आपसी विवाद और विभागीय लापरवाही के बीच जानलेवा बनी बिजली व्यवस्था, नया खंभा न लगने से मंडरा रहा बड़े हादसे का डर
(मोहम्मद शाकिब खान, मुख्य संवाददाता, गौरेला)
दिनांक : 03/04/2026
सारबहरा (जीपीएम): जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के ग्राम पंचायत सारबहरा स्थित एकता नगर (वार्ड नंबर 17, गली नंबर 3) में बिजली विभाग की लापरवाही और आपसी विवाद के कारण एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

यहां न केवल एक उपभोक्ता पिछले कई महीनों से नए कनेक्शन और खंभे के लिए तरस रहा है, बल्कि खंभे के अभाव में अव्यवस्थित ढंग से खींचे गए बिजली के तारों के कारण मोहल्ले के अन्य निवासियों की जान पर बन आई है।
हाल ही में सामने आए नए दस्तावेजों और शिकायतों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि इस गली में विधिवत नया बिजली का खंभा लगाया जाना केवल एक उपभोक्ता की सुविधा का मामला नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले की सुरक्षा के लिए नितांत आवश्यक है।
अव्यवस्थित तारों से जानलेवा हादसा: ‘मरते-मरते बचा’ उपभोक्ता
नए खंभे के अभाव में छतों के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार अब जानलेवा साबित हो रहे हैं।
इसी गली के निवासी इनामुल हक (पिता नूरुल हक) द्वारा 13 नवंबर 2024 को सहायक यंत्री (CSPDCL, पेंड्रारोड) को की गई लिखित शिकायत स्थिति की भयावहता को दर्शाती है।
शिकायत के अनुसार, उनके पुराने टीनशेड वाले घर के ऊपर से अन्य घरों को सप्लाई देने वाले बिजली के तार गुजारे गए हैं। हाल ही में यह तार टीनशेड से टच हो गया, जिससे पूरे घर में भयंकर करंट फैल गया। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट लिखा है कि इस घटना में वह “मरते-मरते बचा है।” उन्होंने मांग की है कि किसी की मृत्यु जैसी अप्रिय घटना से पहले उनके निजी घर के ऊपर से इन तारों को हटाया जाए।
यह घटना चीख-चीख कर गवाही दे रही है कि निजी छतों के ऊपर से तार खींचने के बजाय, सार्वजनिक मार्ग पर एक सुरक्षित और स्थायी खंभा (Pole) लगाना कितना जरूरी है।
क्या है खंभे का मुख्य विवाद?
एक ओर पुरानी व्यवस्था जानलेवा हो रही है, वहीं दूसरी ओर नए खंभे की स्थापना को आपसी रंजिश के कारण रोका जा रहा है। डॉ. ओबेश खान ने घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन किया था, जिसके लिए विभाग ने खंभा भी आवंटित कर दिया। लेकिन मोहल्ले के ही एक अन्य परिवार (अरशद अय्यूब/जहांगीर अहमद) ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि खंभा उनके भवन के समीप स्थापित हो रहा है। इसी व्यक्तिगत विरोध के कारण ठेकेदार ने काम रोक दिया।
प्रशासन और पंचायत भी मान चुके हैं खंभे की अनिवार्यता:
विवाद की स्थिति में जब मामला राजस्व अधिकारियों के पास पहुंचा, तो जांच में भी यही बात सामने आई कि सुरक्षित बिजली आपूर्ति के लिए खंभा लगना जरूरी है:
एसडीएम का स्पष्ट आदेश (जनवरी 2025): पटवारी के स्थल निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम न्यायालय ने 1 जनवरी 2025 को स्पष्ट आदेश दिया कि नाली और गंदगी की समस्या से बचने के लिए खंभा गली के उत्तर दिशा में (सार्वजनिक मार्ग पर) ही स्थापित किया जाए।
सरपंच का सहमति पत्र (NOC): शुरुआत में भ्रमित होकर एनओसी निरस्त करने वाली ग्राम पंचायत ने भी जब मौके का मुआयना किया, तो 10 जनवरी 2025 को सरपंच ने लिखित में दिया कि: “मौका निरीक्षण किया जा चुका है तथा वहां पर प्रस्तावित बिजली के खंभे की अति आवश्यकता है… मैं खंभा लगाने हेतु अनुशंसा करता हूँ।”
विद्युत विभाग और ठेकेदार की लापरवाही:
एसडीएम के स्पष्ट आदेश, ग्राम पंचायत की एनओसी और इनामुल हक जैसे निवासियों के घर में करंट फैलने जैसी गंभीर शिकायतों के बावजूद, विद्युत विभाग के ठेकेदार (आलोक अग्रवाल) द्वारा अब तक खंभा नहीं लगाया जाना घोर लापरवाही को दर्शाता है। उपभोक्ता डॉ. ओबेश खान लगातार विभाग से लेकर कलेक्टर तक गुहार लगा रहे हैं, लेकिन ठेकेदार द्वारा प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवमानना की जा रही है।
निष्कर्ष
दस्तावेजों का यह संपूर्ण विश्लेषण स्पष्ट करता है कि एकता नगर में बिजली के खंभे का लगाया जाना अब कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।
छतों से झूलते और करंट मारते तारों (जैसा कि इनामुल हक के मामले में हुआ) से किसी भी दिन बड़ी जनहानि हो सकती है।
प्रशासन और विद्युत विभाग को चाहिए कि वे किसी भी आपसी विवाद या ठेकेदार की मनमानी को दरकिनार करते हुए, एसडीएम के आदेशानुसार तत्काल नया खंभा स्थापित करवाएं, ताकि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुचारू बिजली मिल सके।