नगर पालिका में निर्माण कार्यों के नाम पर ‘अवैध वसूली’ का खेल; अधिवक्ता ने मंत्री से की शिकायत

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शहडोल। नगर पालिका क्षेत्र में मकान निर्माण की अनुमति और नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के घेरे में आ गई है। नगर पालिका के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर निर्माण कार्यों के दौरान आम नागरिकों से अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कुमार कार्तिकेय समतानी ने मोर्चा खोलते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री, मध्य प्रदेश शासन को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच और व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की मांग की है।
अधिवक्ता समतानी द्वारा प्रस्तुत शिकायत पत्र के अनुसार, नगर पालिका क्षेत्र के भीतर मकान बनाने वाले नागरिकों को पग-पग पर अवैध धन की मांग का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि जब तक ‘सुविधा शुल्क’ या अवैध राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक निर्माण अनुमति, नक्शा स्वीकृति और भौतिक निरीक्षण जैसी वैधानिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक रोड़े अटकाए जाते हैं। शिकायत में यह भी उल्लेखित है कि यह परिस्थितियां आम नागरिकों, विशेषकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अत्यंत कष्टकारी हैं, जिससे शासन की जनहितकारी नीतियों और प्रशासनिक छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
भ्रष्टाचार के इस कथित तंत्र पर कड़ा प्रहार करते हुए अधिवक्ता ने अपनी मांगों को भी प्रमुखता से शासन के समक्ष रखा है। उन्होंने मांग की है कि नगर पालिका में व्याप्त इस अवैध वसूली के खेल की न केवल उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, बल्कि इसमें संलिप्त दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। उनका तर्क है कि बिना कड़े दंड के इस प्रकार की व्यवस्थागत बुराइयों को जड़ से मिटाना संभव नहीं है।
प्रक्रियात्मक सुधारों पर बल देते हुए अधिवक्ता समतानी ने मंत्री से मांग की है कि निर्माण अनुमति और नक्शा स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी और ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से संचालित किया जाए, ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो सके। साथ ही, उन्होंने संबंधित प्रक्रियाओं के निपटारे के लिए एक निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने का भी सुझाव दिया है, ताकि नागरिकों को अनावश्यक विलंब और मानसिक प्रताड़ना से बचाया जा सके।
आम आदमी को राहत देने के उद्देश्य से शिकायत पत्र में यह विशेष मांग भी शामिल की गई है कि 1000 वर्गफुट तक के छोटे निर्माण कार्यों के लिए अनुमति संबंधी प्रावधानों में शिथिलीकरण किया जाए। अधिवक्ता का मानना है कि छोटे भूखंडों पर घर बनाने वालों को जटिल नियमों से छूट मिलनी चाहिए। अंततः, उन्होंने जनहित और सुशासन के दृष्टिकोण से इस पूरे प्रकरण पर त्वरित संज्ञान लेकर आवश्यक कार्यवाही किए जाने का पुरजोर अनुरोध किया है।

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