नियमों को ताक पर रख कर हुआ मेडिकल कॉलेज में प्रभार का खेल

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शहडोल। बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को उपकृत करने और फिर विवाद बढ़ते ही बिना कारण बताए रहस्यमयी तरीके से पैर पीछे खींचने का ‘प्रभार का खेल’ थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में मीडिया में आई खबरों और करीब 100 से अधिक विभिन्न शिकायतों के बाद आखिरकार कॉलेज प्रबंधन को झुकना पड़ा है। अधिष्ठाता  कार्यालय द्वारा जारी एक ताजा आदेश ने संस्थान के भीतर चल रही प्रशासनिक उठापटक और म्यूजिकल चेयर के खेल को पूरी तरह उजागर कर दिया है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि लंबे समय तक जिस पद पर काम कराया गया, जब वहां से विदाई दी गई तो आदेश में नाम का उल्लेख करने से क्यों बचा गया? आखिर शहडोल मेडिकल कॉलेज के डीन और आला अधिकारी नाम व कारण का उल्लेख करने से क्यों परहेज कर रहे हैं?
पूरा मामला नर्सिंग ऑफिसर को प्रभारी नर्सिंग अधीक्षक और प्रभारी मेट्रन के पद पर तैनात करने से जुड़ा है। सूत्रों की मानें तो जब नियुक्ति की गई थी, तभी से चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में भारी गहमागहमी और असंतोष देखा गया था। वरिष्ठता और योग्यता की सूची को पूरी तरह नजरअंदाज कर जूनियर स्टाफ को कमान सौंप दी गई थी। इस मनमानी के खिलाफ योग्य और पात्र नर्सिंग स्टाफ ने आवाज उठाई और विभिन्न माध्यमों से लगभग 100 के आसपास शिकायतें अधिष्ठाता कार्यालय से लेकर उच्च स्तर तक पहुंची थीं। नियमों को दरकिनार कर दी गई इस नियुक्ति के पीछे विभागीय खींचतान और वर्चस्व की जंग की खबरें लगातार मीडिया में सुर्खियां बनती रहीं। मरीजों की सुविधा को किनारे रखकर संस्थान के भीतर सिर्फ सियासत को तवज्जो दी जा रही थी, जिससे कार्यसंस्कृति बुरी तरह प्रभावित हुई।
यदि इस पूरे मामले से जुड़े दोनों आधिकारिक पत्रों का बारीकी से अवलोकन करें, तो प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। संयुक्त संचालक एवं अस्पताल अधीक्षक कार्यालय द्वारा आदेश क्रमांक 854/एम.एस./अस्प./बि.मु.जी.एम.सी./2024, दिनांक 18/07/2024 जारी किया गया था। इस पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि अधिष्ठाता महोदय के पत्र क्रमांक 1909/स्था./अराज./एम.सी./2024 शहडोल, दिनांक 02/07/2024 के परिपालन में आगामी आदेश तक अस्पताल के समस्त नर्सिंग कार्यों जैसे- अटेंडेंस, अवकाश, ड्यूटी रोस्टर, यूनिफॉर्म, स्टाफ मैनेजमेंट इत्यादि का संचालन एवं प्रबंधन प्रभारी नर्सिंग अधीक्षक दीपा रोहाणी कनौजिया एवं प्रभारी मेट्रन के द्वारा संपादित किया जाएगा। इसके बाद जब विवाद चरम पर पहुंच गया और खबरें सार्वजनिक हुईं, तो कार्यालय अधिष्ठाता द्वारा आदेश क्रमांक 5637/स्था./अराज./एम.सी./2026, दिनांक 30/06/2026 जारी किया गया, जिसमें लिखा गया कि संस्थान द्वारा गठित की गई जांच प्रतिवेदन के अनुसार इस कार्यालय द्वारा जारी आदेश क्रमांक 1909 दिनांक 02.07.2024 को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है, तथा अब समस्त नर्सिंग ऑफिसर्स के नियंत्रण अधिकारी अस्पताल अधीक्षक एवं उप अस्पताल अधीक्षक होंगे।
अधिष्ठाता द्वारा 30 जून 2026 को जारी निरस्तीकरण के इस आदेश ने प्रशासनिक पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा दी हैं। इस पत्र में कहीं भी उस अधिकारी दीपा रोहाणी कनौजिया के नाम का उल्लेख नहीं है, जिसे हटाया जा रहा है; केवल पुराने पत्र क्रमांक 1909 को निरस्त करने की बात कही गई है। सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि यदि संबंधित कर्मचारी में योग्यता नहीं थी या उनकी नियुक्ति नियमों के विपरीत थी, तो इतने लंबे समय तक उनसे इस महत्वपूर्ण पद पर कार्य क्यों कराया गया? और अब जब हटाया जा रहा है, तो बिना किसी स्पष्ट कारण के क्यों हटाया जा रहा है? जांच प्रतिवेदन में ऐसा क्या निकला जिसे छुपाने की कोशिश की जा रही है?
गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि पर्दे के पीछे का खेल कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। क्या यह कार्रवाई वाकई नियमों की बहाली के लिए की गई है, या फिर यह प्रबंधन के भीतर दो गुटों की आपसी लड़ाई का नतीजा है? आरोप तो यह भी लग रहे हैं कि यह किसी की इच्छा पूर्ति का मामला हो सकता है—यानी जब तक मनमुताबिक काम चलता रहा, तब तक नियमों को ताक पर रखा गया और जैसे ही आपसी तालमेल बिगड़ा या कोई अनुचित इच्छा पूरी नहीं हुई या मनमाना कार्य नहीं हुआ, तो जांच की ढाल बनाकर पद से मुक्त कर दिया गया। जब संस्थान के मुखिया और प्रशासनिक अधिकारी नियमों के बजाय व्यक्ति विशेष की पसंद-नापसंद या अपनी अंतहीन सियासत के आधार पर निर्णय लेने लगें, तो व्यवस्था का चरमराना तय है। मेडिकल कॉलेज में इस प्रभार के खेल और म्यूजिकल चेयर ने यह साबित कर दिया है कि यहां मरीजों की सहूलियत से ज्यादा जोर रसूख की जंग पर है। अब देखना यह होगा कि इस गुपचुप आदेश के बाद क्या वास्तव में वरिष्ठता को सम्मान मिलेगा, या फिर कुर्सी खाली कराकर किसी नए चहेते को बैठाने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है।

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