मनरेगा के नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां: ग्राम पंचायत सेमरा में मजदूरों का हक मार रहीं मशीनें, जेसीबी और ट्रैक्टर से हो रहा तालाब का काम
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(मोहम्मद शाकिब खान, मुख्य संवाददाता, गौरेला)
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही:
जिले के गौरेला क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सेमरा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत चल रहे कार्यों में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां रोजगार गारंटी योजना के नियमों को ताक पर रखकर तालाब के कार्य में मजदूरों की जगह खुलेआम भारी मशीनों (जेसीबी और ट्रैक्टर) का उपयोग किया जा रहा है।
प्राप्त तस्वीरों और वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जिस काम को कर के गांव के गरीब मजदूरों को रोजगार और रोजी-रोटी मिलनी थी, उसे धड़ल्ले से जेसीबी और ट्रैक्टर के जरिए अंजाम दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर ग्रामीण मजदूरों के हक पर डाका और मनरेगा के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
सरपंच-सचिव का बेतुका तर्क:
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पंचायत में यह कार्य सरपंच तूफान सिंह और सचिव किसान राठौर के द्वारा कराया जा रहा है। जब इस गंभीर मामले के संबंध में ‘हाल ए हलचल न्यूज’ ने सरपंच और सचिव से बात कर उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि “जेसीबी से केवल कचरा उठाया जा रहा है और ट्रैक्टर की मदद से उस कचरे को बाहर डंप किया जा रहा है।”
क्या कहते हैं मनरेगा के नियम?
सरपंच और सचिव की यह दलील मनरेगा के नियमों के आगे बिल्कुल भी नहीं टिकती। मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ही अकुशल शारीरिक श्रम के माध्यम से ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना है। मनरेगा के स्पष्ट नियमानुसार, योजना के तहत स्वीकृत किसी भी कार्य में मिट्टी खुदाई, ढुलाई या अन्य किसी भी काम के लिए भारी मशीनों (जैसे जेसीबी) का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित है। निर्माण कार्यों में केवल कंक्रीट मिक्सर जैसी सीमित मशीनों के उपयोग की ही छूट है।
सब इंजीनियर क्या कहते? संबंधित कार्य को सम्पादित कराने वाली इंजीनियर सुश्री दिव्या साहू का कहना है कि उक्त कार्य मनरेगा से स्वीकृत है किंतु अभी मस्टररोल जनरेट नहीं किया गया है ऐसी स्थिति में मशीन से काम कराया जा सकता है मस्टररोल जनरेट के बाद लेबर से कार्य कराया जाएगा।
मनरेगा पीओ का कहना है कि उक्त कार्य की स्वीकृति प्रदान करने के बाद कार्यादेश जारी कर दिया गया है इसके बाद इस कार्य में मशीनों का उपयोग नहीं किया जा सकता है। चूंकि यह काम तालाब गहरीकरण का है जो कि पूर्णतः मिट्टी का काम है जिसे लेबर से ही कराया जाना अनिवार्य है।
दिनदहाड़े मशीनों से चल रहे इस कार्य ने स्थानीय प्रशासन और मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद उच्चाधिकारी नियमों का उल्लंघन कर मशीनों से काम कराने वाले ग्राम पंचायत सेमरा के जिम्मेदार सरपंच और सचिव पर क्या ठोस कार्रवाई करते हैं।