आज थाने की चौखट पर पहुंचने पर मजबूर ‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’: चुकतीपानी में आवास डकारने वाले पूर्व सरपंच के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज!

0

 

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत जनपद पंचायत गौरेला में चल रहे लाखों के भ्रष्टाचार का एक और स्याह अध्याय सामने आया है। ग्राम पंचायत चुकतीपानी में विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के हितग्राहियों के आवास की राशि (₹40,000/- प्रति हितग्राही) डकारने के मामले में अब पीड़ितों ने कानून का दरवाजा खटखटा दिया है।

‘लिखित रसीद’ बनी अपराध का अकाट्य प्रमाण:

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब आरोपी सरपंच पति द्वारा हितग्राही कार्तिक राम बैगा को दो साल बाद राशि “वापस करने” का स्वयं के हस्ताक्षर युक्त एक लिखित प्रमाण-पत्र दिया गया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रमाण-पत्र ही आरोपी के विरुद्ध सबसे अचूक कानूनी हथियार बन गया है। कानूनन, किसी सरकारी फंड को आहरित कर दो वर्षों तक अपने पास दबाए रखना और पोल खुलने पर उसे निजी तौर पर लौटाने का दावा करना अपराध को समाप्त नहीं करता, बल्कि यह सीधे तौर पर “अपराध की लिखित स्वीकारोक्ति” और “आपराधिक न्यासभंग” की श्रेणी में आता है।

गंभीर कानूनी धाराओं के शिकंजे में घिरे आरोपी:

थाने में सौंपी गई लिखित शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ बेहद कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज होना तय माना जा रहा है:

BNS की धारा 316 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात): पद या प्रभाव का दुरुपयोग कर सरकारी राशि का निजी हित में गबन करने पर यह धारा लगती है, जिसमें 10 वर्ष तक की जेल या उम्रकैद का प्रावधान है।

BNS की धारा 318 (धोखाधड़ी/Cheating): अज्ञानता का अनुचित लाभ उठाकर आदिवासियों के हक का पैसा हड़पने पर 7 वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है।

SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम: पीड़ित अत्यंत पिछड़ी बैगा जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। उनके आवास और बुनियादी अधिकारों को छीनना एक गैर-जमानती संज्ञेय अपराध है, जिसमें आरोपी को थाने से जमानत मिलने का कोई प्रावधान नहीं है।

थाने में FIR के लिए दर्ज कराई शिकायत:

प्रशासनिक उदासीनता और टालमटोल की नीति से आजिज आकर पीड़ित बैगा हितग्राहियों बीर सिंह, कार्तिक राम ने सीधे गौरेला थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। प्रार्थीगणों ने पुलिस को आवेदन सौंपकर पूर्व सरपंच व वर्तमान सरपंच पति सचेंद्र सिंह को नामजद आरोपी बनाते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। पीड़ितों को थाने से विधिवत शिकायत की पावती (Receipt) प्राप्त हो चुकी है, जिससे अब पुलिसिया कार्रवाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

लक्ष्य खोखला, जब तक नहीं मिलेगा न्याय:

एक तरफ जनपद पंचायत द्वारा आवास योजना का लक्ष्य पूरा करने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुकतीपानी में दो साल से अधूरा पड़ा आवास कार्य प्रशासन के दावों की पोल खोल रहा है। पीड़ितों का साफ कहना है कि जब तक सरपंच पति सचेंद्र सिंह पर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होती और गबन की गई राशि की पूर्ण रिकवरी होकर मकान का निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक ये समीक्षा बैठकें केवल कागजी खानापूर्ति हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed