बेपरवाह PMGSY, ढह गई पुलिया की दीवार,एक साल से भस्की सड़क की शिकायत के बाद भी नींद से नहीं जागा विभाग, क्या किसी हादसे का इंतजार है?
ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (PMGSY) की घोर लापरवाही: मालाडाँड़ में CG-MP को जोड़ने वाले मार्ग पर यात्रियों से भरी बसें जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर; संवेदनशील जिला कलेक्टर से त्वरित संज्ञान की आस
मरवाही (जीपीएम)।
जनहित से जुड़ी समस्याओं को उजागर करने के बाद भी संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया बेहद उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना बना हुआ है। छत्तीसगढ़ से पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश को जोड़ने वाले मरवाही-सिवनी से मालाडाँड़ (7.07 किमी) मुख्य मार्ग के धंसने और ढह चुकी पुलिया की खबर को ‘हाल-ए-हलचल’ में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बावजूद, निर्माण एवं रखरखाव के जिम्मेदार विभाग द्वारा अब तक सुधार का कोई कार्य शुरू नहीं कराया गया है।
खबर प्रकाशित होने के बाद भी न तो सड़क की मरम्मत हुई और न ही सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम किए गए। विभागीय अधिकारियों की यह चुप्पी और अकर्मण्यता साफ बयां कर रही है कि उन्हें इस महत्वपूर्ण मार्ग पर रोजाना जान जोखिम में डालकर गुजरने वाले हजारों राहगीरों और यात्रियों की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही शून्य: कुंभकर्णी नींद में सो रहा ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण
इस पूरी तबाही और अनदेखी के लिए सीधे तौर पर ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (PMGSY) के जिम्मेदार अधिकारी कठघरे में खड़े होते हैं। निर्माण गुणवत्ता पर ध्यान न देना और फिर पिछले 1 वर्ष से सड़क व पुलिया बही होने के बावजूद सुधार न कराना अधिकारियों की घोर कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
अधिकारी अपने वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर फाइलों के निपटारे और कागजी पत्राचार में व्यस्त हैं, जबकि धरातल पर रोजाना हजारों लोगों की जिंदगियाँ दांव पर लगी हैं। विभाग का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग को दर्शाता है, बल्कि जनसुरक्षा के प्रति उनकी आपराधिक लापरवाही को भी उजागर करता है।
लाइव वीडियो में कैद खौफनाक तस्वीर: यात्रियों से ठसाठस भरी बसें सीधे मौत के मुहाने पर!
ताजा जमीनी वीडियो और तस्वीरों में कैद दृश्य बेहद भयावह हैं। जिस जगह पर आधी पक्की सड़क ढहकर गहरी खाई में समा चुकी है, ठीक उसी संकरे मुहाने के किनारे से यात्रियों से ठसाठस भरी बसें, कमर्शियल वाहन, पिकअप वाहन और दोपहिया सवार गुजर रहे हैं।
बस में सवार दर्जनों यात्रियों की जान हर पल खतरे में रहती है। ज़रा सी चूक या पहिया खिसकने पर कोई भी बड़ा वाहन सीधे खाई में पलट सकता है। इसके बावजूद विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी स्थिति का जायजा लेने और आपातकालीन राहत कार्य शुरू कराने धरातल पर नहीं पहुँचा है।
1 साल से स्थिति बदतर, संधारण अवधि समाप्त होने का बहाना बना रहा विभाग
यह मुख्य मार्ग पिछले वर्ष (2025) के मानसून में ही कटकर बह गया था। पूरा एक साल बीत जाने के बाद भी इसे दुरुस्त नहीं किया गया। विभागीय सूचना बोर्ड के अनुसार, 31 मार्च 2026 को ठेकेदार (मेसर्स दहंगल बिल्डर्स) की संधारण (Maintenance) समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है। अब विभाग अपनी नाकामी छुपाने के लिए बजट और फाइलों की प्रक्रिया का बहाना बनाकर हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि इस संकरे रास्ते से गुजरते वक्त कोई अनहोनी होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या विभाग किसी बड़ी घटना के बाद ही नींद से जागेगा?
संवेदनशील जिला कलेक्टर से त्वरित हस्तक्षेप और संज्ञान की गुहार
यह मार्ग छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच व्यापार, शिक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए एक मुख्य लाइफलाइन है। वर्तमान में लगातार हो रही बारिश से बचा हुआ आधा मार्ग भी बहने की कगार पर है।
क्षेत्रीय जनता और यात्रियों को अब केवल संवेदनशील जिला कलेक्टर (जीपीएम) से ही उम्मीद है। लोगों ने जिला प्रमुख से मानवीय आधार पर और जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस गंभीर समस्या पर तत्काल त्वरित संज्ञान लेने और लापरवाह विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया है, ताकि आपातकालीन फंड से युद्ध स्तर पर नई पुलिया का निर्माण और सड़क सुदृढ़ीकरण कराया जा सके और किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।