चूहे ने रेलवे को कटघरे में खड़ा कर दिया…. कटनी उपभोक्ता आयोग का अनोखा फैसला बना चर्चा का विषय, यात्री को मिलेंगे 15 हजार रुपये

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चूहे ने रेलवे को कटघरे में खड़ा कर दिया….
कटनी उपभोक्ता आयोग का अनोखा फैसला बना चर्चा का विषय, यात्री को मिलेंगे 15 हजार रुपये
अदालतों और उपभोक्ता फोरम में अब तक आपने टिकट, लेटलतीफी, गुम सामान, खराब भोजन और दुर्घटनाओं से जुड़े अनेक मामले सुने होंगे… लेकिन कटनी में सामने आया यह मामला शायद देश के उपभोक्ता न्यायिक इतिहास के सबसे अनोखे मामलों में गिना जाए। यहां एक चूहे ने सीधे रेलवे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया। मामला जितना हास्यात्मक दिखाई देता है, उतना ही गंभीर भी है, क्योंकि इसने भारतीय रेल की स्वच्छता और यात्री सुविधाओं की वास्तविक तस्वीर उजागर कर दी है।


कटनी। अदालतों और उपभोक्ता आयोगों में अब तक ट्रेनों की देरी, टिकट रिफंड, चोरी या सुविधा संबंधी कई मामले सुने गए होंगे, लेकिन कटनी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में आया यह मामला शायद अपने आप में अनोखा और देश के इतिहास के चुनिंदा मामलों में शामिल माना जा रहा है।
यह ऐसा प्रकरण बन गया है, जिसमें एक चूहे ने सीधे रेलवे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया। सुनने में यह मामला भले ही हास्यात्मक लगे, लेकिन इसके भीतर भारतीय रेल की व्यवस्थाओं की गंभीर तस्वीर भी छिपी हुई है। ट्रेन के वातानुकूलित कोच में यात्रा कर रहे यात्री के बैग में रखे कपड़ों और सामान को चूहों ने कुतर दिया और आखिरकार यह मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। आयोग ने इसे रेलवे की सेवा में कमी मानते हुए यात्री के पक्ष में फैसला सुनाया।
रेलवे की एसी सुविधा पर चूहे भारी पड़ गए
प्रकरण के अनुसार आदर्श कॉलोनी निवासी विपिन दुबे ने वर्ष 2020 में कटनी से कल्याण तक यात्रा के लिए एसी थर्ड क्लास में आरक्षण कराया था। यात्रा के दौरान उन्होंने अपना बैग सुरक्षित स्थान पर रखा था, लेकिन कुछ समय बाद देखा कि बैग को चूहों ने बुरी तरह कुतर दिया है। बैग में रखे कपड़े और अन्य सामान भी खराब हो चुके थे। यात्री ने तत्काल रेलवे अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन जब कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो मामला जिला उपभोक्ता आयोग पहुंचा।
आयोग ने कहा सुरक्षित यात्रा देना रेलवे की जिम्मेदारी
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग कटनी ने मामले की सुनवाई करते हुए माना कि रेलवे यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर यात्रा सुविधा देने में विफल रहा है। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से सेवा में कमी माना।
आयोग ने रेलवे प्रशासन को आदेशित किया कि पीड़ित यात्री को 5 हजार रुपये मानसिक एवं शारीरिक क्षति के लिए, 5 हजार रुपये वाद व्यय के लिए तथा क्षतिग्रस्त सामान की भरपाई सहित कुल 15 हजार रुपये का भुगतान किया जाए।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की प्रभावी पैरवी बनी चर्चा का केंद्र
इस चर्चित मामले में आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मौसुफ बिट्टू एवं अधिवक्ता प्रमोद तिवारी ने प्रभावी पैरवी की। फैसले के बाद यह मामला शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
हंसी भी…और व्यवस्था पर बड़ा सवाल भी
यह मामला लोगों के बीच इसलिए भी तेजी से चर्चा में है क्योंकि इसमें एक तरफ हास्य का तत्व दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर रेलवे की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल भी खड़े होते हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब एसी कोच जैसे प्रीमियम डिब्बों में भी चूहों का आतंक है, तो सामान्य कोचों की स्थिति कैसी होगी।
देश में अपनी तरह का अनोखा मामला
कानूनी जानकारों की मानें तो उपभोक्ता फोरम में इस प्रकार का मामला अत्यंत दुर्लभ है। संभवतः यह उन चुनिंदा मामलों में से एक है, जहां चूहे द्वारा सामान कुतरने को लेकर रेलवे प्रशासन को उपभोक्ता आयोग से दंडित किया गया हो। यह फैसला अब केवल एक स्थानीय खबर नहीं रहा, बल्कि यह उपभोक्ता अधिकारों, रेलवे जवाबदेही और सरकारी सेवाओं की वास्तविकता पर एक बड़ा संदेश बनकर उभर रहा है।

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