बांधवगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान, संरक्षण व्यवस्था पर भी उठे सवाल

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पर्यटन उपलब्धि के बीच बहस तेज

उमरिया। देश के प्रतिष्ठित वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शुमार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्स 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने के बाद जहां पर्यटन और वन विभाग से जुड़े अधिकारियों में उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर संरक्षण व्यवस्था, बाघों की सुरक्षा तथा पर्यटन गतिविधियों के संचालन को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों, स्थानीय गाइडों और प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि पुरस्कार निश्चित रूप से गौरव का विषय है, लेकिन इसके साथ-साथ उन मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए जो लंबे समय से चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनका कहना है कि किसी भी टाइगर रिजर्व की वास्तविक सफलता केवल पर्यटकों की संख्या या पुरस्कारों से नहीं, बल्कि वन्यजीवों के सुरक्षित एवं स्वाभाविक जीवन से मापी जानी चाहिए।

पर्यटन दबाव बना चिंता का विषय

वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बांधवगढ़ में पर्यटन गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। कई बार सफारी मार्गों पर वाहनों की अधिक संख्या, बाघों के आसपास पर्यटकों की उत्सुकता तथा बेहतर दृश्य प्राप्त करने की होड़ जैसी स्थितियां देखने को मिलती हैं। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जाती रही है।

सोशल मीडिया वीडियो से बढ़ी बहस

बीते कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर ऐसे अनेक वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें बाघों के आसपास बड़ी संख्या में जिप्सियां दिखाई देती हैं। इन दृश्यों को लेकर संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर चर्चा तेज हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीव पर्यटन का उद्देश्य वन्यजीवों का सम्मानपूर्वक अवलोकन होना चाहिए, न कि उन्हें आकर्षण का केंद्र बनाकर अनावश्यक दबाव पैदा करना।

बाघों की मौतों पर उठते रहे प्रश्न

बांधवगढ़ में विभिन्न समय पर हुई बाघों की मौतों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कई मामलों में जांच, शिकायतों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनी है। संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि इन मामलों के निष्कर्ष और तथ्यों को पारदर्शी तरीके से सामने लाया जाना आवश्यक है, ताकि आमजन के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।

नियमों के पालन पर नजर

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सफारी संचालन, वाहन नियंत्रण, पर्यटकों के आचरण तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने जैसे नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि संरक्षण व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी मजबूत होगी जब नियमों का पालन हर स्तर पर दिखाई देगा।

सम्मान के साथ जवाबदेही भी जरूरी

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बाद प्रबंधन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लोगों का मानना है कि यदि संरक्षण संबंधी आशंकाओं और शिकायतों पर समयबद्ध एवं पारदर्शी स्पष्टीकरण दिया जाए तो रिजर्व की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यटन और संरक्षण दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, लेकिन इनमें संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

जनता जानना चाहती है जवाब

क्षेत्र में अब यह सवाल प्रमुखता से उठ रहे हैं कि क्या संरक्षण संबंधी सभी मानकों का पूरी तरह पालन हो रहा है, बाघों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की स्थिति क्या है और पर्यटन गतिविधियों के संचालन में भविष्य के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। बांधवगढ़ को मिला राष्ट्रीय सम्मान निश्चित रूप से गौरवपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन संरक्षण व्यवस्था से जुड़े सवालों के संतोषजनक उत्तर भी उतने ही आवश्यक माने जा रहे हैं। अब सभी की निगाहें वन प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की आगामी कार्यवाही तथा स्पष्टीकरण पर टिकी हैं।

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