उमरिया के उत्कृष्ट और आदर्श महाविद्यालय में व्यवस्था पर उठे सवाल

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प्रभारी प्राचार्यों की कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप, उपस्थिति से लेकर शैक्षणिक व्यवस्था तक शिकायतें
उमरिया। जिले के दो प्रमुख शासकीय महाविद्यालयों—उत्कृष्ट महाविद्यालय और आदर्श महाविद्यालय—की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। दोनों संस्थानों में प्रभारी प्राचार्यों की कार्यशैली, नियमित उपस्थिति, अतिरिक्त दायित्वों के निर्वहन और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
उत्कृष्ट महाविद्यालय में प्रभारी प्राचार्य की कार्यप्रणाली पर सवाल
उमरिया उत्कृष्ट महाविद्यालय जिले का प्रमुख शासकीय महाविद्यालय है और इसके अधीन कई महाविद्यालयों का प्रशासनिक दायित्व भी जुड़ा हुआ है। आरोप है कि भौतिकी विषय के विद्यार्थियों की अध्यापन व्यवस्था बेहतर करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा डॉ. अमित निगम को यहां पदस्थ किया गया, लेकिन उनकी उपस्थिति और महाविद्यालय में नियमित कार्य करने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉ. निगम शहडोल से आवागमन करते हैं और निर्धारित समय से पहले महाविद्यालय से रवाना हो जाते हैं। उनकी वास्तविक उपस्थिति की जांच सार्थक उपस्थिति प्रणाली के रिकॉर्ड से किए जाने की मांग की गई है।
डॉ. निगम को प्रभारी प्राचार्य का अतिरिक्त दायित्व मिलने के साथ कई महाविद्यालयों के आहरण-संवितरण संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी भी दी गई है। आरोप है कि महाविद्यालय के नियमित शासकीय कार्यों और फाइलों के संचालन के लिए उन्होंने एक निजी व्यक्ति पर निर्भरता बना रखी है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आदर्श महाविद्यालय में भी प्रभारी प्राचार्य की भूमिका पर सवाल
इसी तरह आदर्श महाविद्यालय में राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक नियाज अंसारी को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उनकी कार्यशैली को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नियाज अंसारी उच्च शिक्षा विभाग के सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना पुलिस प्रशिक्षण स्कूल  में कक्षाएं लेते हैं और इसके बदले मानदेय भी प्राप्त करते हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार यह व्यवस्था पिछले दो-तीन वर्षों से जारी है। ऐसे में उनके महाविद्यालयीन दायित्व और अन्य संस्थान में कार्य करने की अनुमति तथा भुगतान की वैधानिकता की जांच की मांग की गई है।
शुक्रवार को लंबे समय तक अनुपस्थिति का भी आरोप
नियाज अंसारी पर प्रत्येक शुक्रवार को कई घंटे महाविद्यालय से अनुपस्थित रहने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि पूर्व में उनकी अनुपस्थिति को लेकर वेतन रोकने जैसी कार्रवाई भी हो चुकी है। शिकायतकर्ता ने पिछले दो वर्षों की उनकी सार्थक उपस्थिति का रिकॉर्ड जांचने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
भूगर्भशास्त्र के विद्यार्थियों की परीक्षा को लेकर गंभीर मामला
आदर्श महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़ा एक और गंभीर आरोप भूगर्भशास्त्र विषय के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को लेकर सामने आया है। शिकायत के अनुसार निर्धारित समय पर विद्यार्थियों की जानकारी पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय, शहडोल को उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण विद्यार्थियों की परीक्षा समय पर नहीं हो सकी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब दो माह बीत चुके हैं, लेकिन संबंधित विद्यार्थियों की पिछले वर्ष की परीक्षा भी अब तक नहीं हो सकी है। इससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
शिकायतकर्ता ने दोनों महाविद्यालयों की सार्थक उपस्थिति, वेतन भुगतान, अतिरिक्त दायित्व, बाहरी संस्थानों में कार्य करने की अनुमति, मानदेय भुगतान तथा विद्यार्थियों से संबंधित शैक्षणिक रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई जाती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों प्रभारी प्राचार्यों द्वारा शासकीय नियमों का पालन किया गया है या नहीं। अब देखना होगा कि विभाग इन गंभीर शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है।

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