सीईओ के खिलाफ जनप्रतिनिधियों का शक्ति प्रदर्शन

बैठक में अधिकारियों की गैरमौजूदगी से भड़का आक्रोश, अध्यक्ष सहित सदस्यों ने कार्यालय के बाहर दिया धरना; एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
(जय प्रकाश शर्मा )
मानपुर। जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंकित सिरोठिया की कार्यप्रणाली को लेकर जनपद अध्यक्ष सहित सदस्यों का असंतोष खुलकर सामने आया। आवश्यक बैठक में शामिल होने पहुंचे जनप्रतिनिधियों को जब बैठक स्थल पर सीईओ और संबंधित कर्मचारियों की मौजूदगी नहीं मिली तो नाराज सदस्यों ने जनपद कार्यालय के बाहर दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
जनपद अध्यक्ष ममता सिंह के नेतृत्व में धरने पर बैठे सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें बैठक के लिए सूचना देकर बुलाया गया था। इसके बावजूद बैठक स्थल पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी नहीं रही। सदस्यों ने सवाल उठाया कि यदि बैठक स्थगित या निरस्त की गई थी तो इसकी जानकारी पहले से जनपद सदस्यों को क्यों नहीं दी गई।

एक घंटे तक चला धरना
जनप्रतिनिधियों का धरना करीब एक घंटे तक चला। सदस्यों ने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाने के बाद अधिकारियों की अनुपस्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान से भी जुड़ा विषय है। सदस्यों ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर संवाद तथा पंचायत से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग उठाई।
दवाई की पर्ची को लेकर भी विवाद
धरने के दौरान जनपद सदस्य रोशनी सिंह ने सीईओ अंकित सिरोठिया के व्यवहार को लेकर भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि सीईओ धरना स्थल पर पहुंचे और दवाई से संबंधित एक पर्ची धरने पर बैठे सदस्यों की ओर फेंकते हुए कथित तौर पर टिप्पणी की गई कि “पड़े हो तो पढ़ लो, कोई बीमार हो सकता है।” इस कथित टिप्पणी को लेकर सदस्यों ने नाराजगी जताई और इसे जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़ते हुए आपत्ति दर्ज कराई।
वित्त और पंचायत कार्यों को लेकर पहले से उठते रहे सवाल
जनपद सदस्यों के अनुसार 15वें वित्त आयोग की राशि, मनरेगा से जुड़े कार्यों, आय-व्यय के विवरण, बैठकों के एजेंडे तथा पंचायत सचिवों के साथ समन्वय जैसे विषयों को लेकर पूर्व में भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। सदस्यों का आरोप है कि इन मुद्दों पर अपेक्षित संवाद और जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को गति देने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय जरूरी है। यदि दोनों के बीच संवादहीनता बनी रहती है तो इसका सीधा असर पंचायतों के विकास कार्यों और आम लोगों से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।
धरने के बाद एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
धरना समाप्त होने के बाद जनपद अध्यक्ष ममता सिंह सहित जनपद सदस्य एकजुट होकर एसडीएम मानपुर के कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी शिकायतों और आरोपों को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की जांच कराने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन पर जनपद अध्यक्ष सहित जनपद सदस्यों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
जनप्रतिनिधियों के सामूहिक रूप से धरने पर बैठने और इसके बाद प्रशासन को ज्ञापन सौंपने से मानपुर जनपद पंचायत में अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। अब प्रशासनिक जांच और दोनों पक्षों के बयान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विवाद की वास्तविक स्थिति क्या है और आगे क्या कार्रवाई की जाती है।