एक सवाल और बदल गया पूरा माहौल दौरा सरकारी था, लेकिन कहानी इंसानियत की बन गई जब कलेक्टर नहीं, बेटे के रूप में नजर आए आशीष तिवारी,अम्मा-दादा का हाथ थामकर खुद डॉक्टर तक ले गए, जिस उम्र में बेटों का सहारा चाहिए, वहां कलेक्टर ने निभाया बेटे का फर्ज
एक सवाल और बदल गया पूरा माहौल दौरा
सरकारी था, लेकिन कहानी इंसानियत की बन गई
जब कलेक्टर नहीं, बेटे के रूप में नजर आए आशीष तिवारी,अम्मा-दादा का हाथ थामकर खुद डॉक्टर तक ले गए, जिस उम्र में बेटों का सहारा चाहिए, वहां कलेक्टर ने निभाया बेटे का फर्ज
अम्मा-दादा को खुद डॉक्टर के कमरे तक ले गए, जांच पूरी होने तक नहीं छोड़ा साथ; इलाज के साथ बीपीएल कार्ड बनवाने के दिए निर्देश
कटनी।। प्रशासनिक पद अक्सर अधिकार, जिम्मेदारी और प्रोटोकॉल से पहचाने जाते हैं, लेकिन गुरुवार को कन्हवारा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने यह एहसास करा दिया कि किसी अधिकारी की असली पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसकी संवेदनशीलता से होती है। यहां कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के व्यवहार में अधिकारी से कहीं अधिक एक बेटे की ममता और जिम्मेदारी नजर आई। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 के तहत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे कलेक्टर श्री तिवारी की नजर इलाज के लिए आए 60 वर्षीय सोनाबाई कोरी और 65 वर्षीय हरिदास कोरी पर पड़ी। वृद्ध दंपति को देखकर कलेक्टर खुद उनके पास पहुंचे और बेहद आत्मीयता से उनका हाल पूछा।

दादा, क्या तकलीफ है
यह छोटा-सा सवाल उस समय वहां मौजूद लोगों के लिए महज औपचारिकता नहीं था। कलेक्टर ने बुजुर्ग दंपति की परेशानी जानी और फिर जो किया, उसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। कलेक्टर स्वयं सोनाबाई और हरिदास कोरी को लेकर डॉक्टर के कमरे तक पहुंचे। स्वास्थ्य परीक्षण शुरू हुआ तो वे वहीं खड़े रहे। चिकित्सकों से लगातार उनकी बीमारी और उपचार के बारे में जानकारी लेते रहे। उनका व्यवहार ऐसा था, मानो कोई बेटा अपने बुजुर्ग माता-पिता के स्वास्थ्य की चिंता कर रहा हो। चिकित्सकों ने बताया कि सोनाबाई कोरी लंबे समय से बुखार आने के साथ हड्डियों से संबंधित परेशानी से पीड़ित हैं। हरिदास कोरी भी हड्डियों की समस्या से जूझ रहे हैं। कलेक्टर ने दोनों के बेहतर उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। लेकिन कलेक्टर की चिंता केवल उस समय की जांच तक सीमित नहीं रही।इ लाज के साथ जीवन का सहारा मजबूत करने की चिंताकलेक्टर श्री तिवारी ने मौके पर मौजूद पटवारी को निर्देश दिए कि वृद्ध कोरी दंपति का बीपीएल कार्ड बनवाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए, ताकि पात्रता के अनुसार उन्हें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

यानी जिस दंपति को उस समय जरूरत थी सिर्फ इलाज की, उनके लिए प्रशासन ने बीमारी के साथ-साथ भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का रास्ता भी तलाशने की कोशिश की। टीबी पीड़ित महिला से भी पूछी दवा और पोषण की चिंता इसी स्वास्थ्य केंद्र में डेढ़ वर्षीय बच्चे के साथ उपचार के लिए पहुंची एक महिला टीबी रोग से पीड़ित मिली। कलेक्टर ने उससे भी आत्मीयता से बात की और पूछा कि शासन की ओर से मिलने वाली निःशुल्क दवाइयां उसे नियमित रूप से मिल रही हैं या नहीं। महिला के स्वास्थ्य की स्थिति जानने के बाद कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह को उसके लिए पोषण आहार किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही उसके बच्चे के टीकाकरण के निर्देश भी दिए। यह दृश्य एक बार फिर यह संदेश दे गया कि बीमारी से लड़ाई केवल दवाइयों से नहीं होती। उसके लिए पोषण, देखभाल और किसी के साथ खड़े होने का भरोसा भी जरूरी होता है।

जब प्रशासन का चेहरा अधिकारी नहीं, अपना व्यक्ति लगा
कन्हवारा के स्वास्थ्य केंद्र में कुछ देर के लिए प्रशासनिक पद और प्रोटोकॉल जैसे पीछे छूट गए। सामने थे दो बुजुर्ग, जिनके पास उनका अपना बेटा नहीं, लेकिन उस वक्त एक अधिकारी बेटे की तरह उनके साथ खड़ा था। अम्मा-दादा को डॉक्टर तक ले जाना, जांच पूरी होने तक उनके पास खड़े रहना, बीमारी की जानकारी लेना और फिर इलाज के साथ बीपीएल कार्ड की चिंता करना—यह पूरा घटनाक्रम शायद किसी सरकारी आदेश की भाषा में दर्ज हो, लेकिन वहां मौजूद लोगों के लिए यह मानवता का ऐसा दृश्य था जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं। यही वजह रही कि कन्हवारा स्वास्थ्य केंद्र का यह दृश्य सामान्य प्रशासनिक निरीक्षण से अलग होकर संवेदनशीलता की मिसाल बन गया। पद बड़ा था, लेकिन उस पल पद से भी बड़ी इंसानियत नजर आई। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य, एसडीएम कटनी जितेन्द्र पटेल, तहसीलदार अजीत तिवारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।