पीएम आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: रोजगार सहायक ने हितग्राही के पैसे डकारे, शिकायत करने पर दी जान से मारने की धमकी
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही: जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत अंधियारखोह के एक रोजगार सहायक पर आरोप है कि उसने मिलीभगत करके एक गरीब हितग्राही की आवास किश्त के पैसे अपने रिश्तेदार के खाते में ट्रांसफर करवा कर निकाल लिए हैं।
जब हितग्राही ने अपने पैसे मांगे, तो उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पीड़ित ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कर न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत पत्र के अनुसार, ग्राम अंधियारखोह (तहसील- पेण्ड्रारोड) के निवासी दुमन प्रसाद यादव (पिता- श्री रमेश यादव) का वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था।
फर्जी खाते का इस्तेमाल: आरोप है कि रोजगार सहायक सावन साहू ने अपने सहयोगी रामकृपाल राठौर के साथ मिलकर एक साजिश रची। इन लोगों ने योजना के तहत आई प्रथम किश्त की राशि 40,000/- रुपये को रामकृपाल की बहन कीर्ति राठौर का बैंक पासबुक लगाकर फर्जी तरीके से आहरित कर लिया।
दबाव में लौटाए कुछ पैसे: जब हितग्राही दुमन प्रसाद को इसका पता चला और उसने बार-बार अपनी राशि की मांग की, तो आरोपियों ने मुश्किल से 30,000/- रुपये वापस किए, लेकिन बाकी पैसे देने से इंकार कर दिया।
दबंगई और प्रशासन को जेब में रखने का दावा
पीड़ित का आरोप है कि रोजगार सहायक और उसके सहयोगी अब खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आए हैं:
आरोपियों ने हितग्राही को धमकी दी है कि अगर उसने इस बारे में कुछ बोला तो उसे जान से खत्म कर देंगे।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, एक दिन आरोपियों ने उसे रास्ते में रोककर मारपीट करने की कोशिश की। पीड़ित किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भ्रष्ट रोजगार सहायक और उसके साथी खुलेआम यह धमकी देते हैं कि वे “कलेक्टर और पुलिस को अपनी जेब में रखते हैं”।
प्रशासन से की गई कार्यवाही की मांग
दहशत में जी रहे हितग्राही दुमन प्रसाद यादव ने दिनांक 04/06/2025 को माननीय कलेक्टर महोदय, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही को लिखित शिकायत सौंपकर त्वरित कार्यवाही की मांग की है।
पीड़ित की मुख्य मांगें:
उक्त घटना की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जाए।
दोषी रोजगार सहायक सावन साहू को पंचायत अधिनियम के तहत तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त किया जाए।
सहयोगी रामकृपाल राठौर व अन्य के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी और आपराधिक कार्यवाही की जाए।
इस शिकायत पत्र की प्रतियां एसडीएम (पेण्ड्रारोड), मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत गौरेला) और थाना प्रभारी (गौरेला) को भी उचित कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इन ‘रसूखदार’ आरोपियों पर क्या कार्यवाही करता है और गरीब हितग्राही को उसका पूरा हक मिल पाता है या नहीं।