सहित कईयों के साथ की मारपीट,एससी-एसटी एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
कटनी।। जिले के कुठला थाना क्षेत्र के ग्राम कन्हवारा में अवैध उत्खनन का विरोध करना आदिवासी परिवारों को भारी पड़ गया। खनन से जुड़े लोगों ने आधी रात गांव पहुंचकर तीन परिवारों के घरों में घुसकर महिलाओं और पुरुषों के साथ बेरहमी से मारपीट की। इस हमले में कई लोग घायल हो गए, जिनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है। घटना के बाद पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर तीन नामजद आरोपियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की विभिन्न धाराओं और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस द्वारा आरोपियों की तलाश की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार कन्हवारा क्षेत्र के जंगलों में लंबे समय से मुरूम, बॉक्साइट और आयरन ओर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। आदिवासी परिवारों ने इसकी शिकायत वन विभाग और संबंधित अधिकारियों से की थी। आरोप है कि कार्रवाई के बजाय शिकायत की जानकारी ही खनन से जुड़े लोगों तक पहुंच गई।
पीड़ितों का कहना है कि 14 और 15 मार्च की दरमियानी रात करीब 2 बजे 7–8 लोग वाहनों से गांव पहुंचे और तीन आदिवासी परिवारों के घरों में घुसकर मारपीट शुरू कर दी। सुखदेव प्रसाद उर्फ भूरा कोल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि हमलावरों ने महिलाओं और पुरुषों को लात-घूंसों और डंडों से पीटा। घर में मौजूद एक गर्भवती महिला के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। पीड़ित गोरेलाल कोल ने आरोप लगाया कि हमलावर उसे जबरन वाहन में बैठाकर उत्खनन स्थल तक ले गए और वहां भी मारपीट की।
कुठला थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित सुखदेव प्रसाद उर्फ भूरा कोल की रिपोर्ट पर दीपक परिहार, अभिषेक पटेल और लखन साहू सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 296, 115(2), 191(2), 190, 331(6), 351(3) तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(द), 3(1)(ध), 3(2)(क), 3(2)(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के जंगलों में लंबे समय से अवैध खनन का कारोबार चल रहा है। शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से खनन में लगे लोगों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध उत्खनन के खिलाफ आवाज उठाने वालों को धमकाया जाता है और विरोध करने पर ऐसे हमले किए जाते हैं। कन्हवारा की यह घटना केवल मारपीट का मामला नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों की लूट से जुड़ा गंभीर सवाल भी है। यदि अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले इतने बुलंद हो जाएं कि वे आधी रात ग्रामीणों के घरों में घुसकर महिलाओं तक से मारपीट करें, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी चुनौती है। खनिज संपदा का अवैध दोहन और उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों को डराने की कोशिश यह बताती है कि कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह साफ संदेश जाना जरूरी है कि नियमों को ताक पर रखकर प्राकृतिक संपदा की लूट और निर्दोष लोगों पर हमला करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस आरोपियों को कितनी जल्द गिरफ्तार कर कानून के दायरे में लाती है और संबंधित विभाग अवैध उत्खनन के पूरे नेटवर्क पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है।