मनरेगा में भ्रष्टाचार का खुला खेल: वृद्धा पेंशन ले रहे बुजुर्गों के नाम पर मस्टर रोल भरकर लाखों का फर्जीवाड़ा
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत पड़वानिया में विकास कार्यों के नाम पर पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा उन अति-बुजुर्गों की फर्जी हाजिरी मस्टर रोल में दर्ज की जा रही है, जो चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं और घर बैठे शासन से वृद्धा पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
सूत्रों और दस्तावेजों से प्राप्त पुख्ता जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-2025 और 2025-2026 में हुए लगभग सभी मनरेगा निर्माण कार्यों में इन बुजुर्गों के नाम पर फर्जी तरीके से शासकीय राशि का आहरण किया गया है।
फर्जीवाड़े के मुख्य साक्ष्य
ग्राम पंचायत पड़वानिया में मस्टर रोल की जांच करने पर ऐसे हितग्राहियों के नाम सामने आए हैं, जो शारीरिक रूप से श्रम करने में सर्वथा अक्षम हैं:
रतूला बाई (पति- नंदू): जॉब कार्ड क्रमांक 213
तीरथ कुंवर (पति- गूंथूं राठौर): जॉब कार्ड क्रमांक 770
ये दोनों ही हितग्राही अति वृद्ध हैं और लंबे समय से केवल घर पर ही रहते हैं। शासन द्वारा इन्हें नियमित रूप से वृद्धा पेंशन का भुगतान किया जा रहा है। इसके बावजूद, पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से इन दोनों का मस्टर रोल लगातार भरा जा रहा है और इनके नाम पर शासकीय राशि निकाली जा रही है।
नियमों की खुलेआम अनदेखी
मनरेगा के स्पष्ट नियमों के तहत 18 वर्ष से कम और 60 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे व्यक्ति जिन्हें वृद्धा पेंशन प्राप्त हो रही है, उनका जॉब कार्ड सरेंडर किया जाना चाहिए या उन्हें निष्क्रिय (Inactive) कर दिया जाना चाहिए।
लेकिन ग्राम पंचायत पड़वानिया में नियमों को ताक पर रखकर मृतप्राय हो चुके जॉब कार्ड्स को ‘एक्टिव’ (Active) दिखाकर भ्रष्टाचार की नींव रखी गई है।
घोटाले के मुख्य सूत्रधार
इस पूरे फर्जीवाड़े और शासकीय राशि के गबन के पीछे ग्राम पंचायत पड़वानिया के निम्नलिखित जिम्मेदारों की प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने आ रही है: सरपंच: महेश कुमार पाव सचिव: आरती कश्यप रोजगार सहायक: सीताराम
इन तीनों की मिलीभगत से पंचायत में फर्जी मस्टर रोल तैयार किए जा रहे हैं। बिना काम किए और बिना कार्यस्थल पर गए इन बुजुर्गों के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान निकाला जा चुका है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय गबन का एक गंभीर मामला है। ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि ग्राम पंचायत पड़वानिया के मनरेगा कार्यों और मस्टर रोल की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि शासकीय राशि की लूट पर लगाम लग सके।