बंद खदानें बनीं माफियाओं का सुरक्षित ठिकाना धरती खोखली कर अवैध उत्खनन का खेल, स्थानीय प्रशासन की साख पर सवाल 5 किमी पीछा कर ट्रैक्टर पकड़ा, पर असली खिलाड़ी अब भी पकड़ से दूर
बंद खदानें बनीं माफियाओं का सुरक्षित ठिकाना
धरती खोखली कर अवैध उत्खनन का खेल, स्थानीय प्रशासन की साख पर सवाल
5 किमी पीछा कर ट्रैक्टर पकड़ा, पर असली खिलाड़ी अब भी पकड़ से दूर
कटनी।। जिले में अवैध उत्खनन का मुद्दा एक बार फिर गंभीर रूप लेता नजर आ रहा है। प्रशासन की ताजा कार्रवाई ने जहां एक ओर खनिज माफियाओं में हड़कंप मचा दिया है, वहीं दूसरी ओर यह भी साफ संकेत दे दिया है कि जिले में बंद पड़ी खदानें अवैध खनन का नया अड्डा बन चुकी हैं। रविवार की सुबह खनिज विभाग द्वारा की गई कार्रवाई में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को 5 किलोमीटर तक पीछा कर पकड़ा गया, जो बिना किसी वैध अनुमति के खनिज परिवहन कर रही थी। चालक द्वारा ट्रॉली खाली कर भागने की कोशिश इस बात का प्रमाण है कि इस पूरे खेल के पीछे संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जो मौके पर सबूत मिटाने में माहिर हैं।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र की पुरानी और बंद पड़ी लेटराइट खदानों से फावड़े-तसलों के जरिए मलबा निकालकर उसे ट्रैक्टर-ट्रॉली से खपाया जा रहा है। ये खदानें वर्षों से बंद हैं, जिससे यहां निगरानी कम और अवैध गतिविधियां ज्यादा हो रही हैं।
जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में मौके पर पकड़े जाने वाले चालक या मजदूर सिर्फ एक कड़ी होते हैं, जबकि असली सरगना परदे के पीछे रहकर पूरा नेटवर्क संचालित करते हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि बिना स्थानीय संरक्षण के इस तरह का अवैध उत्खनन संभव नहीं। कलेक्टर के निर्देश पर जिला टास्क फोर्स लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इन कार्रवाइयों से जड़ तक पहुंचा जा सकेगाजब तक खदानों की नियमित निगरानी, राजस्व और पुलिस विभाग का संयुक्त अभियान और मुखबिर तंत्र मजबूत नहीं होगा, तब तक इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल नजर आता है।